यूरोप में कोरोना से हुई सबसे कम उम्र के मरीज की मौत, स्वस्थ दिखने वाली 16 साल की लड़की ने तोड़ा दम

नई दिल्ली। कोरोना वायरस के चलते देश-विदेश में हाहाकार मचा हुआ है, इस वैश्विक महामारी ने अब तक 24 हजार से ज्यादा लोगों की जान ले ली है। कोरोना वायरस के सबसे ज्यादा प्रभावित यूरोपीय देश हुए हैं। इनमें फ्रांस, जर्मनी और इटली जैसे देश कोरोना वायरस के सामने पूरी तरह से असहाय नजर आ रहे है। बीते गुरुवार को फ्रांस में कोरोना वायरस से होने वाली मौत का आंकड़ा 365 पर पहुंच गया, जिसमें महामारी से सबसे कम उम्र में दम तोड़ने वाली 16 साल की एक लड़की भी शामिल है।

दुनिया में संक्रमित लोगों की संख्या 5 लाख के पार

दुनिया में संक्रमित लोगों की संख्या 5 लाख के पार

गौरतलब है कि कोरोना वायरस से दुनिया में संक्रमित लोगों की संख्या 5 लाख के पार पहुंच गई है और फ्रांस में कोरोना से 29,155 लोगों के संक्रमित होने की पुष्टि हुई है। गुरुवार के दिन हुई कोरोना से 365 मौत के बाद फ्रांस में यह आंकड़ा 1,696 तक पहुंच गया है। इसमें 16 वर्षीय फ्रांसीसी छात्रा की मौत ने सबको चौंका दिया है। छात्रा की पहचान जूली के नाम से की गई है, उसके बताते हैं कि वह बहुत जिंदादिल और हंसमुख लड़की थी। 16 वर्षीय जूली को पिछले हफ्ते मामूली खांसी की शिकायत हुई थी जिसके बाद उसने गुरुवार को पेरिस के अस्पताल में सांस संबंधी समस्याओं के कारण दम तोड़ दिया।

शारीरिक रूप से नहीं थी बीमार

शारीरिक रूप से नहीं थी बीमार

जूली की बहन मनोन ने बताया कि वह पहले से किसी बीमारी से पीड़ित नहीं थी। मनोन ने कोरोना वायरस को लेकर लोगों को चेतावनी दी है कि यह महामारी किसी भी उम्र के लोगों को के लिए जानलेवा है, कोई भी अजेय नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि हमें यह सोचना बंद कर देना चाहिए की यह वायरस सिर्फ बुजुर्गों को ही प्रभावित करता है। मनोन आगे कहती हैं कि जूली को पिछले हफ्ते थोड़ी सी खांसी हुई थी। उसे खांसी के साथ बलगम आने के बाद उसे सोमवार के हॉस्पिटल में अपने चेकअप कराया।

महामारी से सिर्फ बुजुर्गों के मरने का खतरा नहीं

महामारी से सिर्फ बुजुर्गों के मरने का खतरा नहीं

मनोन ने कहा, यह वह समय था जब उसे खांसी के साथ सांस लेने में समस्या होने लगी, इससे पहले जूली को कोई कोई खास बीमारी नहीं थी जिसके चलते हमें पता नहीं चला की वह संक्रमित है। एक अखबार में अपनी मृत बहन की तस्वीर छापने के लिए राजी होते हुए मनोन कहा कि वह दुनिया को बताया चाहती है कि लोग इस वायरस के प्रति जागरूक हों। अब तक लोग यही सोचते थे कि वायरस के कारण केवल बुजुर्गों के मरने का खतरा है।

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