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बढ़ रहा है ईरान के सिनेमा उद्योग पर दबाव, तीन फिल्मकार गिरफ्तार

जाफर पनाही

तेहरान, 12 जुलाई। ईरान के कई अखबारों में छपी खबरों के मुताबिक आलोचनात्मक फिल्में बनाने वाले देश के सबसे जाने माने फिल्मकारों में से एक जाफर पनाही को गिरफ्तार कर लिया गया है. पनाही एक हफ्ते से भी कम समय में गिरफ्तार किए जाने वाले तीसरे फिल्मकार हैं.

पनाही सोमवार की शाम पिछले सप्ताह हिरासत में लिए गए दो और फिल्मकारों के मामलों की स्थिति मालूम करने प्रासीक्यूटर के दफ्तर गए थे, तभी सुरक्षाकर्मियों ने वहीं उन्हें गिरफ्तार कर लिया. ईरान की सरकार देश के जाने माने सिनेमा उद्योग के खिलाफ कड़े कदम उठा रही है.

ईरान के अबादान शहर में गिरी मेट्रोपोल बिल्डिंग

पनाही के एक सहकर्मी ने अपना नाम ना बताने की शर्त पर बताया कि अधिकारियों ने पनाही को सालों पुराने एक मामले में जेल की सजा काटने के लिए ईरान के कुख्यात एविन कारागार में भेज दिया.

पुराना मामला

यह मामला 2011 है जब पनाही को सरकार के खिलाफ प्रोपगैंडा करने के आरोप में छह साल जेल की सजा सुनाई गई थी. उन्हें फिल्में बनाने से भी 20 साल के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया था और देश छोड़ कर जाने से भी मना कर दिया गया था.

लेकिन उस सजा को लागू नहीं किया गया और पनाही अंडरग्राउंड फिल्में बनाते रहे. उनकी फिल्मों की सरकार की स्वीकृति और परमिट नहीं मिलते थे लेकिन देश के बाहर रिलीज किए जाने पर उनकी बहुत सराहना की जाती थी.

मेट्रोपोल बिल्डिंग का मलबा जिसे काट कर दबे हुए लोगों को बचाया गया था

पनाही कई अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार जीत चुके हैं, जिनमें 2015 का बर्लिन गोल्डन बेयर पुरस्कार भी शामिल है. यह उन्हें उनकी फिल्म "टैक्सी" के लिए दिया गया था जो ईरान में गरीबी, लिंगवाद और सेंसरशिप जैसे विषयों पर थी.

उन्हें 2000 में ईरान के पितृसत्तात्मक समाज में महिलाओं की जिंदगी पर आधारित उनकी फिल्म "द सर्कल" के लिए वेनिस गोल्डन लायन पुरस्कार भी दिया गया था. उनकी गिरफ्तारी पर बर्लिन अंतरराष्ट्रीय फिल्म उत्सव ने कहा है कि वो "निराशा और क्रोध" महसूस कर रहा है.

दमन का विरोध

उत्सव के निदेशकों ने कहा, "जाफर पनाही की गिरफ्तारी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और कलाओं की स्वतंत्रता का एक और उल्लंघन है." पनाहे से पहले दो और ईरानी फिल्मकार मोहम्मद रसूलोफ और मुस्तफा अल-अहमद भी गिरफ्तार किए जा चुके हैं.

मेट्रोपोल के मलबे के नीचे से अपने परिवार के सदस्यों को बचाए जाने के लिए परेशान एक महिला

रसूलोफ और अल-अहमद पर देश के दक्षिणपश्चिमी इलाके में अशांति पर सरकार की हिंसक कार्रवाई का सोशल मीडिया पर विरोध कर देश की सुरक्षा को कमजोर करने का आरोप लगाया था.

मई में मेट्रोपोल बिल्डिंग के गिरने से कम से कम 41 लोगों की मौत हो गई थी जिसके बाद सरकार की लापरवाही और गहराई तक फैले भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए थे. पुलिस ने प्रदर्शनों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की, प्रदर्शनकारियों पर लाठियां बरसाई और आंसू गैस के गोले भी चलाए.

कान फिल्म उत्सव ने भी तीनों फिल्मकारों की गिरफ्तारी की "और ईरान में कलाकारों के खिलाफ चल रहे दमन" की कड़ी निंदा की है.

सीके/एए (एपी/एएफपी)

Source: DW

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