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धरती के 'जन्नत' की दो खूबसूरत झील, क्यों सिकुड़ रही? NASA ने जारी की तस्वीर

यूएस जियोलॉजिकल सर्वे के डेटा में कश्मीर की दो खबसूरत झीलों में हाल के दिनों में आए बड़े बदलाव का पता चला है। नासा की ओर से किए गए डेटा एनालिसिस में एक अलग तथ्य सामने आए हैं।

नदी नालों समेत कई मैदानी इलाकों में भी बड़े बदलाव देखे गए। कई जियोलॉजिकल सर्वे रिपोर्ट्स से इसका पता चला। हाल ही में अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने सैटेलाइट से ली गई कश्मीर की एक तस्वीर जारी की है। इस तस्वीर से पता चला है कि दो प्रमुख झीलें सिकुड़ रही हैं। ये वो लेक हैं, जिनका खूबसूरती में कोई तोड़ नहीं। ये हैं वूलर और डल झील। लेकिन नासा ने तस्वीरों के जरिए दावा किया कि ये सिकुड़ रही हैं, यानी इन झीलों में पानी घट रहा है।

वुलर और डल झील ऐतिहासिक हैं। हिमालय के ग्लेशियरों के पिझलने के बाद इन झीलों का झेलम नदी के साथ जल प्रवाह में अहम योगदान है। जम्मू कश्मीर में ये पीने के पानी और खेतों की सिंचाई के प्रमुझ जल स्रोत के रूप में हैं। इन झीलों की खूबसूरत इस वजह से है क्योंकि ये हिमालय क्षेत्र की उच्च पर्वत श्रंखलाओं से घिरी हैं। घाटी में ये ऐतिहासिक झीलें काफी प्राचीन हैं। हाल के वर्षों में ये देखा गया कि मीठे पानी कि जम्मू और कश्मीर में मीठे पानी के झीलों का जलस्तर में गिरावट में आई है।

Wular Dal Lake shrinking

डल घाटी के सबसे बड़े शहर श्रीनगर के केंद्र में स्थित है। फ्लोटिंग हाउसबोट, बाजार और दलदल पर्यटकों को झील की ओर आकर्षित करते हैं। यह 16वीं और 17वीं शताब्दी में मुगल सम्राटों द्वारा स्थापित सीढ़ीदार बगीचों से घिरा हुआ है- जो फव्वारों से सुसज्जित हैं और विभिन्न प्रकार के फूलों, जड़ी-बूटियों और सुगंधित पौधों के साथ लगाए गए हैं।

छवि में बाईं ओर वुलर झील, भारत की सबसे बड़ी ताज़े पानी की झील है, और एशिया की सबसे बड़ी झीलों में से एक है। झेलम नदी के किनारे स्थित यह 17-वर्ग-मील (45-वर्ग-किलोमीटर) झील आस-पास के निवासियों को मछली और ताज़ा पानी उपलब्ध कराती है। कई आर्द्रभूमियाँ झील के किनारों पर स्थित हैं और प्रवासी पक्षियों, जैसे बत्तख, समुद्री पक्षी, गीज़ और सारस के आवास के रूप में काम करती हैं। जैव विविधता और आजीविका के लिए इसके महत्व के कारण, रामसर इंटरनेशनल ने 1990 में झील को "अंतर्राष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि" के रूप में नामित किया।

ऐसे में नासा के ऑपरेशनल लैंड इमेजर (OLI) ने लैंडसैट 8 से 23 जून, 2020 कश्मीर की कुछ तस्वीरें कैप्चर कीं। जिसमें वुलर और डल दिखी। तस्वीर को गौर से देखें तो नीचे दाएं हिस्से में दो जलाशय दिखाई दे रहे हैं। नासा की रिपोर्ट के मुताबिक वुलर झील वो है जिसके पूर्वी हिस्से की छवि में चमकीली हरी वनस्पति दिखाई देती है। पिछले कुछ दशकों में झील यूट्रोफिकेशन से प्रभावित है। ऐसे में इसमें बदलाव देखे जा रहे हैं।

वुलर झील के पूर्वी किनारे पर ग्रीन एरिया था, जो अब काफ कम रह गया है। इससे पहले 2022 के एक अध्ययन में भारत में शोधकर्ताओं ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के LISS-IV उपकरण के डेटा का उपयोग करते हुए पाया कि वुलर झील का खुला जल क्षेत्र 2008 और 2019 के बीच लगभग एक-चौथाई आकार में सिकुड़ गया था।

पक्के शहरी क्षेत्रों में वनों का रूपांतरण पानी की गुणवत्ता में बदलाव का एक प्रमुख चालक है। भूमि रूपांतरण ने भारी तलछट और पोषक तत्वों को झील में पहुँचाया है, और शहरी क्षेत्रों से अनुपचारित सीवेज ने भी योगदान दिया है। भारत में शोधकर्ताओं ने झील के जैविक स्वास्थ्य का आकलन करने के लिए लैंडसैट उपग्रहों से पानी के नमूने और डेटा का इस्तेमाल किया। उन्होंने पाया कि वुलर झील का लगभग 57 प्रतिशत 2018 में यूट्रोफिक था।

डल झील में भी ऐसा ही बदलाव देखा गया। श्रीनगर में शोधकर्ताओं ने पाया कि बेसिन का शहरी विकास इसकी बड़ी वजह है। उन्होंने दावा किया कि 1980 और 2018 के बीच झील का क्षेत्रफल 25 प्रतिशत तक सिकुड़ गया।

NASA ने जारी की दूसरी तस्वीर
एक अंतरिक्ष यात्री द्वारा 1 दिसंबर, 2021 को 70-मिमी फोकल लंबाई वाले Nikon D5 डिजिटल कैमरे का उपयोग करके ली थी। जिसे नासा ने 31 दिसंबर, 2022 को जारी किया। यह कश्मीर घाटी को धुंध में दिखाती है। जबकि दूसरी तस्वीर है नासा ने हाल के दिनों में कश्मीर की जारी की है।

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