Jabalpur News : ‘बांधवगढ़ किला हमारा है...’ रीवा राजघराने ने हाईकोर्ट की ली शरण, मुआवजे को लेकर नोटिस जारी
रीवा राजघराने ने बांधवगढ़ नेशनल पार्क के किला अधिग्रहण की मुआवजा राशि को लेकर मप्र हाईकोर्ट की शरण ली हैं। इस सिलसिले में पूर्व महाराजा मार्तण्ड सिंह के बेटे की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि 565 एकड़ में फैले किले में राजघराने के सदस्यों का विशेषाधिकार है। संपत्ति के उत्तराधिकारियों को उनके अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। संबंधित किले और उसकी भूमि अधिग्रहण के संबंध में सरकार से उचित मुआवजा की मांग की गई है।

मप्र के टूरिस्ट प्लेस बांधवगढ़ नेशनल पार्क में किले और भूमि अधिग्रहण के मुआवजे का मामला फिर चर्चा में हैं। रीवा राजघराने के सदस्यों ने संबंधित भूमि पर अपना दावा जताया है। उनका कहना है कि देश की आजादी के वक्त रीवा स्टेट का भारत में विलय हुआ था। उस दौरान राजघराने के सदस्यों का किले पर अधिकार था। वह अक्सर वहां आते-जाते रहते थे। काफी वक्त बाद जब बांधवगढ़ नेशनल पार्क विकसित हो गया, तो आवागमन प्रतिबंधित कर दिया गया। पूर्व महाराजा मार्तण्ड सिंह के बेटे पुष्पराज सिंह के वकील अभिजीत अवस्थी का कहना है कि कानूनन राजघराने की संपत्तियों को विशेष दर्जा हासिल है। मौजूदा वक्त में उन संपत्तियों का उपयोग प्रदेश सरकार और वन विभाग कर रही है। साथ ही संपत्ति का अधिग्रहण करने के बाद मुआवजा देने में भी आनाकानी कर रही है।
इन्ही कई बिंदुओं को लेकर राजघराने की ओर मप्र हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई है। याचिका में कहा गया है कि मुआवजे को लेकर सरकार से लंबे वक्त से मांग की जा रही है। लेकिन इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। वन विभाग भी इस ओर किसी तरह का ध्यान नहीं दे रहा है। जबलपुर हाईकोर्ट में दायर याचिका पर सुनवाई हुई। जिसमें बांधवगढ़ किले के पुराने दस्तावेजों फिर उत्तराधिकारियों को हासिल विशेषाधिकार के आधार पर क़ानूनी दलीले पेश की गई। कोर्ट ने इस मामले में केन्द्रीय गृह मंत्रालय समेत प्रदेश सरकार के विभाग प्रमुखों और स्थानीय प्रशासन को नोटिस जारी किए है।












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