Jabalpur News: डॉक्टर पर दर्ज FIR रद्द, हाई कोर्ट ने कहा- ऐसे केस दर्ज होंगे तो सीरियस मरीज का कौन करेगा इलाज?

Jabalpur News: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने जबलपुर के एक डॉक्टर के खिलाफ दर्ज हुई FIR के मामले में बड़ा फैसला सुनाया हैं। गंभीर टिप्पणी के साथ पुलिस प्रशासन को कटघरे में खड़ा किया।

दरअसल जबलपुर के डॉ राजीव जैन शिशु रोग विशेषज्ञ, संचालक स्टार अस्पताल पर दिनांक 15 नवंबर 2021 को पुलिस प्रशासन द्वारा FIR दर्ज की गई थी। जिसमें एक बच्ची की मौत को लेकर परिजनों ने गंभीर आरोप लगाए गए थे।

डॉ. जैन ने बताया कि एक बच्ची खुशी तिवारी को कोविड-19 जैसे लक्षण थे। जो 13 वर्षों से कई रोगों के इलाज करा रही थी , वह बच्ची पूर्व से ही मानसिक रूप से कमजोर थी, वह जन्म से ही कंजेटियल रूबेला सिंड्रोम और दिल में छिद्र की बीमारी ,आंशिक अंधेपन, फेफड़ों के इन्फेक्शन से ग्रसित थी। 13 साल पहले पूर्व 2008 में डॉक्टर राजीव जैन द्वारा इलाज से जान बचाई गई थी।

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फिर बच्ची खुशी तिवारी कोविड 19 की दूसरी लहर के दौरान अति गंभीर अवस्था मे स्टार अस्पताल में भर्ती की गई। उस समय उसका दिल काम नहीं कर पा रहा था। ब्लड प्रेशर अत्यधिक कम था, फेफड़ों में गंभीर इंफेक्शन था। इलाज के दौरान खुशी तिवारी के माता-पिता ने अस्पताल स्टाफ के मना करने के बावजूद पानी पिलाने से सांस की नली में चोकिंग के कारण बच्चे की मृत्यु हो गई थी।

खुशी की मां जबलपुर में FSL ऑफिसर होने के बावजूद भी बिना पोस्टमार्टम के शव को ले गई और मृत्यु के 10 दिन बाद उनके द्वारा लापरवाही का आरोप लगाते हुए FIR करा दी गई। डॉ. जैन ने आरोप लगाए कि शिकायतकर्ता सुनीता तिवारी के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और एफएसएल ऑफिसर होने के कारण पुलिस प्रशासन द्वारा उनके खिलाफ केस दर्ज कर दिया गया।

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट द्वारा पूरे मुद्दे पर दोनों पक्ष की दलीलें सुनने के बाद निर्णय लिया कि इस तरह का कोई आरोप और एफआईआर डॉक्टर राजीव जैन पर नहीं बनती है। अदालत में कोविड काल के दौरान डॉक्टर्स की सेवाओं को बड़ा आधार माना।

मृत्यु कटु सत्य है..
हाई कोर्ट द्वारा यह भी कहा गया है कि मृत्यु एक कटु सत्य है। जिसे सभी को स्वीकार करना चाहिए। यदि इसी प्रकार मृत्यु होने पर शिकायतों से डॉक्टर पर केस दर्ज होते रहेंगे तो आने वाले समय में डॉक्टर सीरियस मरीजों का कभी भी इलाज नहीं कर पाएंगे और उन्हें इलाज देने से हमेशा डरेंगे। पीड़ित मानवता की सेवा के लिए सीरियस मरीजों का इलाज देने के लिए डॉक्टर को प्रेरित करने के लिए हाईकोर्ट ने ऐतिहासिक निर्णय किया है।

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