XI Jinping: कहानी चीन के उस महान शासक की, जो उबले पकौड़ों के साथ अपने विरोधियों को निगल गया
रविवार को कम्युनिस्ट पार्टी के कांग्रेस की बैठक होने वाली है, जिसमें 2 हजार से ज्यादा कार्यकर्ता तीसरी बार शी जिनपिंग को देश का राष्ट्रपति चुनेंगे। जिसमें शी जिनपिंग के 'नया चीन' बनाने के शपथ को पारित किया जाएगा।
China Xi jinping news: शी जिनपिंग जब पहली बार चीन के राष्ट्रपति बने थे, तो राष्ट्रपति बनने के पहले साल में वो काफी सस्ता खाना खाते थे, उबले हुए पकौड़े उनका फेवरेट नाश्ता हुआ करता था, रेस्टोरेंट में खाने पर वो अपने खाने का खुद भुगतान करते थे और बारिश के महीनों में पैंट को भींगने से बचाने के लिए वो अपने पतलून को ऊपर खींचने से भी नहीं शर्माते थे। चीन के अंदर उन्हें प्यार से 'दादा' और 'मामा' कहकर लोग संबोधित करने लगे थे। लोग शी जिनपिंग के अंदर एक दृढ़ छवि का नेता देखते थे, लेकिन अब शी जिनपिंग के शासन के 10 साल बीत चुके हैं और 2018 में उन्होंने तीसरी बार राष्ट्रपति बनने के लिए देश के संविधान को बदल दिया था। ऐसे में आईये जानने की कोशिश करते हैं, कि कैसे शी जिनपिंग कम्युनिस्ट शासन के सबसे कठोर सम्राट कैसे बने और उनके अंदर चीन के लोग एक क्रूर राजवंश का सबसे क्रूर शासक का छवि क्यों देखने लगे हैं, जिसका मकसद इस अशांत दुनिया में स्थाई प्रभुत्व कायम करना रह गया है।

10 साल में कितने बदले शी जिनपिंग?
शी जिनपिंग का भाषण खत्म होने के बाद चीन के अधिकारी कई मिनट तक लगातार ताली बजाते रहते है और किसी पवित्र धर्मग्रंथ में लिखे शब्दों के साथ उनके भाषण की तुलना करते हैं। काफी उत्साह के साथ शी जिनपिंग का समर्थक और वफादार होने की होड़ अधिकारियों में लगी रहती है और उन्हें बार बार बताया जाता है, कि वो माउत्से तुंग के युग की याद दिलाते हैं। लेकिन, निजी तौर पर यही चीनी अधिकारी शी जिनपिंग का मजाक उड़ाते हैं, लेकिन, जेल जाने के डर से उन्होंने अब अपने मुंह पर पट्टी बांध ली है। लिहाजा शी जिनपिंग के सार्वजनिक कार्यक्रम को अधिकारी हर बार विशालकाय बनाते हैं, ताकि उन्हें दुनिया का सबसे ताकतवर नेता होने का अहसास हो। यानि, 10 साल पहले जो नेता सरल और जमीनी जीवन को अपना मकसद बताता था, वो आज अपनी कान में आलोचना का एक शब्द बर्दाश्त नहीं कर सकता है।

फिर से राष्ट्रपति बनने की तैयारी
रविवार को कम्युनिस्ट पार्टी के कांग्रेस की बैठक होने वाली है, जिसमें 2 हजार से ज्यादा कार्यकर्ता तीसरी बार शी जिनपिंग को देश का राष्ट्रपति चुनेंगे। कांग्रेस की बैठक में शी जिनपिंग के 'नया चीन' बनाने के शपथ को पारित किया जाएगा। यानि, शी जिनपिंग के शासन को और मजबूत और विस्तारित किया जाएगा। जिसके बाद चीन की राजनीति में माओ के बाद पहली बार किसी एक शख्स के पास देश की सारी शक्तियां आ जाएंगी और ना पार्टी के अंदर और ना ही पार्टी के बाहर उनका कोई विरोध करने वाला ही होगा।

16 अक्टूबर को लगेगी मुहर
बीजिंग में 16 अक्टूबर को होने वाली पार्टी कांग्रेस की बैठक में वो पार्टी के महासचिव के तौर पर तीसरा कार्यकाल जीतने के लिए निश्चिंत हैं और इसके साथ की कम्युनिस्ट पार्टी का वो सिद्धांत भी टूट जाएगा, जिसमें दावा किया जाता है, कि ये पार्टी दबे-कुचले और गरीबों की पार्टी है, जहां सभी को समान अधिकार हासिल हैं। शी जिनपिंग का तीसरी बार राष्ट्रपति बनना और उनका तमाम विरोधियों को ठिकाने लगाना इस बात का सबूत है, कि कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चायना में लोगों के अधिकारों की बात करना बेमानी है। बीजिंग के राजनीतिक विश्लेषक वू कियांग ने एक इंटरव्यू में इस बात का जिक्र करते हुए कहा, कि 'राष्ट्रपति बनने की निश्चितता सिर्फ शीर्ष स्तर की व्यवस्था में होगी, कि उनकी शक्ति किसी भी चुनौती से परे है, लेकिन इसके नीचे हम बहुत सारी अनिश्चितताओं का सामना करेंगे।"

दुनिया से दूर होता गया चीन
शी जिनपिंग चीन की राजनीति में जैसे-जैसे शक्तिशाली होते गये, ठीक वैसे वैसे वो दुनिया के देशों से भी दूर होते चले गये। शी जिनपिंग के 'चेहरे' में लगातार होता बदलाव इस बात की पुष्टि करता है, कि चीन एक सत्तावादी देश बन चुका है, जिसे अपनी स्थिति पर गर्व भी है, जिसकी अमेरिका के साथ टकराव लगातार बढ़ता ही जा रहा है और जो कहता है, कि आधुनिक दुनिया में लोकतंत्र अपनी चमक खो चुका है और जो 21वीं सदी में नये वैश्विक व्यवस्था की रेखा खींचने के लिए काफी ज्यादा बेकरार है। कम्युनिस्ट पार्टी कांग्रेस की बैठक मंच शी जिनपिंग के लिए अपनी ताकत का प्रदर्शन करने का मंच बनेगा, जहां वो साबित करेंगे, कि चीन की आर्थिक अव्यवस्था, कोविड लॉकडाउन में बेरहमी और अमेरिका समेत ज्यादातर दुनिया से दुश्मनी होन के बाद भी वो निडर बने हुए हैं। उनके 2,296 कांग्रेस प्रतिनिधियों को यह बताने की संभावना है कि, उनकी सरकार ने अपनी सख्त "शून्य COVID" नीति के माध्यम से कई लोगों की जान बचाई है। अर्थव्यवस्था को स्वच्छ, निष्पक्ष और अधिक कुशल विकास के रास्ते पर ट्रांसफर कर दिया है और चीन के अंतरराष्ट्रीय शाख के स्तर को उठाया है, तो सैन्य आधुनिकीकरण में उनके नेतृत्व में पिएलए ने बड़ी बड़ी प्रगति की है।

कैसा चेहरा दिखाना चाहते हैं जिनपिंग?
यूरेशिया समूह के लिए चीनी राजनीति के एक विश्लेषक नील थॉमस ने कहा कि, "वह दिखाना चाहते हैं कि, वह बड़े काम करने के लिए दृढ़ है।" उन्होंने कहा कि, "वह अपनी ऐतिहासिक भूमिका को वंशवाद के उत्थान और पतन के ऐतिहासिक चक्र को तोड़ने के रूप में देखते हैं, इसलिए कम्युनिस्ट पार्टी हमेशा के लिए सत्ता में बनी रहती है।" 69 वर्षीय शी जिनपिंग खुद को चीन के भाग्य के इतिहास में डूबे राजवंशों का हवाला देकर बताते हैं, कि वो क्यों डूबे और खुद को चीन का संरक्षक के तौर पर प्रस्तुत करते हैं। वो पराजित राजवंशों के गिरवने का हवाला देते हुए खुद को महाशक्तिशाली अंगरक्षक के तौर पर प्रस्तपत करते हैं, जो किसी विद्रोग या विदेशी आक्रमण का शिकार नहीं होगा। वो आदेश देने के लिए अपनी ऊंगलियों का सहारा लेते हैं, जैसे वो किसी सम्राट की तरह आज्ञा दे रहे हों।

शी जिनपिंग का guo zhi da zhe
शी जिनपिंग ने लगातार प्राचीन मगर मशहूर आदर्श चीनी वाक्य गुओ ज़ी दा ज़े का उपयोग किया है, मोटे तौर पर जिसका अर्थ है "देश का महान कारण।" ऐसा लगता है कि इसे एक महान ऋषि ने पास किया है, लेकिन असल में शी जिनपिंग और उनके सलाहकारों ने इसे चीन के घर घर तक पहुंचाने का काम किया। शी जिनपिंग पहले दिन से अपने आने वाले शासन के सालों की तरह देखते रहे हैं और सत्ता और नीतियों का एक मजबूत दीवार बनाने की कोशिश की। वह अपने आप को हर पंथ से दूर रखते हुए खुद को टेक्नोक्रेट कहा और सैन्य कमांडर के तौर पर अपने आप को पेश कर अपने प्रभावों को बढ़ाने का काम किया। कांग्रेस की बैठक की तैयारी कर रहे वरिष्ठ अधिकारियों की एक सभा ने कहा कि, चीन के उदय के लिए उनकी केंद्रीय स्थिति को "निर्णायक महत्व" देना चाहिए। हाल के चीनी राजनीतिक इतिहास का अध्ययन करने वाले यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी सिडनी के एक एसोसिएट प्रोफेसर फेंग चोंग्यी ने कहा कि, "शी जिनपिंग यह दिखाना चाहते हैं, कि वह न केवल एक पार्टी नेता हैं, बल्कि चीन के लिए लगभग एक आध्यात्मिक द्रष्टा भी हैं, जो साहसी होने के साथ साथ दूरदर्शी राजनेता भी हैं।"

क्या नये उत्तराधिकारी की करेंगे घोषणा?
देश के तमाम बड़े पदाधिकारियों के झुके हुए गर्दन के बीच शान के बादल पर सवार शी जिनपिंग के सामने अब किसी भी तरह का कोई खतरा नहीं है, लिहाजा अब इन बातों के जवाब मिलने की उम्मीद न्यूनतम है, कि वह कब तक सत्ता में बनें रहेंगे, या वह कब अपने उत्तराधिकारी के नाम का ऐलान करेंगे, लिहाजा अब ये सवाल लंबे वक्त तक चीनी विरोधी खेमे के नेताओं, उद्योगपतियों और पार्टी के सदस्यों को परेशान करते रहेंगे। अधिकांश विशेषज्ञों का मानना है, कि वह अपने अधिकार को कम करने की किसी भी आशंका को लेकर सावधान हैं और इस कांग्रेस में उत्तराधिकारी नियुक्त नहीं करेंगे। वहीं, साल 2012 में जिन नेताओं ने शी जिनपिंग को राष्ट्रपति बनाने के लिए जोर-शोर के साथ उनके नाम का समर्थन किया, उनमें से ज्यादातर की मौत हो चुकी है, वो उद्योगपति, जिन्होंने उनके नाम की पैरवी की, उनमें से ज्यादातर अब जेल में हैं और कम्युनिस्ट पार्टी के बड़े नेता, जिन्होंने शी जिनपिंग को राष्ट्रपति बनाया, पिछले 10 सालों में उन्हें जबरन बारी बारी रिटायर्ड कर दिया गया।












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