Jabalpur News: नेचुरल फार्मिंग की चुनौतियों पर मंथन, जबलपुर में जुटेंगे देशभर के कृषि वैज्ञानिक
(Jabalpur News) प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने केंद्र और राज्य सरकार ने कई योजनाएं लागू की हैं। लेकिन कॉम्पटीशन के दौर में नेचुरल फार्मिंग में कई चुनौतियाँ भी है। जिससे लोग दूर भागते है। इसी पर मंथन करने देश में एक मात्र चयनित जबलपुर को जवाहरलाल कृषि विश्वविद्यालय को चुना गया है। जहां सेंटर ऑफ एडवांस्ड फेकल्टी ट्रेनिंग सेंटर में देश भर के एग्रीकल्चर साइंटिस्ट जुटेंगे।

प्राकृतिक खेती की आधुनिक तकनीक और उसको बढ़ावा देने के उपयोगी संसाधनों से लैस जबलपुर की एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी में देश भर कर एग्रीकल्चर वैज्ञानिक जुटेंगे। ''राष्ट्रीय सेंटर ऑफ एडवांस्ड फेकल्टी ट्रेनिंग इन सॉयल साईंस'' के अंतर्गत खेती की नई तकनीक और चुनौतियों पर मंथन करेंगे। एक नबंवर से शुरू होने जा रहा यह ट्रेनिग प्रोग्राम 21 दिनों तक चलेगा। केफ्ट के संचालक और मृदा विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. एन.जी. मित्रा के मुताबिक राष्ट्र में आई.सी.ए.आर. द्वारा सिर्फ और सिर्फ जबलपुर के जवाहरलाल नेहरु कृषि विश्वविद्यालय को ही सेंटर ऑफ एडवांस्ड फेकल्टी ट्रेनिंग हेतु चयनित किया गया है। जहां 3 दशक के वक्त से मृदा विज्ञान विभाग द्वारा यह प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। कृषि शिक्षा-शोध विस्तार के कृषि वैज्ञानिक बदलते दौर की कृषि विशेषताओं से किसानों को अपडेट भी रखते है।
यूनिवर्सिटी प्रबंधन का मानना है कि यह आयोजन युवा कृषि वैज्ञानिकों के लिए मील का पत्थर साबित होगा। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिगंह चौहान भी प्राकृतिक खेती पर ही जोर दे रहे है। इसको बढ़ावा देने कई योजनाएं भी लागू की गई हैं। इस तकनीक के जरिए सरकार ने खेती को फायदा के धंधा बनाने के साथ किसानों को उनकी उपज का दोगुना लाभ दिलाने का लक्ष्य भी रखा है। रासायनिक खाद पर निर्भरता कम होने से न सिर्फ किसानों की लागत कम होगी। बल्कि मौसम के बदलाव के साथ सिंचाई अंतराल में भी वृद्धि होगी।












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