'सिर के बाल बने सबूत', अंतिम सांस तक मिली कठोर सजा फिर हो गई निरस्त, जानिए ये पूरा दिलचस्प मामला
Mother's killer son: अदालतों का काम ही है कि किसी पीड़ित को इंसाफ मिले और असली गुनाहगार को सजा। कई दफा अपराधों में पेश होने वाले ऐसे सबूत भी होते हैं, जिसके आधार पर सजा का ऐलान हो जाता है, लेकिन वही सबूत जब किसी बड़ी अदालत पहुंचते हैं तो कानून उन्हें सजा के काबिल मानने की इजाजत नहीं देता।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में सामने आए अनूपपुर जिले के एक मामले में कुछ ऐसा ही हुआ हैं। जिसके बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं, वह कानून की दुनिया में एक बड़ी नजीर से कम नहीं। मामला एक मां की हत्या से जुड़ा हैं, जिसके सगे बेटे को निचली अदालत ने वारदात का दोषी करार दिया था।
सितंबर 2019 में जैतहारी थाना अंतर्गत भीलमट गांव में मुन्नी बाई की हत्या हुई थी। पुलिस ने केस दर्ज किया और वारदात में मृतका के बेटे सुदामा राठौर को आरोपी मानते हुए गिरफ्तार कर लिया। 14 सितंबर 2019 से लेकर 12 अप्रैल 2021 तक न्यायिक अभिरक्षा में रहा। फिर जिला अदालत अनूपपुर ने उसे 29 नवंबर 2022 को आजीवन कारावास की कठोर सजा सुनाई। तब से वह जेल में ही हैं।

निचली अदालत के समक्ष पुलिस द्वारा पेश किए गए सबूत और बयानों के आधार पर सजा का ऐलान हुआ था। गुनाहगार ने इन्ही सबूतों के आधार पर अपनी सजा के खिलाफ हाई कोर्ट में चुनौती दी। दायर की गई याचिका में बताया गया कि दुर्भावना रखते हुए पुलिस ने उसे न सिर्फ मां की हत्या का आरोपी बनाया, बल्कि आरोप सिद्ध करने झूठे सबूत भी पेश किए।
याचिकाकर्ता की ओर से धिवक्ता अंजना कुररिया ने हाई कोर्ट में दलील दी गई कि वारदात वाली जगह से FSL रिपोर्ट के मुताबिक मृतका के हाथ में 'बाल' मिले थे। बरामद बाल के नमूनों के आधार पर आरोपी की पुलिस ने पुष्टि की थी। इस दौरान घटना स्थल से मृतिका की फोटो भी ली गई थी। याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट को बताया कि जब जिला अदालत में इस मामले से संबंधित केस डायरी पेश हुई और सुनवाई हुई तो घटना स्थल की न तो उसमें फोटो और न ही बाल का नमूना लेने वाला पुलिसकर्मी पेश हुआ।
आरोप लगाया गया कि जेल में बंद सुदामा मोजर मेयर कंपनी का विरोध कर रहा था। उस वक्त उस विरोध ने बड़े आंदोलन का रूप ले लिया था। लिहाजा स्थानीय पुलिस उससे दुर्भावना रखने लगी। युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि यह बात संदेहास्पद है कि मृतिका के हाथ में अपीलकर्ता के बाल पाए गए या नहीं? जिला न्यायालय ने भौतिक पहलुओं की जांच किए बिना अभियोजन की यांत्रिकी रूप से पेश की गई कहानी पर भरोसा किया और अपीलकर्ता को सजा से दंडित किया है। इसके आधार पर हाईकोर्ट ने अपीलकर्ता की शेष सजा को निरस्त करने के आदेश जारी किए।
इधर अपीलकर्ता के वकील ने बताया कि मोजर वेयर के विरोध के समय सुदामा और पुलिस के बीच विवाद भी हुआ था। उस पर आरोप लगाया था कि सुदामा ने पुलिस से मारपीट की और पिस्टल छीनकर हमला करने की कोशिश की। उसके बाद जब मां की हत्या हुई और जादू-टोने शक सामने आया तो पुलिस ने सुदामा को ही उसकी मां की हत्या का आरोपी बना दिया. जबकि वास्तविकता कुछ और ही रही।












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