मजबूरी के बाद भी चीन-रूस में और गहरी होगी दोस्ती, जिनपिंग-पुतिन मुलाकात में भारत के लिए चिंताएं?

व्लादिमीर पुतिन ने चीन और रूस के बीच गहरे आर्थिक संबंधों पर जोर दिया और उन्होंने इस बात पर जोर दिया, कि पिछले साल दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़कर 140 अरब डॉलर को पार कर गया है।

समरकंद, सितंबर 16: रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने गुरुवार को यूक्रेन युद्ध पर चीन की "संतुलित स्थिति" की प्रशंसा की है, लेकिन, उन्होंने स्वीकार किया है कि, यूक्रेन पर रूसी आक्रमण को लेकर चीन के पास कई सवाल और चिंताएं थीं। पुतिन ने माना है कि, लंबी चलने वाली इस लड़ाई के दौरान अलग अलग वक्त पर चीन के पास चिंताएं और अलग अलग विचार बने। आपको बता दें कि, उज्बेकिस्तान में आज एससीओ शिखर सम्मेलन का दूसरा दिन है और सम्मेलन के पहले दिन शी जिनपिंग और व्लादिमीर पुतिन की मुलाकात हुई थी और इसके बाद पुतिन ने कबूल किया है, कि युद्ध को लेकर चीन के पास कई चिंताएं थीं।

जिनपिंग से मिले राष्ट्रपति पुतिन

जिनपिंग से मिले राष्ट्रपति पुतिन

यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद ये पहला मौका है, जब शी जिनपिंग और व्लादिमीर पुतिन की मुलाकात हुई है और राष्ट्रपति पुतिन की ये टिप्पणी उस वक्त आई है, जब यूक्रेन के कई इलाकों से रूसी सेना पीछे हटने लगी है और पिछले एक हफ्ते में रूस ने पांच महीने में जितनी क्षेत्रों पर कब्जा किया था, उतने क्षेत्र पर यूक्रेन का फिर से नियंत्रण हो गया है। हालांकि, चीन ने अब तक अपने पार्टनर रूस को आर्थिक सहायता देते हुए यूक्रेन पर रूस के हमले की निंदा करने से इनकार कर दिया है, वहीं, पश्चिमी प्रतिबंधों के बीच रूसी व्यापार को भी चीन ने काफी बढ़ावा दिया है और यूक्रेन युद्ध के बाद भारत से पहले चीन ही है, जो रूस से सबसे ज्यादा तेल खरीद रहा है। शी जिनपिंग से मुलाकात के दौरान अपने ओपनिंग स्पीच में पुतिन ने कहा कि, "हम यूक्रेनी संकट के संबंध में अपने चीनी मित्रों की संतुलित स्थिति की अत्यधिक सराहना करते हैं। हम इस संबंध में आपके सवालों और चिंताओं को समझते हैं।" उन्होंने आगे कहा कि, "आज की बैठक के दौरान, निश्चित रूप से, हम इस मुद्दे पर अपनी स्थिति के बारे में विस्तार से बताएंगे, हालांकि हमने इस बारे में पहले भी बात की है।"

चीनी राष्ट्रपति ने क्या कहा?

चीनी राष्ट्रपति ने क्या कहा?

वहीं, पुतिन से मुलाकात के दौरान शी जिनपिंग ने कहा कि, "एक दूसरे के मूल हितों से संबंधित मुद्दों पर मजबूत पारस्परिक समर्थन बढ़ाने के लिए रूस के साथ चीन काम करेगा" और "परिवर्तन और अव्यवस्था की दुनिया में स्थिरता और सकारात्मक ऊर्जा को इंजेक्ट करने में अग्रणी भूमिका निभाएगा।" चीनी विदेश मंत्रालय ने बैठक के दौरान जो रीडऑउट दिया, उसके मुताबिक शी जिनपिंग ने कहा कि, "एक-चीन सिद्धांत के लिए रूस के समर्थन की हम सराहना करते हैं और जोर देकर कहा कि, ताइवान चीन का हिस्सा है।" आपको बता दें कि, रूस और चीन, दोनों सत्तावादी देशों के पश्चिमी देशों के साथ संघर्ष चल रहा है और दोनों ही देशों ने एक दूसरे का साथ देने का वादा इसी साल फरवरी महीने में किया है, खासकर यूक्रेन और ताइवान संकट के दौरान दोनों देश मजबूत साझेदार बनकर उभरे हैं। चीन ने यूक्रेन में रूस की कार्रवाइयों के लिए मौन समर्थन की पेशकश की है, जबकि मास्को ने ताइवान पर बीजिंग का समर्थन किया है।

बैठक पर अमेरिका ने क्या कहा?

बैठक पर अमेरिका ने क्या कहा?

उज्बेकिस्तान के समरकंद में चल रही एससीओ शिखर सम्मेलन पर अमेरिका नजरें गड़ाए हुआ है और शी जिनपिंग और व्लादिमीर पुतिन की बैठक के बाद व्हाइट हाउस के राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद समन्वयक रणनीतिक संचार के लिए जॉन किर्बी ने सीएनएन को बताया कि, चीन ने अभी तक रूस के खिलाफ लगाए गये हमारे प्रतिबंधों का उल्लंघन नहीं किया है और अभी तक यूक्रेन युद्ध में रूस को किसी भी तरह की प्रत्यक्ष सैन्य मदद नहीं पहुंचाई है। व्हाइट हाउस ने कहा कि, "चीन के लिए हमारा संदेश यही है, कि हमें लगता है, ये वो वक्त नहीं है, जब रूस के साथ किसी तरह का व्यापार किया जाए, जो उन्होंने यूक्रेन के अंदर किया है, उसे देखकर, हमने उसकी निंदा की है और ना सिर्फ हमने उसकी निंदा की है, बल्कि यूक्रेनियन को अपनी और अपनी क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करने में मदद करने के लिए कदम बढ़ाया है।" किर्बी ने कहा कि, पुतिन "बहुत स्ट्रेन और स्ट्रेस में हैं। यूक्रेन में, उनकी सेना अच्छा नहीं कर रही है, और मुझे लगता है कि क्रेमलिन निश्चित तौर पर इस देखते हुए बीजिंग के साथ चिपकना चाहता है।'

आर्थिक संबंधों पर जोर

आर्थिक संबंधों पर जोर

गुरुवार को बैठक की शुरुआत में व्लादिमीर पुतिन ने चीन और रूस के बीच गहरे आर्थिक संबंधों पर जोर दिया और उन्होंने इस बात पर जोर दिया, कि पिछले साल दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़कर 140 अरब डॉलर को पार कर गया है। राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि, "मुझे विश्वास है कि साल के अंत तक हम नए रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच जाएंगे, और निकट भविष्य में, जैसा कि हमारे बीच सहमति हुई है, हम अपने वार्षिक व्यापार कारोबार को 200 अरब डॉलर या उससे अधिक तक बढ़ाएंगे।" पुतिन आखिरी बार इस साल फरवरी में शीतकालीन ओलंपिक के लिए चीनी राजधानी की यात्रा के दौरान शी से मिले थे। यह उस बैठक में था कि दोनों नेताओं ने अपनी "कोई सीमा नहीं" साझेदारी तैयार की, और "नाटो के और विस्तार" के लिए अपने साझा विरोध की आवाज उठाते हुए 5,000 शब्दों का एक दस्तावेज जारी किया था।

अमेरिका पर बरसे पुतिन

अमेरिका पर बरसे पुतिन

बैठक के दौरान रूसी राष्ट्रपति ने "एकध्रुवीय दुनिया बनाने" का प्रयास करने वालों की आलोचना करते हुए कहा कि, "यूक्रेनी संकट के संबंध में हमारे चीनी मित्रों की संतुलित स्थिति" के लिए हम उनकी सराहना करते हैं। इसके साथ ही ताइवान संकट के लिए रूस ने साफ तौर पर अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया और चीन से कहा कि, "हम इस बारे में आपके सवालों और चिंताओं को समझते हैं।" आपको बता दें कि, पश्चिमी देशों के प्रतिबंध के बीच रूस ने एशिया में व्यापार बढ़ाने पर पूरा फोकस किया है और रूस की नजर में चीन सबसे बड़ा बाजार है। वहीं, कई विश्लेषकों का कहना है कि, रूसी राष्ट्रपति ने एशिया के महत्व पर जोर दिया है। कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस के एक वरिष्ठ साथी अलेक्जेंडर गाबुएव ने फॉरेन अफेयर्स पत्रिका में लिखा है है कि, "रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के यूक्रेन पर आक्रमण करने के फैसले ने रूस को अपने विशाल यूरेशियन साथ की तरफ अपने हाथों में टोपी लेकर मुड़ने के लिए मजबूर किया है।"

चीन के लिए क्या महत्व रखता है रूस?

चीन के लिए क्या महत्व रखता है रूस?

निश्चित तौर पर यू्क्रेन युद्ध के बाद चीन ने ही रूस को आर्थिक जीवनदान दिया है, जब अमेरिका समेत तमाम पश्चिमी देशों ने रूस को प्रतिबंध के जाल में जकड़ लिया। लेकिन, इसका असर चीन के कारोबार पर भी पड़ा है, जो रूसी सामानों के लिए खुद को सबसे बड़े बाजार की तरह पेश किया है और यूक्रेन युद्ध के बाद रूसी तेल का सबसे बड़ा आयातक बनकर चीन ही ऊभरा है। हालांकि, इसके बाद भी चीन समझता है, कि अगर वो रूस को अत्यधिक समर्थन देता है, तो पश्चिमी देशों की नाराजगी उसे भी भारी पड़ सकती है, क्योंकि चीनी सामानों का सबसे बड़ा बाजार यूरोपीय देश ही हैं। लेकिन, उसके बाद भी रूस का समर्थन करना चीन के लिए सबसे ज्यादा जरूरी हो गया है, क्योंकि दोनों देश 4 हजार किलोमीटर से ज्यादा लंबी सीमा रेखा शेयर करते हैं और सस्ते तेल के बदले रूस को चीन से दूसरे रॉ मैटेरियल्स मिल रहे हैं, लिहाजा चीन काफी मजबूती के साथ रूस के साथ खड़ा हुआ दिखाई दे रहा है और रूस भी अपने आर्थिक अस्तित्व के लिए बीजिंग पर निर्भर हो गया है।

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