MP assembly election 2023: जबलपुर का बरगी विधानसभा क्षेत्र, यहां विकासपरक मुद्दों के सहारे होती है नैया पार

MP assembly election 2023: एमपी के जबलपुर की बरगी विधानसभा सीट हिंदू बहुल सीट है, जिसमें थोड़ी मात्रा में जैन मतदाता भी शामिल हैं। बहुत थोड़ी तादाद में मुस्लिम और ईसाई मतदाता भी इस क्षेत्र में निवास करते हैं। काफी तादाद में आदिवासी समाज के मतदाता भी निवास करते हैं।

इस क्षेत्र का फैसला 50 फीसद के करीब ओबीसी मतदाता ही करते हैं, जिनमें लोधी वोटर्स की संख्या सबसे ज्यादा है। आदिवासी समाज के लोग मजदूरी और वनोपज के सहारे आजीविका चलाते हैं। क्षेत्र में कुछेक औद्योगिक इकाईयां भी हैं हालांकि असंगठित क्षेत्र होने की वजह से इसमें कार्यरत कर्मचारी मजदूर की श्रेणी में ही आते हैं।

मतदान की स्थिति
सबसे कम सबसे ज्यादा
1990 में 58% 2018 में 78%

बरगी विधानसभा सीट मध्यप्रदेश के गठन के साथ ही अस्तित्व में आई। पहले यह सीट सामान्य रही। चंद्रिका प्रसाद इस सीट से दो बार निर्वाचित हुए। साल 1980 में परिसीमन के बाद यह सीट अनुसूचित जनजाति के लिए सुरक्षित हो गई। जिसके बाद कांग्रेस के नन्हेंलाल धुर्वे ने यहां से चुनाव जीता। साल 2008 में परिसीमन के चलते यह सीट एक बार फिर सामान्य हो गई। अब तक विधानसभा क्षेत्र का मिजाज मिला-जुला रहा है। जनता पार्टी ने यहां इमरजेंसी के बाद पहली बार कांग्रेस को हराया। हालांकि करीब 20 साल यह सीट बीजेपी की झोली में रही फिर कांग्रेस के संजय यादव यहां से वर्तमान विधायक हैं।

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चुनाव में बड़ी उठापठक के तौर पर साल 2018 यानि पिछला विधानसभा चुनाव ही जाना जा सकता है। साल 1998 से यहां पर बीजेपी का एकछत्र राज था। दो बार अनूप सिंह मरावी और फिर दो बार प्रतिभा सिंह ने इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। कांग्रेस को हर बार मुंह की खानी पड़ रही थी। ऐसे में कांग्रेस ने संजय यादव को यहां से मैदान में उतारा। संजय यादव ने कमोवेश ज्यादातर बूथों में बीजेपी की प्रत्याशी प्रतिभा सिंह को मात दे दी।

कौन किसके खिलाफ लड़ा (जीत/हार)
बीजेपी कांग्रेस साल जीत
अनूप सिंह मरावी नन्हेलाल धुर्वे 2003 कांग्रेस
प्रतिभा सिंह सोबरन सिंह 2008 बीजेपी
प्रतिभा सिंह मांगीलाल मरावी 2013 बीजेपी
प्रतिभा सिंह संजय यादव 2018 कांग्रेस

इन मुद्दों की हवा

बरगी विधानसभा क्षेत्र के मुद्दे भी विकासपरक हैं। मूलभूत सुविधाओं, शिक्षा, रोजगार, सड़क बिजली पानी जैसे मुद्दे यहां पर चुनाव में हावी रहते हैं। बरगी क्षेत्र लंबे समय से तहसील का दर्जा पाने की भी लड़ाई लड़ रहा था, जो अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। नर्मदा से सटे इस क्षेत्र में पेयजल की समस्या अब भी बरकरार है। कृषि से जुड़ी समस्याएं भी चुनाव पर असर डालती हैं। बीते चुनाव में बीजेपी को एंटी इनकंबेसी के चलते करारी हार मिली। तत्कालीन विधायक प्रतिभा सिंह दो बार विधायक रहीं। उससे पहले भी दो बार बीजेपी के अनूप सिंह मरावी विधायक रहे, लेकिन इस दरमियान अपेक्षा के अनुरूप क्षेत्र का विकास नहीं हो पाया। जिसके चलते कांग्रेस के संजय यादव यहां से पहली बार विधायक निर्वाचित हुए।

कांग्रेस की बात की जाए तो दो दशक तक बीजेपी का अभेद किला बनी इस सीट में सेंध लगाने और सिटिंग एमएलए होने की वजह से संजय यादव टिकट के प्रबल दावेदार हैं। उनके अलावा बीते चुनाव में जितेंद्र अवस्थी ने भी दावेदारी की थी लेकिन हाईकोर्ट में अपनी ही पार्टी के विधायक के खिलाफ याचिका लगाकर उन्होंने अपने नंबर कटवा लिए हैं। इस क्षेत्र में शामिल नगर निगम के नए वार्डों में भरपूर विकास न होना बीजेपी-कांग्रेस दोनों के लिए चुनौती हैं।

पूर्व बीजेपी विधायक प्रतिभा सिंह के घर ही टिकट
बीजेपी की बात की जाए तो एक बार फिर पूर्व विधायक प्रतिभा सिंह की झोली में ही टिकट पहुंची। इस बार फर्क यह है कि पार्टी ने उनके बेटे नीरज सिंह को उम्मीदवार बनाया हैं। टिकट एक घर में ही हैं। दावेदारों की लाइन में पूर्व जिला ग्रामीण अध्यक्ष शिव पटेल भी थे। कुछ समय हवा सांसद के नाम भी चली। लेकिन पार्टी ने नए फॉर्मूले के तहत युवा चेहरे के तौर पर नीरज पर दांव लगाया है। क्योकि पिछले चुनाव में उनकी मां यानि प्रतिभा सिंह के खिलाफ जनता का गुस्सा चरम पर रहा।

पाटन विधानसभा सीट से जुड़ा रिश्ता
बात साल 2008 के चुनावों की है, 2003 में जदयू के सोबरन सिंह पाटन विधानसभा से निर्वाचित हुए, प्रतिभा सिंह ने यहां से बागी उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा था। वे तीसरे नंबर पर रही थीं। परिसीमन में पाटन विधानसभा का बड़ा हिस्सा बरगी सीट में शामिल हो गया। जिसके चलते सोबरन सिंह और प्रतिभा सिंह दोनों ने बरगी को अपना क्षेत्र बना लिया। सोबरन सिंह तब तक कांग्रेस में शामिल हो चुके थे। दोनों इस बार बरगी विधानसभा में कांग्रेस और बीजेपी की तरफ से आमने-सामने थे। लेकिन बाद में प्रतिभा सिंह ने चुनाव जीतकर पाटन में मिली हार का बदला ले लिया।

घर और क्षेत्र दोनों जगह एंटी इनकंबेंसी
साल 2018 के चुनाव में प्रतिभा सिंह एंटी इनकंबेसी से जूझ रही थीं। केवल विधानसभा क्षेत्र में ही नहीं बल्कि अपने घर में भी। उनके दिवंगत बेटे नीटू सिंह की पत्नी ज्योति सिंह ने भी सास के खिलाफ समाजवादी पार्टी से चुनाव मैदान में ताल ठोंकी थी। हालांकि उन्हें मात्र 525 वोट ही मिले लेकिन उनके चुनाव मैदान में होने से प्रतिभा सिंह के काफी वोट संजय यादव के पक्ष में पड़े। नतीजा यह रहा कि प्रतिभा सिंह चुनाव हार गईं।

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