NEET UG Topper 2023: 'मास्टर पापा की उम्मीदों की 'श्रद्धा', फर्स्ट अटेम्प्ट में ही नीट क्रैक कर MP में टॉप
NEET UG Topper 2023: कोई इंसान किसी भी क्षेत्र में यूं ही सफल नहीं होता। इसके लिए उस व्यक्ति को सफलता की सीढ़ियों को पहचानना होता है। खुद को भी तराशना होता है कि अपनी मंजिल तक कैसे पहुंचा जाए? कई चीजों की तिलांजलि देते हुए लक्ष्य निर्धारित करना होता हैं।
यही खूबी मध्य प्रदेश के जबलपुर की रहने वाली श्रद्धा वादलामणि में रही और नीट 20233 के नतीजों में सफलता ने उसके कदमों को चूम लिया। दूसरे कई टफ एग्जाम की तरह NEET में वह पहली बार ही अपीयर हुई थी। रिजल्ट आया तो देश भर में 56वीं रैंक के साथ स्टेट में टॉप किया।
श्रद्धा ने कुल 720 में से 710 अंक हासिल किए। इस रिजल्ट से आज सिर्फ श्रद्धा ही खुश नहीं हैं, बल्कि उसके पापा, जो पेशे से शिक्षक है, उनकी तमन्नाओं में भी खुशियों के पंख लग गए हैं। यही वजह है कि पिता श्रीनिवास वादलामणि आज कह रहे है कि उनके बच्चे हीरे हैं। उनके पास यही सबसे बड़ी दौलत हैं।

पिता श्रीनिवास मैथ्स टीचर है। उनका खुद का हायर सेकेंडरी स्कूल है। उसी स्कूल में श्रद्धा ने 12th पास की। उसका सीबीएसई का 97% रिजल्ट रहा। पिता के पढ़ाए कई दर्जन बच्चों ने आईआईटी, जेईई समेत कई कॉम्पिटिटिव एग्जाम क्लीयर कर वो आज बड़ी सरकारी नौकरियों और संस्थानों में हैं। उसके बावजूद श्रद्धा ने दसवीं पास करने के बाद मेडिकल लाइन पसंद की।

चैलेंज थी तैयारी
श्रद्धा बताती है कि जब वह 10th में थी, तभी से उसने डॉक्टर बनने का सपना संजो लिया था। यह जानते हुए कि पिता मैथ्स टीचर है और उनके पढ़ाए बच्चे बहुत ऊंची जगहों पर पहुंच रहे हैं। बायोलॉजी लेने पर दिल में कई सवाल भी जगह बना रहे थे। नीट का लक्ष्य निर्धारित तो कर लिया था, लेकिन स्कूल की पढ़ाई के साथ उसकी अलग से तैयारी भी चैलेंज थी।

सेल्फ स्टडी से सक्सेस
पिता ने भी मेरी च्वाइस में कोई दखल नहीं दिया। इरादा मजबूत था और भरोसा था। यह जानती थी कि एग्जाम में वहीं आएगा, जो पढ़ रही हूं और पढ़ चुकी हूं। तरीका जरुर अलग होगा, तो तैयारी भी एग्जाम के तरीके से करने में जुटी रही। बाहर कहीं कोचिंग-ट्यूशन लेने का तो सवाल ही नहीं उठ सकता था। क्योकि जब दूसरे बच्चे IIT, JEE की तैयारी करने पिता के पास आते हो, तो भला मैं अपनी तैयारी करने कैसे बाहर जाती।

IAS कलेक्टर बनकर मैं...
मेरा पापा और कुछ रिश्तेदार कहते थे कि IAS की तैयारी करो। लेकिन दिल में हमेशा एक ही बात रही कि देश के लिए समाज सेवा का रास्ता सिर्फ IAS बनकर ही नहीं निकलता। डॉक्टर का पेशा भी। ईमानदार सोच के साथ। डॉक्टर बनकर, कोई ताकत मेरा हाथ पकड़कर इस बात के लिए नहीं रोक सकती कि जिसके पास पैसे नहीं है, बेसहारा है, उसका इलाज मत करो।
लेकिन कलेक्टर बनी, तो जो भी सरकार होगी वह हमारा हाथ पकड़े रहेगी। माहौल ही ऐसा है। ब्यूरोक्रेसी में कितना फीसदी सच, कुर्सियों पर टिका है। सुनने में कड़वा है, लेकिन ये मेरी सोच है कि 'मुझे चोर नहीं, जरुरतमंदों की चाहत बनना हैं'। यही संस्कार मेरे माता-पिता ने शुरू से दिए। शिक्षा के क्षेत्र में मेरे पिता का जो डंका बजता हैं, उसकी वजह ईमानदारी ही है। नीट की मेरी सफलता में पिता की तरह मेरी मां ने भी हमेशा हौसला बढ़ाया और हर जरुरत को पूरा किया।












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