दया याचिकाओं का फास्ट ट्रेक में किया जाए निराकरण, मप्र के राज्यपाल ने अफसरों से की चर्चा
मप्र में लंबित दया याचिकाओं के मामले कई बार बड़ी बहस का मुद्दा बनते रहे है। इस सिलसिले में राज्यपाल मंगुभाई पटेल बेहद गंभीर नजर आ रहे है। उन्होंने गृह, विधि-विधायी कार्य जेल विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिए
जबलपुर, 06 जून: मप्र के राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि लंबित दया याचिकाओं का निराकरण फास्ट ट्रेक में किया जाना चाहिए। कारावास की अवधि 14 वर्ष की पूर्णता पर राहत प्रावधानों का गतिशीलता और संवेदनशीलता के साथ क्रियान्वयन किया जाना चाहिए। उन्होंने प्रथम नागरिक के रूप में अधिकारियों से अपेक्षा करते हुए कहा है कि व्यवस्था का स्वरूप ऐसा होना चाहिए जिसमें राहत के लिए सुपात्र व्यक्ति को एक दिन भी अतिरिक्त कारावास में नहीं रहना पड़े।

मप्र में लंबित दया याचिकाओं के मामले कई बार बड़ी बहस का मुद्दा बनते रहे है। इस सिलसिले में राज्यपाल मंगुभाई पटेल बेहद गंभीर नजर आ रहे है। उन्होंने गृह, विधि-विधायी कार्य जेल विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ राजभवन में चर्चा की। जिसमें संभागीय स्तर पर भी वीडियों कॉन्फ्रेसिंग के जरिए अधिकारी जुड़े। राज्यपाल पटेल ने कहा कि राहत याचिका के सुपात्र को रिहाई की निश्चित तिथि की व्यवस्थाओं के दृष्टिगत लंबित नहीं रखा जाना चाहिए। कार्य का भाव और भावना शीघ्रता से राहत प्रदान करना होना चाहिए।

पीड़ित के प्रति संवेदना और सहानुभूति जरूरी
दया याचिका के पात्र को राहत प्रावधानों का लाभ लेने के लिए आवश्यक विधिक सहायता उपलब्ध कराने की पहल की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज के विरूद्ध छोटे-मोटे अपराधों पर पुनर्विचार का कार्य समय-सीमा में किया जाना चाहिए। बैठक में राज्यपाल बोले कि शासकीय नौकरी सेवा का कार्य है। अधिनियम में प्रभावी कार्रवाई के लिए दिल और दिमाग में पीड़ित के प्रति संवेदना और सहानुभूति होना जरूरी है। संवेदनशीलता के साथ किए गए कार्यों के परिणाम सदैव अच्छे होते हैं।












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