MP News: जबलपुर में जॉय सीनियर सेकेंडरी स्कूल के संचालक, पत्नी और बेटे गिरफ्तार: धर्मांतरण और मारपीट के आरोप
MP News: मध्य प्रदेश के जबलपुर में जॉय सीनियर सेकेंडरी स्कूल के संचालक अखिलेश मेबिन, उनकी पत्नी और बेटे तनय मेबिन को पुलिस ने रविवार को गिरफ्तार कर लिया। तीनों को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।
यह कार्रवाई अखिलेश की बहू और पूर्व सेना अधिकारी आकांक्षा अरोड़ा की शिकायत के आधार पर की गई, जिसमें उन्होंने ससुराल वालों पर जबरन धर्मांतरण का दबाव बनाने और मारपीट करने का गंभीर आरोप लगाया है। यह मामला न केवल धार्मिक संवेदनशीलता से जुड़ा है, बल्कि अखिलेश मेबिन के पहले के विवादों ने इसे और भी सुर्खियों में ला दिया है।

क्या है पूरा मामला?
नर्मदा रोड, आदर्श नगर निवासी 36 वर्षीय आकांक्षा अरोड़ा, जो सेना में कैप्टन के पद पर रह चुकी हैं, ने 28 जून 2025 को जबलपुर के महिला थाने में अपने ससुर अखिलेश मेबिन, सास और पति तनय मेबिन के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। आकांक्षा ने बताया कि उनकी शादी 20 दिसंबर 2017 को तनय मेबिन से हुई थी, जो जॉय सीनियर सेकेंडरी स्कूल का डायरेक्टर है। शादी के शुरुआती कुछ महीने सब ठीक रहा, लेकिन इसके बाद ससुराल वालों का व्यवहार बदल गया।
आकांक्षा ने अपनी शिकायत में कहा, "ससुर अखिलेश मेबिन, सास और पति तनय मेबिन ने मुझ पर ईसाई धर्म अपनाने का दबाव डाला। जब मैंने इनकार किया, तो मेरे साथ मारपीट की गई और मुझे प्रताड़ित किया गया।" उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि 2017 में शादी से पहले भी उन पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया गया था, और कथित तौर पर धर्मांतरण के बाद उनकी शादी एक चर्च में हुई थी।
महिला थाना प्रभारी भूमेश्वरी चौहान ने बताया कि आकांक्षा की शिकायत के आधार पर अखिलेश मेबिन, उनकी पत्नी और बेटे तनय के खिलाफ जबरन धर्मांतरण, मारपीट और प्रताड़ना का मामला दर्ज किया गया। रविवार को तीनों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। मामले की जांच जारी है।
अखिलेश मेबिन का विवादित इतिहास
यह पहली बार नहीं है जब अखिलेश मेबिन विवादों में घिरे हैं। इससे पहले भी वे कई आपराधिक मामलों में लिप्त रहे हैं, जिनमें से कुछ ने जबलपुर में खासा हंगामा मचाया था।
भगवान राम पर आपत्तिजनक टिप्पणी: अप्रैल 2025 में अखिलेश मेबिन ने अपने व्हाट्सएप स्टेटस पर भगवान राम के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी पोस्ट की थी, जिसमें कथित तौर पर लिखा था, "ब्लडी हिन्दू राम के बास्टर्ड चिल्ड्रन"। इस टिप्पणी ने हिंदू संगठनों में आक्रोश फैला दिया था। विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने जॉय सीनियर सेकेंडरी स्कूल में तोड़फोड़ की और अखिलेश की गिरफ्तारी की मांग की। इसके बाद अखिलेश फरार हो गए थे और उन्हें कोच्चि एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया था।
धर्मांतरण और मारपीट का मामला: 31 मार्च 2025 को मंडला जिले के मोहगांव गांव से कुछ लोगों को जबलपुर लाया गया था, जिन पर हिंदूवादी संगठनों ने धर्मांतरण का आरोप लगाया था। इस दौरान रांझी थाने में ईसाई धर्मगुरु फादर डेविस जॉर्ज और फादर जॉर्ज थॉमस के साथ कथित तौर पर मारपीट की गई थी। इस घटना का वीडियो अखिलेश ने अपने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया और भगवान राम के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की, जिससे विवाद और भड़क गया।
अवैध फीस वसूली: अक्टूबर 2024 में जॉय सीनियर सेकेंडरी स्कूल पर 25 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध फीस वसूली का आरोप लगा था। जिला प्रशासन की जांच में पाया गया कि स्कूल ने नियमों का उल्लंघन करते हुए 10% से अधिक फीस बढ़ाई थी और इस राशि का उपयोग लग्जरी कार खरीदने और विदेश यात्राओं में किया गया था। इस मामले में अखिलेश मेबिन और स्कूल के सचिव अनुराग श्रीवास्तव को गिरफ्तार किया गया था।
गुप्त कमरे का रहस्य: अक्टूबर 2024 में पुलिस जांच के दौरान स्कूल परिसर में अखिलेश के चैंबर के पीछे एक गुप्त कमरा पाया गया, जहां कोई सीसीटीवी कैमरा नहीं था। पुलिस इस कमरे के उद्देश्य की जांच कर रही है, और स्कूल प्रबंधन ने बाद में वहां सीसीटीवी लगवाया।
सामाजिक और धार्मिक तनाव
इस ताजा घटना ने जबलपुर में धार्मिक और सामाजिक तनाव को फिर से हवा दे दी है। हिंदूवादी संगठनों ने अखिलेश मेबिन को पहले से ही निशाने पर रखा था, और अब उनकी बहू की शिकायत ने इस मामले को और जटिल बना दिया है। विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल ने इस गिरफ्तारी को अपनी मांगों की जीत बताया, लेकिन साथ ही उन्होंने स्कूल के खिलाफ और सख्त कार्रवाई की मांग की है।
दूसरी ओर, ईसाई समुदाय ने इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की है। जबलपुर कैथोलिक डायसिस के प्रतिनिधियों ने पहले भी रांझी थाने में मारपीट की घटना को लेकर शिकायत की थी, और अब इस नई शिकायत ने दोनों समुदायों के बीच तनाव को बढ़ा दिया है।
पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई
महिला थाना प्रभारी भूमेश्वरी चौहान ने बताया कि आकांक्षा अरोड़ा की शिकायत पर त्वरित कार्रवाई की गई। अखिलेश मेबिन, उनकी पत्नी और बेटे तनय को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। पुलिस अब इस मामले में गहन जांच कर रही है, जिसमें धर्मांतरण के आरोपों के साथ-साथ मारपीट और प्रताड़ना के सबूतों की पड़ताल की जा रही है।
जबलपुर के पुलिस अधीक्षक सम्पत उपाध्याय ने कहा, "हम इस मामले को पूरी गंभीरता से ले रहे हैं। सभी पक्षों की जांच की जाएगी, और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।" पुलिस ने स्कूल परिसर और अखिलेश के आवास पर भी छापेमारी की है, ताकि अतिरिक्त साक्ष्य जुटाए जा सकें।
सोशल मीडिया पर बवाल
इस घटना ने सोशल मीडिया पर भी खासा हंगामा मचाया है। @News18MP और @News18CG जैसे न्यूज हैंडल्स ने इस मामले को प्रमुखता से कवर किया, जिसमें उन्होंने अखिलेश और उनके परिवार पर लगे आरोपों को विस्तार से बताया।
आगे क्या?
यह मामला जबलपुर में धार्मिक और सामाजिक संवेदनशीलता का केंद्र बन गया है। अखिलेश मेबिन का पहले से विवादित इतिहास और अब उनकी बहू के गंभीर आरोपों ने इस मामले को और जटिल बना दिया है। पुलिस को न केवल धर्मांतरण और मारपीट के आरोपों की जांच करनी है, बल्कि स्कूल की गतिविधियों और अखिलेश के आपराधिक रिकॉर्ड की भी गहन पड़ताल करनी होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंचा सकती हैं, और प्रशासन को इसे संवेदनशीलता के साथ संभालना होगा। साथ ही, जॉय सीनियर सेकेंडरी स्कूल की गतिविधियों पर भी अब सवाल उठ रहे हैं, और शिक्षा विभाग से इसकी मान्यता और संचालन की जांच की मांग तेज हो रही है।
यह घटना न केवल एक पारिवारिक विवाद की कहानी है, बल्कि यह धार्मिक संवेदनशीलता, सामाजिक तनाव और प्रशासनिक जवाबदेही जैसे बड़े मुद्दों को भी उजागर करती है। जबलपुर में यह मामला आने वाले दिनों में और चर्चा में रहेगा, और यह देखना होगा कि पुलिस और कोर्ट इस मामले में क्या अंतिम फैसला सुनाते हैं।












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