RTGS Payment: बिजली बिल भुगतान में धांधली का नया तरीका, बड़े पैमाने पर जांच शुरू, पकड़ा जाएगा स्केम
एमपी में पूर्व क्षेत्र विद्धुत वितरण कंपनी में होश उड़ा देने वाली हाईटेक धांधली उजागर हुईं है। मामला बिजली उपभोक्ताओं के बिल भुगतान से जुड़ा हैं। जिसमें ऑनलाइन RTGS पेमेंट सिस्टम का लाभ लेने वाले कंज्यूमर बिल भुगतान करने के बाबजूद खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। जिन लोगों ने अपने बिजली बिल का आरटीजीएस से भुगतान किया, उससे दूसरे उपभोक्ताओं का बिल भर गया। अब बिजली कंपनी ने भुगतान के इस सिस्टम पर रोक लगाने के साथ सभी जगहों पर जांच के निर्देश जारी किए हैं। अकेले सतना जिले में ऐसे 54 केस सामने आए।

RTGS के बिजली बिल भुगतान बना फांस
एमपी में हाईटेक होती जा रही बिजली कंपनियों की सुविधाएं कब किसी के लिए दुविधा बन जाए, कहा नहीं जा सकता। पूर्व क्षेत्र विद्धुत वितरण कंपनी के कंज्यूमर के लिए एक ऐसा ही संकट खड़ा हो गया हैं। दरअसल RTGS से बिल भुगतान में बड़े स्तर पर धांधली सामने आई है। भुगतान करने वाले वास्तविक उपभोक्ता की बजाय ऐसे उपभोक्ताओं के बिलों का भुगतान हो गया, जो कई महीनों से बिल की राशि जमा नहीं कर पा रहे थे। भुगतान करने वाले कंज्यूमर के अगले महीने के बिल में जब बकाया राशि जुड़कर आई और बिजली दफ्तरों में जांच हुई तो यह बड़ा घोटाला निकला।

भुगतान केंद्रों से लेकर बिजली कंपनी मुख्यालय तक हड़कंप
दरअसल यह कारगुजारी सतना जिले में सामने आई। एक के बाद एक उपभोक्ताओं की शिकायते जब बिजली दफ्तरों तक पहुंची और उनके IVRS नंबरके आधार पर अंतिम बिल राशि के RTGS भुगतान का वैध ट्रांजेक्शन देखा तो बिजली विभाग के अकाउंट में संबंधित राशि किसी अन्य उपभोक्ता द्वारा किया जाना प्रदर्शित हुआ। जिसके बाद यह खबर जबलपुर मुख्यालय तक पहुंच गई। मुख्यालय भी यह गड़बड़ी देख हैरान रह गया। क्योकि RTGS के तहत भुगतान के दौरान जनरेट होने वाला UTR नंबर का उपयोग एक उपभोक्ता के खाते में दो बार तक प्रदर्शित हो रहा है।

बिजली कंपनी दायरे वाले क्षेत्रों में जांच शुरू
सतना के अधीक्षण यंत्री ज्ञानी त्रिपाठी का कहना है कि आरटीजीएस से हुए भुगतान की राशि सीधे डिवीजन तक नहीं पहुंचती। इससे पहले यह राशि क्षेत्रीय वित्त अधिकारी के खाते में जाती है। ऐसी स्थिति में RTGS के बाद जनरेट होने वाला UTR नंबर अन्य उपभोक्ताओं के खाते में कैसे सबमिट हुआ, यह गहन जांच का विषय है। इस सिलसिले में मुख्यालय ने अपने दायरे में आने वाले बिजली उपभोक्ताओं के आरटीजीएस भुगतान प्रक्रिया पर रोक लगा दी है। साथ ही बड़े पैमाने पर सभी जगहों पर जांच शुरू कर दी गई है।

बिल जमा करने दस्तावेजों का होगा मिलान
जानकारी के मुताबिक सबसे ज्यादा यह धांधली के प्रकरण सतना जिले में सामने आए है। लगभग 54 केस विभाग को मिले है। अधिकारियों का कहना है कि जिन उपभोक्ताओं का पेमेंट अन्य दूसरे कंज्यूमर के खाते में जमा हुआ, उन दोनों के भुगतान संबंधी दस्तावेज परीक्षण के लिए बुलाए जा रहे है। जिससे यह पता लग सके कि ऑनलाइन UTR नंबर की गड़बड़ी कहां से हुई।

कियोस्क सेंटर भी निशाने पर
जांच के दायरे में बिजली विभाग का आईटी डिपार्टमेंट तो है ही, इसके अलावा कियोस्क सेंटर के लेन-देन के दस्तावेजों को भी देखा जाएगा। शक है कि इस तरह के कॉमन सर्विस सेंटर से डाटा लीक हुआ और यूटीआर का इस्तेमाल दूसरे खातों में किया गया हो। खबर यह भी है कि मामले से हड़कंप मचने के बाद ऑनलाइन आरटीजीएस प्रक्रिया को बदला जाएगा। हालांकि यह सुविधा मैन्युअल काफी समय से चली आ रही है। ऑनलाइन RTGS भुगतान अगस्त 2022 से ही शुरू हुआ। जितने भी मामले संदिग्ध है वह सभी इसी साल अगस्त के बाद के है।












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