MP निकाय चुनाव: झाड़ू छाप चुनाव चिन्ह माफ़ करेगा प्रॉपर्टी-वॉटर टैक्स, कमर्शियल टैक्स में भी छूट
राजधानी दिल्ली में सत्ता की कुर्सी मजबूत करने के बाद आम आदमी पार्टी विधानसभा चुनाव में पंजाब की जीत से गदगद है। अब अपनी ताकत दिखाने मप्र के मैदान में भी है। भले ही अभी यहाँ नगरीय निकाय चुनाव है,
जबलपुर, 13 जून: दिल्ली फिर पंजाब में अपना सिक्का ज़माने वाली आम आदमी पार्टी मप्र के नगरीय निकाय चुनाव में अपना पूरा जोर दिखाने के मूड में है। जबलपुर के 79 वार्डों में से 12 वार्डों के लिए पार्षद प्रत्याशियों के नामों का ऐलान कर दिया गया है। पार्टी के मुताबिक यह उनकी पहली सूची है। प्रदेश के अन्य बड़े शहरों में भी पार्टी की ओर से उम्मीदवार चुनाव मैदान में होगे। उन जगहों की भी पहली सूची जारी कर दी गई है। वही आने वाले वक्त में पार्टी की निगाह बागियों पर भी है।

राजधानी दिल्ली में सत्ता की कुर्सी मजबूत करने के बाद आम आदमी पार्टी विधानसभा चुनाव में पंजाब की जीत से गदगद है। अब अपनी ताकत दिखाने मप्र के मैदान में भी है। भले ही अभी यहाँ नगरीय निकाय चुनाव है, लेकिन इस बहाने पार्टी की कोशिश प्रदेश के बड़े शहरों में अपनी जमीन मजबूत करने की भी है। जबलपुर के 12 वार्डों के लिए आम आदमी पार्टी ने अपने प्रत्याशियों की पहली सूची जारी कर दी। सूची जारी करते ही पार्टी नेता चुनाव प्रचार में भी कूद पड़े है। हाथों में पार्टी का चुनाव चिन्ह झाड़ू लहराते हुए जनता के बीच जा रहे है।

नगर सत्ता आने पर 'दिल्ली जैसा फॉर्मूला'
अपनी पहली सूची जारी करने के साथ पार्टी ने ऐलान किया है कि यदि नगर निगम चुनाव में उनकी पार्टी की सत्ता आई, तो वह शहर की तस्वीर और तकदीर दोनों बदल देंगे। दिल्ली की तर्ज पर मतदाताओं के लिए सौगातों का पिटारा भी खोलेंगे। पार्टी के प्रदेश संगठन मंत्री मुकेश जायसवाल का कहना है कि मकान, पानी का टैक्स पूरी तरह माफ़ होगा। इसके अलावा कमर्शियल टैक्स आधा लिया जाएगा। मतदाताओं के बीच जाकर पार्टी के प्रत्याशी यह भी कह रहे है कि महाकौशल अंचल के मुख्यालय जबलपुर शहर को पिछड़ेपन के दंश से मुक्ति दिलाएंगे।

बीजेपी-कांग्रेस के बागियों पर 'आप' की नजर
आम आदमी पार्टी ने जबलपुर में अभी अपनी पहली सूची जारी की है। यहाँ कुल 79 वार्ड है, तो 12 वार्ड को छोड़कर बाकी वार्डों के लिए मंथन चल रहा है। साथ ही इंतजार भाजपा-कांग्रेस की लिस्ट जारी होने का किया जा रहा है। क्योकि इतिहास गवाह है कि ऐसे स्थानीय चुनावों में जिन दावेदारों को टिकट नहीं मिल पाती, उनमे से कई नेता बागी हो जाते है। ऐसे में 'आप' की नजर उन बागियों पर भी है, जिन्हें वह अपनी पार्टी में उपयोग करेगी।












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