रेप को हथियार की तरह इस्तेमाल करते हैं आतंकी, Sex Slave ने सुनाई आपबीती
तीन साल तक दुनिया के सबसे खतरनाक आतंकी संगठन के चंगुल में बचकर निकली महिला ने अपने दर्द को किताब के जरिए बयां किया है।

नई दिल्ली। तीन साल तक दुनिया के सबसे खतरनाक आतंकी संगठन के चंगुल में बचकर निकली महिला ने अपने दर्द को किताब के जरिए बयां किया है। 24 साल की नादिया मुराद ने आईएसआईएस के कैद में बिताई अपनी हर रात,हर दर्द को किताब के जरिए दुनिया तक पहुंचाया है।
नादिया की किताब The Last Girl: My Story of Captivity and My Fight Against the Islamic State' मंगलवार को रिलीज हो गई। किताब में नादिया ने बताया है कि कैसे उसका अपहरण किया गया, कैसे उसे कैद करके रखा गया। कैसे उसे एक सेक्स स्लेव बनाया गया और फिर कैसे वो इस्लामिक स्टेट के आंतकियों की चंगुल से भागी।

रेप से अच्छा होता पुरुषों की तरह मार डालते
तीन साल दुनिया के सबसे खतरनाक आतंकी संगठन आईएसआईएस के चुंगल से बचकर निकली नादिया उत्तरी इराक के यजीदी गांव की रहने वाली है। उसने बताया कि कैसे यजीदी समुदाय के इस पूरे गांव पर आईएसआईएस के आतंकियों ने बंधक बनाकर पुरुषों और महिलों को अलग करके सभी पुरुषों को मार दिया था। नादिया के 8 भाईयों को और उसकी मां को मार डाला गया था। जब कि जवान महिलाओं और लड़कियों को सेक्स स्लेव बना लिया गया था।

हर बार सहती रही वो दर्द
नादिया कहती है कि उस दर्द को सहना आसान नहीं था। हर बार जब मैं उसे याद करती हूं तो उसी पीड़ा से गुजरती हूं। वो लिखती है कि आईएसआईएस के सेक्स स्लेव से बेहतर था कि वो हमें भी पुरूषों की तरह मार डालते। वो कहती है कि उन्हें किडनैप करने के बाद आतंकियों ने उन्हें बेचा और हर बार रेप का शिकार बनाया। नादिया ने कहा कि आज आतंकियों के चलते उनका पूरा गांव अब कब्र बन चुका है।

आपबीती सुनकर रो पड़े थे अफसर
यूनाइटेड नेशन ने गुडविल एम्बेस्डर नादिया ने ने बताया है कि जब उन्होंने यूनाइटेड नेशन सिक्युरिटी काउंसिल में अपनी आपबीती सुनाई थी, तो वहां बैठे लोग रो पड़े थे। उन्होंने किताब में लिखा है कि आईएसआईएस के आतंकियों ने अगस्त 2014 में इराक के एक गांव लड़कियों और महिलाओं को कब्जे में लेकर उनके साथ बदसलूकी की गई। उन्हें आंतकियों के सामने परोसा जाता था। उन्हें मारते-पीटते थे। उन्हें रोज हवस का शिकार बनाया जाता था। भागने की कोशिश करने पर उसे बहुत मारा-पीटा गया था। उसे तब तक मारते रहे, जब तक वो बेहोश नहीं हो गई।

रेप आतंकियों का बड़ा हथियार
नादिया ने अपनी किताब में बताया है कि उन्हें पूरे तीन महीने एक सेक्स स्लेव की तरह रखा गया। आईएसआईएस के आतंकी रेप को अपना सबसे बड़ा हथियार मानते हैं। वो ऐसा करके महिलाओं को उनसे जीने का अधिकार छिन लेते हैं। उन्होंने किताब में इस बात का जिक्र किया है कि मोसुल में हजारों की संख्या में यजीदी महिलाएं और बच्चे आईएसआईएस के कैद में हैं। ये आतंकी महिलाओं को एक दूसरे के गिफ्ट के तौर पर भेज करते हैं।












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