Zakir Hussain: संगीत में गुरु को भी दी मात! पिता अल्ला रक्खा ने की 2 शादियां, जानें क्या है पाकिस्तानी नाता?
Zakir Hussain Alla Rakha Qureshi Pakistani Connection: विश्वविख्यात तबला वादक और पद्म विभूषण से सम्मानित उस्ताद जाकिर हुसैन का 15 दिसंबर 2024 को 73 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उन्होंने इडियोपैथिक पल्मोनरी फाइब्रोसिस (IPF) नामक गंभीर बीमारी के चलते सैन फ्रांसिस्को के अस्पताल में अंतिम सांस ली। भारतीय शास्त्रीय संगीत को दुनिया भर में पहचान दिलाने वाले जाकिर हुसैन ने अपने पिता, उस्ताद अल्ला रक्ख़ा कुरैशी, की विरासत को आगे बढ़ाया और इसे नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।
जाकिर हुसैन के पिता अल्ला रक्ख़ा का जीवन संगीत के प्रति समर्पण की मिसाल है। अपने परिवार की इच्छाओं के खिलाफ, 12 साल की उम्र में उन्होंने मियां कादर बख्श से तबला वादन की शिक्षा लेने के लिए घर छोड़ दिया। अल्ला रक्ख़ा ने पंडित रविशंकर जैसे दिग्गजों के साथ काम किया और तबला को भारतीय शास्त्रीय संगीत का अहम हिस्सा बना दिया।

पिता अल्ला रक्खा और जाकिर हुसैन की जुगलबंदी
जाकिर हुसैन ने बचपन में ही अपने पिता के साथ मंच पर प्रदर्शन करना शुरू कर दिया। बताया जाता है कि मात्र 12 साल की उम्र में उन्होंने पंडित रविशंकर और बिस्मिल्लाह खान जैसे दिग्गजों के सामने अपने पिता के साथ परफॉर्म किया। इस प्रस्तुति में उन्हें 5 रुपये का इनाम मिला था, जिसे जाकिर ने अपनी जिंदगी का सबसे कीमती तोहफा बताया।
जाकिर हुसैन का पाकिस्तानी कनेक्शन
उस्ताद अल्ला रक्ख़ा कुरैशी का जन्म 29 अप्रैल 1919 को जम्मू और कश्मीर के पघवाल गांव में हुआ था। उन्होंने तबला वादन में महारत हासिल कर इसे वैश्विक स्तर पर लोकप्रिय बनाया। अल्ला रक्ख़ा ने दो शादियां की थीं। पहली पत्नी बावी बेगम से 5 बच्चे दो बेटियां खुर्शीद औलिया, रजिया और तीन बेटे फजल कुरैशी, तौफीक कुरैशी, जाकिर हुसैन हुए। वहीं, दूसरी पत्नी जीनत बेगम से जन्मीं बेटी रूही बानो पाकिस्तान की मशहूर अभिनेत्री थीं।
रूही बानो को पाकिस्तान में टेलीविजन नाटकों की शुरुआत का हिस्सा माना जाता है। उन्होंने 'किरण कहानी', 'दरवाजा', और 'ज़र्द गुलाब' जैसे प्रसिद्ध नाटकों में काम किया। 1981 में, उन्हें पाकिस्तान के राष्ट्रपति द्वारा 'प्राइड ऑफ़ परफॉर्मेंस अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया।
जाकिर हुसैन का योगदान
जाकिर हुसैन ने अपने पिता की कला को आगे बढ़ाते हुए भारतीय शास्त्रीय संगीत को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई। उन्होंने पश्चिमी संगीत के साथ भारतीय शास्त्रीय संगीत का संगम किया और 'शक्ति', 'प्लेनेट ड्रम', और 'ग्लोबल ड्रम प्रोजेक्ट' जैसे बैंड बनाए।
अवार्ड्स और सम्मान:
- पद्म विभूषण (2023)
- पद्म भूषण (2002)
- पद्म श्री (1988)
- तीन बार ग्रैमी अवॉर्ड विजेता
- संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार
- SFJazz लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड
अल्ला रक्खा को मिले अवॉर्ड
तबला वादक उस्ताद कुरैशी अल्ला रक्खा को ये पुरस्कार मिले हैं- साल 1977 में पद्मश्री पुरस्कार, साल 1982 में संगीत नाटक अकादमी अवॉर्ड।
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