MP News: इंजीनियरिंग छात्र से रेलवे नौकरी के नाम पर 3.24 लाख की ठगी, फर्जी इंटरव्यू, आईडी, और वर्दी का खेल
MP News: मध्य प्रदेश के जबलपुर में एक इंजीनियरिंग छात्र आदर्श पटेल को भारतीय रेलवे में नौकरी का झांसा देकर शातिर ठग राकेश सराठे ने 3.24 लाख रुपये की ठगी कर ली। आरोपी ने फर्जी इंटरव्यू और मेडिकल टेस्ट करवाया, साथ ही छात्र को रेलवे की वर्दी और फर्जी पहचान पत्र (आईडी कार्ड) देकर विश्वास में लिया।
मामला तब उजागर हुआ जब पीड़ित छात्र रेलवे कार्यालय पहुंचा, जहां अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि न तो कोई वैकेंसी थी और न ही कोई नियुक्ति हुई थी। शिकायत के आधार पर जबलपुर पुलिस ने राकेश सराठे को गिरफ्तार कर लिया और उसके खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। यह घटना संजीवनी नगर थाना क्षेत्र के अंतर्गत धनवंतरी नगर की है।

ठगी का पूरा घटनाक्रम
आदर्श पटेल, जो धनवंतरी नगर पुलिस चौकी क्षेत्र की भूकंप कॉलोनी में अपनी मां के साथ रहता है, एक इंजीनियरिंग छात्र है। उसकी मां पीको-फॉल का काम करती हैं। आरोपी राकेश सराठे, जो रिश्ते में आदर्श का मामा लगता है, अक्सर सिलाई का काम देने के बहाने उनके घर आता-जाता था। मार्च 2025 में राकेश ने आदर्श की मां से कहा कि जबलपुर मंडल के देवरी रेलवे स्टेशन में कॉमर्शियल विभाग में क्लर्क का पद खाली है और वह आदर्श की नौकरी लगवा सकता है। इसके लिए उसने 5 लाख रुपये की मांग की, दावा करते हुए कि यह राशि रेलवे के अधिकारियों को देनी होगी।
रिश्तेदारी के भरोसे और बिना किसी शक के, आदर्श और उसकी मां ने राकेश पर विश्वास कर लिया। उन्होंने तीन से चार किश्तों में कुल 3.24 लाख रुपये राकेश को दे दिए। राकेश ने ठगी को और विश्वसनीय बनाने के लिए निम्नलिखित कदम उठाए:
फर्जी मेडिकल टेस्ट: राकेश ने आदर्श को मेडिकल टेस्ट के लिए जबलपुर के रेलवे अस्पताल ले जाकर एक महिला से मुलाकात करवाई, जिसे उसने रेलवे की कर्मचारी बताया।
फर्जी इंटरव्यू: आदर्श का एक फर्जी इंटरव्यू आयोजित किया गया, जिसे राकेश ने रेलवे की भर्ती प्रक्रिया का हिस्सा बताया।
फर्जी दस्तावेज और वर्दी: राकेश ने आदर्श को रेलवे की वर्दी और एक फर्जी आईडी कार्ड दिया, जिसमें वेस्ट सेंट्रल रेलवे मैनेजमेंट सिस्टम (WCRMS) का लोगो था। यह आईडी कार्ड उसे रेलवे कर्मचारी के रूप में पेश करने के लिए इस्तेमाल किया गया।
ठगी का खुलासा
आदर्श को जब रेलवे से जॉइनिंग लेटर या नियुक्ति की कोई औपचारिक सूचना नहीं मिली, तो वह स्वयं जबलपुर रेलवे कार्यालय पहुंचा। वहां अधिकारियों ने उसे बताया कि न तो कोई वैकेंसी थी और न ही ऐसी कोई भर्ती प्रक्रिया चल रही थी। यह सुनकर आदर्श और उसकी मां को ठगी का अहसास हुआ। उन्होंने तुरंत संजीवनी नगर थाने में राकेश सराठे के खिलाफ शिकायत दर्ज की।
पुलिस की कार्रवाई
शिकायत के आधार पर जबलपुर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सोमवार देर रात (21 जुलाई 2025) करीब 1 बजे घमापुर स्थित राकेश सराठे के घर दबिश दी। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया और उसके घर से निम्नलिखित सामग्री बरामद की:
- रेलवे भर्ती प्रकोष्ठ से जुड़े फर्जी दस्तावेज
- WCRMS का फर्जी आईडी कार्ड
- अन्य संदिग्ध सामग्री, जिनकी जांच जारी है
मंगलवार, 22 जुलाई 2025 को पुलिस ने राकेश सराठे को कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। पुलिस ने उसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 420 (धोखाधड़ी) और 467 (फर्जीवाड़ा) के तहत मामला दर्ज किया है।
अन्य आरोपी और जांच
पुलिस को संदेह है कि इस ठगी में राकेश अकेला नहीं था। जांच में पता चला कि राकेश के साथ एक महिला भी शामिल थी, जिसे मेडिकल टेस्ट के दौरान रेलवे कर्मचारी के रूप में पेश किया गया था। इस महिला को भी पुलिस ने हिरासत में लिया है और उससे पूछताछ जारी है। संजीवनी नगर थाना प्रभारी ने बताया कि राकेश और उसके सहयोगियों ने संभवतः अन्य लोगों को भी निशाना बनाया होगा, और इसकी जांच के लिए एक विशेष टीम गठित की गई है।
ठगी का तरीका: विश्वास का दुरुपयोग
राकेश सराठे ने इस ठगी को अंजाम देने के लिए रिश्तेदारी का फायदा उठाया। उसने आदर्श और उसकी मां को विश्वास में लेने के लिए निम्नलिखित हथकंडे अपनाए:
रिश्तेदारी का भरोसा: रिश्ते में मामा होने के कारण उसने पीड़ित परिवार का विश्वास आसानी से जीत लिया।
फर्जी दस्तावेज और प्रक्रिया: रेलवे की वर्दी, WCRMS का आईडी कार्ड, और मेडिकल टेस्ट जैसी प्रक्रियाओं का इस्तेमाल कर उसने भर्ती प्रक्रिया को विश्वसनीय बनाया।
किश्तों में पैसे लेना: 5 लाख रुपये की मांग के बावजूद, उसने 3.24 लाख रुपये तीन-चार किश्तों में लिए, जिससे पीड़ित को कोई शक न हो।
रेलवे अस्पताल का दुरुपयोग: मेडिकल टेस्ट के लिए रेलवे अस्पताल ले जाकर उसने अपनी बात को और पुख्ता किया।
यह मामला मध्य प्रदेश में रेलवे नौकरी के नाम पर ठगी की बढ़ती घटनाओं का हिस्सा है। हाल के वर्षों में, जबलपुर, कोटा, और रायपुर जैसे शहरों में ऐसी कई घटनाएं सामने आई हैं, जहां जालसाज फर्जी जॉइनिंग लेटर, आईडी कार्ड, और ट्रेनिंग के नाम पर लाखों रुपये ठग रहे हैं। उदाहरण के लिए:
रायपुर में 18 लाख की ठगी: जुलाई 2025 में, रायपुर में तीन लोगों से 18.72 लाख रुपये की ठगी का मामला सामने आया, जहां फर्जी जॉइनिंग लेटर और मेडिकल टेस्ट का सहारा लिया गया।
कोटा में अनुकंपा नियुक्ति ठगी: मई 2025 में, कोटा में चार भाइयों से 35 लाख रुपये की ठगी रेलवे नौकरी के नाम पर की गई।
सिंगरौली में IRCTC फर्जीवाड़ा: अप्रैल 2025 में, सिंगरौली में शिवानंद जायसवाल ने IRCTC के फर्जी लेटरपैड और सील का उपयोग कर चार युवकों से ठगी की।
ये मामले दर्शाते हैं कि जालसाज रेलवे जैसे प्रतिष्ठित संगठनों का नाम और फर्जी दस्तावेजों का उपयोग कर बेरोजगार युवाओं को निशाना बना रहे हैं। खासकर इंजीनियरिंग और ग्रेजुएट युवा, जो सरकारी नौकरी की तलाश में हैं, इन ठगों का आसान शिकार बन रहे हैं।
पुलिस और प्रशासन की प्रतिक्रिया
जबलपुर पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। संजीवनी नगर थाना प्रभारी ने कहा, "राकेश सराठे और उसकी सहयोगी महिला से पूछताछ में कई अन्य पीड़ितों के बारे में जानकारी मिल सकती है। हम रेलवे अधिकारियों के साथ भी संपर्क में हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि फर्जी दस्तावेज और आईडी कार्ड कैसे बनाए गए।" पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी नौकरी के ऑफर की सत्यता रेलवे के आधिकारिक पोर्टल (www.indianrailways.gov.in) या स्थानीय रेलवे कार्यालय से जांच लें।
पीड़ित की स्थिति
आदर्श पटेल और उसकी मां इस ठगी से आर्थिक और मानसिक रूप से टूट चुके हैं। आदर्श की मां, जो एक साधारण पीको-फॉल का काम करती हैं, ने कर्ज लेकर और अपनी बचत से 3.24 लाख रुपये जुटाए थे। इस घटना ने उनके परिवार पर गहरा प्रभाव डाला है। आदर्श ने कहा, "मुझे और मेरी मां को राकेश पर पूरा भरोसा था क्योंकि वह रिश्तेदार था। अब हमारा सब कुछ चला गया, और हमें इंसाफ चाहिए।"
जागरूकता की जरूरत
इस घटना ने एक बार फिर रेलवे नौकरी के नाम पर होने वाली ठगी के प्रति जागरूकता की आवश्यकता को रेखांकित किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि बेरोजगार युवाओं को निम्नलिखित सावधानियां बरतनी चाहिए:
आधिकारिक स्रोतों की जांच: रेलवे भर्ती के लिए केवल रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) या रेलवे की आधिकारिक वेबसाइट पर भरोसा करें। किसी भी नौकरी के लिए पैसे की मांग गैरकानूनी है। ऐसे ऑफर्स से तुरंत दूरी बनाएं। जॉइनिंग लेटर, आईडी कार्ड, या अन्य दस्तावेजों की सत्यता रेलवे कार्यालय से जांच लें। ठगी का शक होने पर तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करें।
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