Sharad Yadav जब संसद में बोले थे कि-‘मैंने ऐसा मुर्दों का देश कभी नहीं देखा...’, Osho की भी बताई थी बात
शरद यादव की अब यादें शेष हैं। किसी भी मंच पर बेबाकी से बोलने का अंदाज लोगों को पसंद आता था। संसद में 2012 में दिए उनके भाषण की चर्चा हो रही है जिसमें उन्होंने कहा था कि ‘मैंने ऐसा मुर्दों का देश कभी नहीं देखा’।

Sharad Yadav Memories:जदयू के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और केन्द्रीय मंत्री रहे शरद यादव सड़क से संसद तक जिस भी विषय पर बोले उसकी गूंज देश भर में सुनाई दी। बोलने का बेबाक अंदाज और अपनी बात रखने की शैली, शरद यादव की दूसरे नेताओं से जुदा थी। यादव के निधन के बाद साल 2012 में 12 मई को लोकसभा में दिए भाषण की भी चर्चा हो रही है। भरे सदन में उन्होंने कहा था कि ' मैंने ऐसे मुर्दों का देश कभी नहीं देखा..', । इसी भाषण में जबलपुर से रिश्ता रखने वाले आचार्य रजनीश ओशो की बातों का भी जिक्र किया था।

शरद यादव ने ताउम्र इस बात की परवाह कभी नहीं कि पब्लिक उनके बारे में क्या सोचती है और कोई राजनीतिक नुकसान तो नहीं होगा। भारतीय संसद की 60 वर्ष की यात्रा पूरी होने 13 मई 2012 को संसद में शरद यादव के दिए गए भाषण को लोग याद कर रहे हैं। उन्होंने कहा था कि -साल 1952 के बाद आज जो 60वां साल है, यानी 60 वर्ष बीत गये हैं, तो हमें यहां खड़े होकर सोचना चाहिए कि आज क्या हालत है? यहां महात्मा जी के बारे में आडवाणी जी और सोनिया जी ने चर्चा की। वे इस देश के सबसे बड़े आदमी थे। आजादी में बहुत बड़े-बड़े लोग थे, लेकिन उनसे बड़ा कोई आदमी नहीं था।

देश में मरा हुआ आदमी पूजा जाएगा
देश को बनाने के लिए गांधी के जितने भी विचार हैं, उनमें से एक भी विचार को यह देश मानता हो चाहे आप हो या हम हों, तो आज यह हालत न होती। उसे कौन मानता है? हमने क्यों उनका बुत लगाकर रखा है? अरे, मैंने ऐसा मुर्दों का देश कभी नहीं देखा, जो बुत लगाकर विचारों को मारता है, जो भगवान बनाकर इंसान को मारता है। अरे वाह जी भाई। मैं और रजनीश बहुत दिनों तक साथ रहे। वे जबलपुर के रहने वाले हैं। वे मुझे कहते थे कि शरद बकवास मत करो, इसमें मरा हुआ आदमी पूजा जायेगा, जिंदा आदमी कभी इस देश में नहीं पूजा जायेगा। जो देश बड़े हैं, वहां आदमी के जिंदा रहते हुए मान्यता हुई है, चाहे वह बड़ा हो या खराब करने वाला हो।












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