हांगकांग पहुंचे शी जिनपिंग, इस खास वजह से यात्रा पर हैं चीनी राष्ट्रपति
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग आज हांगकांग पहुंचे हैं। जिनपिंग की यह यात्रा हांगकांग शहर को चीन को सौंपे जाने की 25 वीं वर्षगांठ के मद्देनजर है।
बीजिंग, 30 जूनः चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग आज हांगकांग पहुंचे हैं। जिनपिंग की यह यात्रा हांगकांग शहर को चीन को सौंपे जाने की 25 वीं वर्षगांठ के मद्देनजर है। जनवरी 2020 में कोरोना की लहर के बाद से चीनी राष्ट्रपति का देश की मुख्य भूमि के बाहर यह पहला दौरा है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक वे हांगकांग की छठी बार बनी सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में भी शामिल रहेंगे।

गर्मजोशी से किया गया स्वागत
अपनी दो दिवसीय यात्रा के लिए शी और उनकी पत्नी, पेंग लियुआन हांगकांग के वेस्ट कॉव्लून स्टेशन पर एक हाई स्पीड ट्रेन से उतरे जहां चीन और हांगकांग के झंडे लहराते हुए युवा लोगों और बच्चों द्वारा उनका स्वागत किया गया। इस दौरान पुलिस अधिकारियों ने सुरक्षा की दृष्टिकोण से पूरे स्टेशन को सील कर दिया था। बीते 29 महीनों से चीन में कैद शी जिनपिंग का यह दौरा करने का निर्णय पूर्व ब्रिटिश उपनिवेश पर उनके अधिकार के संकेत को रेखांकित करता है।

संक्षिप्त भाषण भी दिया
अपने आगमन पर एक संक्षिप्त भाषण में उन्होंने कहा कि हांगकांग ने एक के बाद एक गंभीर चुनौतियों का सामना किया है, औऱ एक के बाद एक खतरे से पार पाया है। एक बड़े आग के तूफान के बाद समृद्ध जीवन शक्ति दिखाते हुए हांगकांग ने राख से पुनर्जन्म लिया है। जिनपिंग की यह दो दिवसीय यात्रा है। जिसमें वह हांगकांग के अगले नेता जॉन ली के शपथ ग्रहण समारोह में भाग लेंगे।

शपथ ग्रहण समारोह में लेंगे हिस्सा
1 जुलाई को कैरी लैम की जगह जान ली हांगकांग के मुख्य नेता की शपथ लेंगे। एक पूर्व शीर्ष पुलिसकर्मी से सिविल सेवक बने ली ने 2019 में बड़े पैमाने पर लोकतंत्र समर्थक विरोध प्रदर्शनों के दौरान शहर की सुरक्षा नीतियों का निरीक्षण किया था। उन्हें चीन द्वारा उसके संप्रभु हितों के अनुरूप, एक राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत शहर पर एक मजबूत पकड़ बनाए रखने के लिए लाया गया है।

चीन के वफादार हैं ली
जान ली चीन के वफादर नेताओं में से एक माने जाते हैं। वे लोकतंत्र समर्थक आंदोलन के खिलाफ हो रही कार्रवाई पर नजर रखने वाले सुरक्षा प्रमुख भी थे। माना जा रहा है कि ली को सत्ता सौंपकर चीन ने इस शहर पर अपनी पकड़ कायम कर ली है। बता दें कि इसके लिए साल 2021 में हांगकांग के चुनावी नियमों में कई बड़े बदलाव किए गए थे, ताकि केवल बीजिंग के प्रति वफादार व्यक्ति को ही शहर की कमान मिल सके।

1997 में चीन को मिला हांगकांग
बता दें कि 156 साल के ब्रिटिश शासन के बाद 1 जुलाई 1997 को हांगकांग को चीन को सौंपा गया था। हांगकांग एक वैश्विक महानगर के साथ एक अंतरराष्ट्रीय वित्तीय केंद्र भी है। यह एक देश, दो नीति के तहत चल रहा है, जो ज्यादातर फैसले खुद करता है। हालांकि विदेशी मामलों और रक्षा का जिम्मा चीनी सरकार के पास है। चीन की सरकार ही असली मायनो में हांगकांग पर राज करती है।












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