Jabalpur से गायब जिस आरक्षक को खोज रही थी पुलिस, करीब 250 किमी दूर छिंदवाड़ा में वो बन गया कंकाल
Jabalpur Police: एमपी के जबलपुर से करीब डेढ़ महीने से लापाता पुलिस आरक्षक का कंकाल करीब ढाई सौ किलोमीटर दूर छिंदवाड़ा में बरामद हुआ। पुलिस मामले की पड़ताल कर रही है।

Jabalpur Police: एमपी के जबलपुर से गायब एक आरक्षक को ढूंढने में पुलिस ने जमीन-आसमान एक कर दिया, लेकिन कही सुराग नहीं लगा। डेढ़ महीने बाद उसका कंकाल पैतृक गांव में मिला। संतु लाल उइके नाम का आरक्षक ऑन ड्यूटी गायब हो गया था। घर वाले भी उसे खोजते रहे।
आम लापता लोगों को खोजने वाली पुलिस के लिए इससे बड़ा सिर्फ दर्द क्या होगा कि महकमे की ड्यूटी में तैनात कोई पुलिस वाला ही गायब हो जाए। जबलपुर में पदस्थ आरक्षक संतुलाल उइके का केस भी वैसा ही है।
ड्यूटी के दौरान 15 अप्रैल को जबलपुर से लापता हो गया था। वह न तो अपने घर पहुंचा और न ही कही दोस्त-रिश्तेदार के यहां। थक हारकर उसकी पत्नी ने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। डेढ़ महीने तक पुलिस उसे कई जगहों पर तलाश करती रही, लेकिन कही भी पता नहीं चला।
अचानक छिंदवाड़ा के पांढुर्ना के मोरघाट पर उसकी बाइक बरामद हुई। आसपास जब खोजबीन की गई तो सुनसान झाड़ियों वाली जगह के पास एक कंकाल मिला। जब शिनाख्त कराई गई तो वह संतुलाल की हड्डियों का ही ढांचा था।
इससे पहले गुमशुदगी के दौरान सीसीटीवी फुटेज में वह छिंदवाड़ा के एक चौराहे पर सीसीटीवी में कैद हुआ था। उसका पैतृक गांव भी छिंदवाड़ा का भैसाडोंगरी ही है। अब पुलिस संतुलाल की मौत की हर एंगल पर जांच कर रही हैं।
पेड़ पर लटका गमछा किसका?
छिंदवाड़ा पुलिस के मुताबिक जिस क्षेत्र में संतुलाल का कंकाल मिला है। नजदीक में एक पेड़ भी था। वहां गमछा लटका मिला। इससे दो तरह के अनुमान लगाये जा रहे है। एक तो यह कि संतुलाल गमछे को फांसी का फंदा बनाकर उसमें लटक गया। फिर किसी जानवर ने उसे नोंच-नोंच कर कंकाल बना दिया। या फिर इस मौत के पीछे कोई दूसरा राज छिपा है।
ऐसा ही केस जबलपुर में भी हुआ था
जबलपुर में भी कुछ महीने पहले इसी तरह एक आरक्षक ने अपनी पत्नी पर पेट्रोल डालकर उसे आग के हवाले कर दिया था। फिर लापाता हो गया। कुछ दिनों बाद उसका शव भी नरसिंहपुर जिले के पैतृक गांव में मिला था।












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