WTO Meet: किसान, खाद्य सुरक्षा, मत्स्य उद्योग... विकसित देशों की आपत्ति के बाद भी क्यों सख्त है भारत?
भारत की तरफ से देश के वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे।
जेनेवा, जून 12: पांच सालों के बाद आखिरकार विश्व व्यापार संगठन यानि, डब्ल्यूटीओ की 12वीं मंत्रिस्तरीय बैठक होने जा रही है, जिसको लेकर भारत ने साफ कर दिया है, कि विकसित देशों की आपत्ति के बाद भी भारत अपनी मांग से पीछे नहीं हटेगा। स्विटजरलैंड के जिनेवा में पांच साल बाद होने जा रही है इस बैठक में भारत अपनी खाद्य सुरक्षा चिंताओं के स्थायी समाधान की वकालत करेगा और मत्य्स पालन और खाद्य सुरक्षा भारत के प्रमुख एजेंडे में शामिल होगा।

पीयूष गोयल कर रहे भारतीय टीम को लीड
भारत की तरफ से देश के वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। बैठक को लेकर वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने कहा कि, ‘देश में सभी हितधारकों के हितों की रक्षा करने के साथ-साथ विकासशील और गरीब देशों के हितों की रक्षा करने में भारत की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी है, जो विश्व व्यापार संगठन सहित बहुपक्षीय मंचों पर भारत के नेतृत्व की तरफ देखते हैं'।
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क्या होंगे WTO में प्रमुख मुद्दे?
इस साल होने जा रहे डब्ल्यूटीओ सम्मेलन में महामारी, मत्स्य पालन सब्सिडी वार्ता, खाद्य सुरक्षा के लिए सार्वजनिक स्टॉकहोल्डिंग सहित कृषि मुद्दे, विश्व व्यापार संगठन में सुधार और इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसमिशन पर सीमा शुल्क पर रोक, जैसे मुद्दों पर प्रमुख चर्चा होने के अलावा विश्व व्यापार संगठन की प्रतिक्रिया भी शामिल होगी। इससे पहले मई 2022 में विश्व व्यापार संगठन के महानिदेशक ने कृषि, व्यापार और खाद्य सुरक्षा पर तीन मसौदों को पेश किया था और विश्व खाद्य कार्यक्रम को बातचीत के लिए निर्यात प्रतिबंधों से छूट दी थी।

बैठक में भारत का जोर किस बात पर?
डब्ल्यूटीओ की होने वाली बैठक में भारत का जोर फूट सिक्योरिटी प्रोग्राम के लिए अनाज के स्टोरेज के मुद्दे पर स्थाई समाधान खोजने की तरफ सबसे प्रमुख जोर रहने वाला है। इसके साथ ही भारत मछाआरों की समस्या और उनके हितों की सुरक्षा के मुद्दे को भी मजबूती से उठाएगा। आपको बता दें कि, यूक्रेन संकट और कोविड महामारी के बीच होने वाली डब्ल्यूटीओ की ये बैठक ग्लोबल आर्थिक स्थिति की अनिश्चितताओं के बीच हो रही है।

डब्ल्यूटीओ को जानिए
विश्व व्यापार संगठन की पिछली बैठक साल 2017 में अर्जेंटीना में हुई थी और इस संगठन में विश्व के 164 देश शामिल हैं और मंत्रिस्तरीय बैठक में ही डब्ल्यूटीओ में तमाम बड़े फैसले लिए जाते हैं, जिसका आयोजन आज से जिनेवा में किया जा रहा है और अगले 15 जून तक चलेगा। इस बैठक में भारत का जोर फुट सिक्योरिटी के कार्यक्रमों के लिए पल्बिक स्टोरेज यानि पीएसएच के मुद्दे पर स्थाई समाधान पर होगी। दरअसल, पीएसएच कार्यक्रम एक नीतिगत उपाय होता है, जिसके तहत सरकार किसानों से गेहूं और चावल एमएसपी पर खरीदती है और फिर खाद्य पदार्थों का स्टोरेज कर उसे गरीबों के बीच बांटती है।

भारत के लिए क्यों मायने रखता है पीएसएच
एक्सपर्ट्स का कहना है कि, डब्ल्यूटीओ की बैठक में भारत विकसित देशों की आपत्ति के बाद भी एमएसपी पर कोई समझौता नहीं करेगा। दरअसल, पिछले कई सालों से दुनिया के कई विकसित देश भारत द्वारा दिए जाने वाले एमएसपी पर सवाल उठा रहे हैं और डब्ल्यूटीओ ने कृषि पर जो समझौता किया हुआ है, वो सरकार की एमएसपी पर अनाज खरीजने की क्षमता को कंट्रोल करता है। ग्लोबल ट्रेड लॉ के मुताबिक, जो भी देश डब्ल्यूटीओ के सदस्य हैं, वो फूड सब्सिडी खर्च 1986-88 के संदर्भ मूल्य पर आधारित प्रोडक्शन कॉस्ट से 10 फीसदी से ज्यादा एमएसपी नहीं दे सकते हैं, लिहाजा एमएसपी पर सरकार के हाथ बंध जाते हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, भारत चाहता है कि, विश्व व्यापार संगठन इस खरीदे गये अनाज को बेचने की भी इजाजत दे, लेकिन डब्ल्यूटीओ के विकसित देश इस स्टोरेज से अनाज निर्यात करने की इजाजत नहीं देते हैं।

क्या है इसका मतलब?
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, भारत विश्व खाद्य कार्यक्रम यानि डब्ल्यूएफपी के नियमों के तहत दुनिया में अनाज का निर्यात करने के लिए तैयार है, लेकिन भारत का कहना है कि, जो देश जरूरतमंद हैं, उनके हितों की सुरक्षा के लिए दोनों देशों के बीच सरकारी स्तर पर भी पल्बिक स्टॉक से अनाज बेचने की इजाजत होनी चाहिए। भारत का कहना है कि, डब्ल्यूएफ की जरिए अनाज निर्यात करने की प्रक्रिया काफी जटिल है, जिससे जरूरतमंद देशों को वक्त पर सही मदद नहीं मिल पाती है। एक सरकारी अधिकारी के मुताबिक, भारत इस मुद्दे को बैठक में काफी प्रमुखता से रखने वाला है।

मछुआरों के मुद्दे पर भी सख्त भारत
किसानों के अलावा भारत मछुआरों के मुद्दे पर भी काफी सख्ती से अपनी बात डब्ल्यूटीओ की बैठक में रखने जा रहा है। भारत सरकार के उच्चाधिकारियों के मुताबिक, बैठक में भारत मछुआरों के हितों से किसी भी तरह की कोई समझौता करने के मूड में नहीं है। दरअसल, बैठक में मछुआरों को दी जाने वाली सरकारी सब्सिडी खत्म करने की मांग की जाएगी, लेकिन भारत सरकार मछुआरों की दी जाने वाली सब्सिडी खत्म करने के फैसले से सहमत नहीं है और भारत का कहना है कि, दूसरे देशों के मुकाबले भारत पहले से ही अपने मछुआरों को कम सब्सिडी देता है, लिहाजा भारत इसे खत्म नहीं करेगा। भारत का कहना है कि, मछुआरों को सब्सिडी खत्म करने के बाद विकसित देशों को जो सब्सिडी दी जाती है, उसे खत्म कर दिया जाए।












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