Pandit Pradeep Mishra की कथा के लिए जबलपुर में नहीं मिली अनुमति, जानिए चुनावी साल में क्यों हुआ ऐसा?
मध्य प्रदेश के सीहोर वाले चर्चित पंडित प्रदीप मिश्रा की जबलपुर में प्रस्तावित कथा विवादों में पड़ गई है। सभी तैयारियां होने के बाद आयोजकों को प्रशासन ने अनुमति देने से इंकार कर दिया।

Pandit Pradeep Mishra: चुनावी साल में मध्य प्रदेश में धार्मिक आयोजनों के जरिये कथाओं की बहार है। इसी बीच जबलपुर में जून पहले सप्ताह में पंडित प्रदीप मिश्रा की कथा होने वाली थी। लेकिन प्रशासन ने किसी भी रूप में आयोजन की अनुमति देने से भी इंकार कर दिया।
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यह सुनकर आयोजकों को गहरा धक्का लगा। आयोजनकर्ता कुछ समय पहले बनी इंडियन पीपुल्स पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पुरुषोत्तम तिवारी है। उनका कहना है कि प्रशासन द्वारा सहयोग न मिलने की वजह से कथा का प्रोग्राम निरस्त करने का फैसला लिया गया है।
पुरुषोत्तम तिवारी बोले इस पूरे आयोजन का किसी भी रूप में राजनीतिक लाभ का उद्देश्य नहीं था। करीब 6 माह पूर्व से आयोजन की तैयारियां चल रही थी। जिसके प्रचार-प्रसार समेत अन्य जरुरी इंतजामों में लाखों रुपये खर्च हो चुके है।
कई महीने पहले प्रशासन के संज्ञान में भी यह आयोजन लाया गया था। उस वक्त प्रशासनिक कई अफसरों और पुलिस द्वारा मौखिक अनुमति दी गई। बाद में वैधानिक अनुमति देने का भरोसा दिया गया था। लेकिन एन वक्त पर प्रशासन ने अनुमति देने से अपने हाथ खींच लिए।

ख़ास बात यह है कि सीहोर वाले पंडित प्रदीप मिश्रा की शिव महापुराण कथा में यजमान बनने कई लोगों ने भी अपने स्तर पर तैयारियां कर ली थी। नर्मदा किनारे ग्वारीघाट क्षेत्र में चयनित जगह की तैयारियों को अंतिम रूप देने का सिलसिला शुरू हो चुका था।
पंडित जी कथा सुनने के प्रशंसक भी अब इस खबर से खफा है। उधर प्रशासन का मानना है कि अन्य जगहों पर हुए बीते कुछ आयाजनों में अप्रिय स्थिति बनी थी। रुद्राक्ष वितरण के दौरान भगदड़ में कुछ लोगों की मौतें भी हुई। समुचित प्रबंध न होने की दशा में ऐसे आयोजन की अनुमति नहीं दी जा सकती।
प्रदीप मिश्रा की कथा में भी लाखों लोगों की भीड़ पहुंचती है। कुछ समय पहले जबलपुर के पनागर में बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र शास्त्री की भी कथा हो चुकी है। लेकिन मैहर में उनकी कथा कैंसिल हो गई। जहां आयोजक विधायक नारायण त्रिपाठी ने धीरेंद्र शास्त्री की कथा कैंसिल होने की राजनीतिक वजह गिनाई थी। कुछ ऐसी ही स्थितियों का सामना पीपुल्स पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पुरुषोत्तम तिवारी को पड़ा है।












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