क्या कानून से ही बंध जाते है कानून के लंबे हाथ? जब लड़की बालिग़ हो गई तब दर्ज हुआ किडनेपिंग का केस
Are long arms bound by law only by law When girl became an adult case of kidnapping was registered डिंडौरी जिले के संदीप सिंह नाम के व्यक्ति की एक शिकायत कानून पर लंबी होने बहस का एक हिस्सा हो सकती है।
जबलपुर, 05 जून: मप्र के डिंडौरी के एक गांव से वो 14 साल की बेटी के साथ दो जून की रोटी कमाने जबलपुर आया था। फिर अचानक लड़की गायब हो गई। शक के आधार पर एक अज्ञात शख्स के खिलाफ पीड़ित पिता अपहरण का केस दर्ज कराने गिड़गिड़ाता रहा, लेकिन पुलिस ने महज सामान्य गुमशुदगी का मामला दर्ज किया। इंसाफ के लिए भटकते इस मजदूर की FIR 16 साल बाद अपहरण में तो बदल गई, लेकिन अब बालिग़ हो चुकी लड़की का सुराग नहीं। ये कहानी जबलपुर के गोरखपुर थाने में दर्ज उस केस की है, जो बताने के लिए काफी है कि कभी-कभी कानून से ही कानून के लंबे हाथ बंध जाते हैं। एक बार फिर पुलिस नए सिरे से अब लड़की की तलाश में जुट गई है।

डिंडौरी जिले के संदीप सिंह नाम के व्यक्ति की एक शिकायत कानून पर लंबी होने वाली बहस का एक हिस्सा हो सकती है। साल 2006 में अपनी 14 वर्षीय बेटी के साथ रोजगार की तलाश में संदीप जबलपुर आया था। उसे इस बात का जरा भी इल्म नहीं था कि उसके रोजगार की तलाश उसके जिगर के टुकड़े को जुदा करने जा रही है। जबलपुर में उसको काम मिल गया और हाथीताल क्षेत्र में रहने लगा। फिर अचानक एक दिन उसके साथ रह रही 14 साल की नाबालिग बेटी गायब हो गई। अपने गांव से दूसरी जगह आकर पेट की आग बुझाने के उसके सारे अरमान मानों धराशाही हो गए हो। बेटी की तलाश में कई जगह भटककर जब सफलता हासिल नहीं हुई, तो उसने पुलिस की शरण ली। उसे शंका हुई कि उसकी हँसती-खेलती बेटी को कोई बहला-फुसलाकर ले गया है। जब वह गोरखपुर थाने में अपहरण की रिपोर्ट दर्ज कराने पहुंचा तो पुलिस ने नियमों और जांच का हवाला देकर सिर्फ गुम-इंसान की रिपोर्ट दर्ज की। जिसके बाद पुलिस भी उस लड़की को आज तक तलाश नहीं कर पाई।

16 साल बाद अचानक आया नया मोड़
पीड़ित संदीप के लिए अपना पेट पालने के साथ लापता लड़की की तलाश ही जिंदगी बन गई। पुलिस के बड़े अफसरों से लेकर नेता-मंत्रियों के चक्कर काटे, लेकिन स्थिति जस की तस रही। अपहरण का मामला दर्ज कराने मिन्नतें करता रहा, लेकिन पुलिस भी बेबस नजर आई। कही से सीएम हेल्प लाइन का उसको पता चला और फिर उसने शिकायत की। जहाँ से उसे फिलहाल पूरा इंसाफ तो नहीं मिला, उसकी राह जरुर नजर आई। सीएम हेल्प लाइन में शिकायत के बाद जब अफसरों ने कानून के पन्ने पलटना शुरू किए तो 2014 में सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश की नजीर सामने आई। जिसमें कहा गया है कि नाबालिगों के गुम-इंसान मामलों में धारा 363 के तहत अपहरण का केस दर्ज होना चाहिए। जिसके आधार पर पुलिस ने अब गुमशुदगी के 16 साल पुराने मामले को अपहरण के केस में तब्दील किया है।

अब 30 साल की हो गई लापता लड़की
जब लड़की लापता हुई, उस वक्त उसकी उम्र 14 साल थी। 16 साल बाद अब लड़की की उम्र लगभग 30 वर्ष होना बताई जा रही है। घरवालों को भी लापता लड़की का आज तक पता नहीं चल सका। पुलिस के हाथ भी खाली है। लेकिन नए सिरे ओपन हुई संदीप सिंह की शिकायत की फ़ाइल से उम्मीद की जा रही है कि लड़की का कही कोई सुराग लग जाए। इतने लंबे वक्त बाद पुलिस के लिए लड़की का पता लगाना इसलिए और ज्यादा परेशानी भरा है क्योकि वयस्क अवस्था में उसका रंग-रूप भी बदल गया होगा। फिर भी पुलिस का दावा है कि इस मामले की तह तक पहुंचकर उसका पटाक्षेप जरुर करेंगी।












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