Dindori की लाहरी बाई के मुरीद हुए मोदी, ‘श्री अन्न’ संरक्षण के प्रयासों से बढ़ा प्रदेश का गौरव: सीएम शिवराज
‘श्री अन्न’ के संरक्षण के लिए मध्य प्रदेश में हो रहे प्रयासों की पीएम मोदी ने सराहना की है। वहीं डिंडौरी जिले की लाहरी बाई की तारीफ की। सीएम शिवराज ने कहा कि लाहरी बाई के प्रयासों से प्रदेश का गौरव बढ़ा है।

PM Modi became fan of MP Dindori's Lahari Bai: मोटा अनाज यानी मिलेट्स का बीज बैंक चलने वाली मध्य प्रदेश के डिंडौरी जिले की लाहरी बाई की खूब चर्चा हो रही है। पीएम मोदी ने ट्वीट कर लाहरी बाई पर गर्व जताया, वहीं मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी तारीफ की। सीएम ने कहा कि बैगा जनजाति की लाहरी बाई ने 'श्री अन्न' के लिए किए प्रयासों से प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। पीएम मोदी के मार्गदर्शन में मोटे अनाजों को प्रोत्साहन देने के प्रयासों को सफलता मिल रही है।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि डिण्डौरी जिले की निवासी लाहरी बाई द्वारा मोटे अनाज 'श्री अन्न' के संरक्षण के लिए किए गए अभूतपूर्व कार्यों ने प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में 'श्री अन्न' यानी मोटे अनाजों को प्रोत्साहन देने के प्रयासों को सफलता मिल रही है। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा लाहरी बाई के प्रयासों की सराहना उनकी संवदेनशीलता का परिचायक है। सीएम ने सोशल मीडिया के माध्यम से यह बात कही। प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट कर डिण्डौरी जिले की लाहरी बाई द्वारा 'श्री अन्न' के संरक्षण के लिए उत्साहपूर्वक किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए लिखा है कि- लाहरी बाई के प्रयास अन्य लोगों को भी 'श्री अन्न' के संरक्षण और उन्हें अपनाने के लिए प्रोत्साहित करेंगे।
बैगा जनजाति की लाहरी बाई डिण्डौरी जिले के ग्राम सिलपदी की निवासी हैं। वे एक दशक से अधिक समय से कुटकी, सांवा, कोदो, कतकी जैसे मोटे अनाजों के संरक्षण में लगी हैं। उनके पास अनेक प्रकार के मोटे अनाजों के बीजों का भंडारण है। ग्रामीण आवास योजना से बना दो कमरों का उनका मकान, आस-पास के क्षेत्र में मोटे अनाज के बीज भंडार के रूप में जाना जाता है। लाहरी बाई का कहना है कि हमारे यहां जो बीज विलुप्त हो गए थे, उन्हें बचाने के लिए अन्य गाँव से बीज लेकर आए और उनका उत्पादन किया, किसानों को बीज बांटे, किसानों ने अपने खेतों के छोटे क्षेत्रों में उन्हें बोया और फसल आने पर हमने उनसे यह वापस ले लिए। विलुप्त हो चुकी कई तरह की फसलों के बीज अब हमारे पास हैं। आपको बता दें कि संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2023 को मिलेट ईयर यानि मोटे अनाज के वर्ष के रूप में घोषित किया है। मोटे अनाज कम सिंचाई में अच्छी उपज देने वाले तथा पोषण से परिपूर्ण होते हैं। फसल चक्र को सुचारू बनाने और छोटे किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में भी इनकी महत्वपूर्ण भूमिका है।












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