Zakir Hussain Funeral: ड्रम की खनक में 'उस्ताद' को आखिरी सलाम, जाकिर हुसैन सैन फ्रांसिस्को में सुपुर्द-ए-खाक
Zakir Hussain Funeral: महान तबला वादक जाकिर हुसैन को गुरुवार (19 दिसंबर) को सैन फ्रांसिस्को के फर्नवुड कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया। उनकी याद में आयोजित इस समारोह में संगीत जगत के कई नामचीन कलाकार और उनके प्रशंसक शामिल हुए। प्रसिद्ध तालवादक ए. शिवमणि और अन्य संगीतकारों ने थोड़ी दूरी पर ड्रम बजाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
73 वर्षीय जाकिर हुसैन का 16 दिसंबर 2024 को सैन फ्रांसिस्को के एक अस्पताल में इडियोपैथिक पल्मोनरी फाइब्रोसिस (फेफड़ों की गंभीर बीमारी) के कारण निधन हो गया। उनकी मृत्यु ने संगीत जगत को गहरे शोक में डाल दिया।

'ताल ही ईश्वर है और जाकिर भाई आप'
तबला वादक ए. शिवमणि ने कहा, 'ताल ही ईश्वर है और वह आप थे, जाकिर भाई। मैंने आपसे बहुत कुछ सीखा है। जब भी मैं लय में होता हूं, ऐसा लगता है कि आप वहां हैं। आपकी यात्रा सुखद रहे। कृपया उस्तादों को हमारा प्रणाम कहना।'
जाकिर हुसैन का योगदान
जाकिर हुसैन ने तबले को भारतीय शास्त्रीय संगीत की सीमाओं से बाहर लाकर जैज़ और पश्चिमी संगीत से जोड़ा। वह उस्ताद अल्ला रक्खा के बेटे थे और भारतीय शास्त्रीय संगीत में तबले की ध्वनि को नए आयाम देने के लिए जाने जाते हैं।
उन्होंने अपने 60 साल के करियर में चार ग्रैमी पुरस्कार जीते और 1973 में अपनी फ्यूजन परियोजना के लिए प्रसिद्ध हुए, जिसमें उन्होंने जॉन मैकलॉघलिन, एल शंकर और टीएच 'विक्कू' विनायकरम के साथ मिलकर भारतीय और जैज़ संगीत का एक अनोखा संगम प्रस्तुत किया।
सम्मान और पुरस्कार
जाकिर हुसैन को भारत सरकार ने 1988 में पद्म श्री, 2002 में पद्म भूषण, और 2023 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया। उनके नाम से भारतीय और अंतरराष्ट्रीय संगीत मंचों पर अद्वितीय प्रदर्शन जुड़ा हुआ है।
परिवार और प्रशंसा
उनके परिवार में पत्नी एंटोनिया मिनेकोला और बेटियां अनीसा कुरैशी और इसाबेला कुरैशी हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें भारतीय संगीत का सच्चा प्रतिभाशाली व्यक्ति बताया।
ग्रैमी विजेता संगीतकार रिकी केज ने कहा, "जाकिर जी ने न केवल संगीत की दुनिया को समृद्ध किया, बल्कि कई अन्य कलाकारों के करियर को भी गढ़ा। उनका ज्ञान और कौशल अद्वितीय था। उनकी विरासत हमेशा जीवित रहेगी।"
संगीत जगत का शोक
सोशल मीडिया पर संगीत प्रेमियों और कलाकारों ने हुसैन को भावभीनी श्रद्धांजलि दी। शिवमणि ने अपने फेसबुक पोस्ट में कहा, "यह अविश्वसनीय है। मैं सैन फ्रांसिस्को जा रहा हूं, आपको आखिरी बार देखने। जीवन फिर कभी वैसा नहीं होगा।" जाकिर हुसैन का संगीत आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा। उनकी आवाज़ और उनकी ध्वनि दोनों ही शाश्वत हैं।
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