GOOD NEWS: श्वासनली की रिपेयरिंग युवती को मिली नई जिंदगी, जबलपुर के सरकारी डाक्टर्स ने कायम की मिसाल
Government doctors gave new life to the girl by doing a complicated operation of the tracheaमेडिकल में कॉर्डिक सर्जरी और एनेस्थीसिया विभाग टीम ने इस केस को चुनौती के रूप में स्वीकार किया। श्वासनली का जो निचला हिस्सा बंद
जबलपुर, 23 मई: अक्सर इस बात के इल्जाम लगते है कि सरकारी हॉस्पिटल में सही इलाज नहीं होता, वहां की तस्वीरें देख लोग नाक-मुहं सिकोड़ने लगते है। लेकिन मप्र के जबलपुर संभाग के सबसे बड़े सरकारी मेडिकल हॉस्पिटल में डाक्टर्स की टीम ने सोमवार को एक ऐसा ऑपरेशन किया, जो विदेश में लाखों रुपये खर्च करने के बाद बमुश्किल होता है। हादसे का शिकार एक बीस साल की युवती की श्वासनली की रिपेयरिंग कर डाक्टर्स की टीम ने न सिर्फ नई जिंदगी दी, बल्कि उसको बोलने में हो रही तकलीफ को हमेशा हमेशा के लिए दूर किया।

डॉक्टर धरती के भगवान कहे जाते है। वास्तव में जबलपुर के नेताजी सुभाषचन्द्र बोस मेडिकल कॉलेज अस्पताल के डाक्टर्स की टीम सिहोरा तहसील की रहने वाली बीस वर्षीय युवती के लिए आज भगवान से बढ़कर है। ऐसा इसलिए क्योकि करीब तीन साल पहले एक सड़क हादसे में इस युवती के गले में गहरी चोट पहुँची थी। हादसे के बाद वह ठीक से न तो बोल पा रही थी और न ही सांस ले पा रही थी। श्वासनली का नीचे का 2 सेंटीमीटर का हिस्सा बंद हो गया था। वैकल्पिक रूप में कृतिम श्वास नली से युवती जीवन जीने मजबूर थी। इस जटिल समस्या के बारे कई चिकित्सकों को बताया गया, सभी ने हाथ खड़े कर दिए। लेकिन मेडिकल में कॉर्डिक सर्जरी और एनेस्थीसिया विभाग टीम ने इस केस को चुनौती के रूप में स्वीकार किया। श्वासनली का जो निचला हिस्सा बंद हो गया था, उसे हटाया गया। फिर उसके ऊपर और सबसे निचले हिस्से को जोड़कर उसमे जटिल सफल ऑपरेशन किया गया।

सीटी स्कैन में 2.2 सेमी लंबाई का सबग्लॉटिक स्टेनोसिस
हमारे शरीर में सांस लेने की जटिल प्रक्रिया से गुजरना होता है। शरीर के फेफड़ों तक विंडपाइप यानि श्वासनली नाक और मुहं से सांस की प्रक्रिया को संपादित करती है। विंडपाइप में स्टेनोसिस होने का मतलब है कि आपके श्वास नली की सूजन या सिकुड़न, सांस लेने लेने के लिए बेहद कठिन अवस्था का निर्माण कर देती है। इससे शरीर के वोकल कार्ड पर भी लगातार दुष्प्रभाव बढ़ता जाता है। इलाज के दौरान जब युवती का CT स्केन हुआ तो उसमें 2.2 सेमी लंबाई का सबग्लॉटिक स्टेनोसिस पाया गया, जो सामान्य अवस्था को और गंभीर बनाता जा रहा था।

जा सकती थी युवती की जान
इस जटिल ऑपरेशन को करने वाली टीम में डॉ विश्वनाथन, डॉ लता, डॉ दीपक और उनके सहयोगी शामिल थे। यह ऑपरेशन चैलेंजिंग इसलिए भी था, क्योकि सांस लेने के लिए डाली गई कृतिम श्वासनली यदि ऑपरेशन के दौरान डेमेज हो जाती तो युवती की जान भी चली जाती। लेकिन सावधानी से चिकित्सकों ने ऑपरेशन कर एक नई जिन्दगी दी।

देश में ऐसे ऑपरेशन सिर्फ चुनिंदा जगहों पर
चिकित्सकों की टीम ने बताया कि मप्र में इस तरह का ऑपरेशन सिर्फ जबलपुर मेडिकल कॉलेज में संभव है। इसके अतिरिक्त देश के दक्षिण प्रांत और दिल्ली में डाक्टर्स ऐसे मरीजों का ऑपरेशन करने की क्षमता रखते है। यदि किसी निजी हॉस्पिटल में यह ऑपरेशन होता तो करीब तीन से पांच लाख रुपये खर्च आता।












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