Zakir Hussain: 'मैंने तबला बनाया, उन्होंने मेरी जिंदगी बना दी', जाकिर हुसैन के तबला मेकर की भावुक कहानी
Zakir Hussain Tabla Maker Haridas Vhatkar: उस्ताद जाकिर हुसैन, भारतीय शास्त्रीय संगीत के महान तबला वादक, का 73 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनकी याद में, तबला निर्माता हरिदास व्हाटकर ने अपने और जाकिर हुसैन के लंबे संबंधों को याद किया। 59 वर्षीय व्हाटकर पिछले 25 वर्षों से जाकिर हुसैन के लिए तबले बनाते आए हैं।
इससे पहले, उन्होंने हुसैन के पिता, उस्ताद अल्ला रक्खा के लिए भी तबले बनाए थे। हरिदास व्हाटकर महाराष्ट्र के मीराज के तीसरी पीढ़ी के तबला निर्माता हैं। 1994 में मुंबई आने के बाद, उन्होंने हरिभाऊ विश्वनाथ कंपनी के साथ काम करना शुरू किया। यहीं से उनकी मुलाकात जाकिर हुसैन से हुई।

तबले से जुड़े रिश्ते की शुरुआत
1998 से जाकिर हुसैन के तबले बनाने वाले हरिदास का कहना है कि जाकिर न केवल एक महान संगीतकार थे, बल्कि तबले की बारीकियों और उसकी ट्यूनिंग को लेकर बेहद खास थे। हरिदास ने कहा कि वह तबले को लेकर इतने सजग थे कि उनकी पसंद को समझने और उसे पूरा करने में खुद को धन्य महसूस करता हूं।
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गुरु-पूर्णिमा पर आखिरी मुलाकात
हरिदास ने जाकिर हुसैन से आखिरी बार अगस्त 2023 में गुरु पूर्णिमा के अवसर पर मुलाकात की थी। उन्होंने मुंबई के नेपियन सी रोड स्थित सिमला हाउस में घंटों तक बातें कीं। हरिदास ने याद करते हुए बताया कि हमने तबले की ट्यूनिंग, उसके निर्माण और उसके रखरखाव पर गहन चर्चा की। उनकी हर बात में एक गहराई होती थी।
'उन्होंने मेरी जिंदगी बना दी'
हरिदास ने अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा, "मैंने उनके लिए तबले बनाए, लेकिन उन्होंने मेरी जिंदगी बना दी।" जाकिर हुसैन के साथ काम करते हुए उन्हें न केवल अपने शिल्प को निखारने का अवसर मिला, बल्कि संगीत के प्रति उनकी समझ और गहरी हो गई।
हालांकि दोनों के बीच ज्यादा बातचीत नहीं होती थी, लेकिन जब भी जाकिर को नए तबले की जरूरत पड़ती या किसी पुराने वाद्ययंत्र की मरम्मत करवानी होती, वह हरिदास को फोन करते थे। हरिदास ने बताया कि हमारे पेशेवर संबंध कमाल के थे। वह सादगी और कृतज्ञता का प्रतीक थे।
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तबला निर्माण की विरासत
हरिदास व्हाटकर ने अपने दादा केरप्पा रामचंद्र व्हाटकर और पिता रामचंद्र केरप्पा व्हाटकर से यह कला सीखी। आज उनके बेटे किशोर और मनोज इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। व्हाटकर परिवार का यह समर्पण भारतीय शास्त्रीय संगीत में कलाकार और कारीगर के बीच गहरे संबंध को दर्शाता है।
जाकिर हुसैन की अमर विरासत
जाकिर हुसैन न केवल अपने तबला वादन के लिए याद किए जाएंगे, बल्कि भारतीय शास्त्रीय संगीत को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाने के लिए भी। उनका हरिदास व्हाटकर जैसे कलाकारों के साथ सहयोग यह दिखाता है कि कलाकार और कारीगर मिलकर कैसे एक अमूल्य धरोहर बनाते हैं।
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