Jabalpur News: रिटायर्ड IAS रमेश थेटे दंपति फिर सुर्ख़ियों में, लोकायुक्त पुलिस ने दर्ज किया केस
रिटायर्ड IAS रमेश थेटे और उनकी पत्नी मंदा थेटे एक बार फिर सुर्ख़ियों में हैं। जबलपुर लोकायुक्त पुलिस ने उनके खिलाफ केस दर्ज किया हैं। नौकरी के दौरान अनुपातहीन संपत्ति का मामला उजागर हुआ था।

Retired IAS Ramesh Thete couple: गाहे-बगाहे सुर्खियों में रहने वाले एमपी के रिटायर्ड आईएएस रमेश थेटे फिर चर्चा में है। जबलपुर लोकायुक्त ने कई धाराओं के तहत थेटे दंपति के खिलाफ FIR दर्ज की हैं। लोकायुक्त टीम ने अनुपातहीन संपत्ति अर्जित करने के आरोपों की जांच की थी, जिसके बाद केस दर्ज किया गया है। हालांकि रमेश थेटे की ओर से इस मामले में अभी तक कोई बयान सामने नहीं आया है।

मध्य प्रदेश में दिग्विजय सिंह सरकार के वक्त रमेश थेटे साल 2001-2002 में जबलपुर में पदस्थ थे। नगर निगम कमिश्नर के तौर पर सेवा अवधि में यहां के कई बैंको से लाखों रुपए लोन लिया था। लोकायुक्त में की गई शिकायत के मुताबिक लगभग 68 लाख रुपए का लोन रमेश थेटे ने अपनी पत्नी मंदा थेटे के नाम से लिया था। जो महज 11-12 साल की अवधि में ब्याज समेत चुका दिया था। जिसके खिलाफ लोकायुक्त संगठन ने प्राथमिक जांच 2013 में शुरू की। जांच में पाया गया कि विभिन्न बैंको से लिए गए लोन का भुगतान दंपति ने अपने विभिन्न खातों से किया। जो लोन अवधि में अर्जित वैध कुल आय से अधिक राशि थी। इसी पड़ताल के आधार पर पूर्व IAS और उनकी पत्नी के खिलाफ धारा 13 (1) बी, 13(2) पीसी एक्ट 1988 (संशोधित 2018) और 120 बी भा.दं.वि के अंतर्गत दंपति के खिलाफ केस दर्ज कर विवेचना में लिया गया है।

रमेश थेटे साल 1993 बैच के आईएएस ऑफिसर रहे हैं। मूलतया महाराष्ट्र के रहने वाले रमेश थेटे मप्र बाल संरक्षण आयोग में सचिव के पद पर भी पदस्थ रहे। साल 2002 में बैतूल आईटीआई के प्रिंसिपल से 1 लाख रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथ लोकायुक्त ने पकड़ा था। इस मामले में कोर्ट ने उन्हें दो साल की सजा सुनाई थी। इसके तीन साल बाद राज्य सरकार ने सस्पेंड कर दिया था, फिर डीओपीटी ने उन्हें बर्खास्त कर था। हालांकि जबलपुर हाईकोर्ट से उन्हें राहत मिली और उनका बर्खास्तगी आदेश निरस्त कर दिया गया। प्रमोशन को लेकर भी उनका विवाद बना रहा और जुलाई 2020 में नौकरी से रिटायर हो गए।












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