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World Navy Ranking 2025: चीन-अमेरिका में कौन है समंदर का असली बॉस? टॉप-5 नेवी की लिस्ट से भारत बाहर

World Navy Ranking 2025: वर्ल्ड डायरेक्टरी ऑफ मॉडर्न वॉरशिप्स एंड सबमरीन (WDMMW) द्वारा जारी ताज़ा नौसेना रैंकिंग ने वैश्विक समुद्री शक्ति संतुलन पर नई बहस छेड़ दी है। 40 देशों को शामिल करने वाली यह सूची केवल युद्धपोतों की संख्या नहीं, बल्कि तकनीकी क्षमता, ऑपरेशनल दक्षता, लॉजिस्टिक्स और युद्ध तैयारी जैसे व्यापक मानकों पर आधारित है।

एशिया में बढ़ते समुद्री तनाव के बीच भारत, चीन और पाकिस्तान की स्थिति विशेष चर्चा में है। ऐसे परिदृश्य में भारत का टॉप-5 में स्थान न बना पाना रणनीतिक विश्लेषकों को चौंकाता है और देश की दीर्घकालिक समुद्री रणनीति पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।

US Internal Crisis

Indian Navy ranking: दुनिया की टॉप-5 नौसेनाएं

WDMMW की नई नौसेना रैंकिंग में समुद्री शक्ति का वैश्विक संतुलन साफ़ झलकता है। अमेरिका ने एक बार फिर शीर्ष स्थान हासिल करते हुए अपनी बादशाहत कायम रखी है, जहां उसके 11 परमाणु ऊर्जा से चलने वाले एयरक्राफ्ट कैरियर उसे दुनिया भर के महासागरों में निर्णायक बढ़त देते हैं। दूसरे नंबर पर चीन है, जिसकी नौसेना को भविष्य की सबसे प्रभावशाली समुद्री ताकत के रूप में देखा जा रहा है। तीसरे स्थान पर रूस मौजूद है, जो अपनी परमाणु पनडुब्बियों और अत्याधुनिक एंटी-शिप मिसाइल क्षमताओं के लिए जाना जाता है। हैरानी की बात यह है कि चौथे पायदान पर इंडोनेशिया और पांचवें स्थान पर दक्षिण कोरिया ने अपनी आधुनिक, तकनीक-प्रधान नौसेनाओं के दम पर सबको चौंका दिया है।

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भारतीय नौसेना को मिला 7वां स्थान

भारतीय नौसेना को दुनिया की सबसे प्रभावशाली समुद्री ताकतों में गिना जाता है। हालिया वैश्विक नौसेना रैंकिंग में भले ही भारत को 7वां स्थान मिला हो, लेकिन हिंद महासागर क्षेत्र में उसकी रणनीतिक मौजूदगी बेहद मजबूत है। आधुनिक युद्धपोतों, एयरक्राफ्ट कैरियर, पनडुब्बियों और अनुभवी मानव संसाधन के दम पर भारतीय नौसेना समुद्री सुरक्षा, व्यापारिक मार्गों की रक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने में अहम भूमिका निभा रही है।

भारत के पास 19 पनडुब्बियां

भारत के पास 19 पनडुब्बियां हैं, जो समुद्र की गहराई में छिपकर दुश्मन पर नजर रखती हैं और हमला करती हैं। इसके अलावा 74 फ्लीट कोर जहाज (जैसे डिस्ट्रॉयर और फ्रिगेट) हैं, जो मिसाइलों और रडार से लैस हैं। ये जहाज सीमाओं की रक्षा करने और समुद्री डाकुओं से व्यापारिक जहाजों को बचाने में अहम भूमिका निभाते हैं।

वहीं भारत के पास वर्तमान में दो एयरक्राफ्ट कैरियर हैं: INS विक्रमादित्य और स्वदेशी रूप से निर्मित INS विक्रांत। ये जहाज समुद्र के बीचों-बीच एक चलते-फिरते एयरबेस की तरह काम करते हैं, जिससे भारतीय फाइटर जेट्स गहरे समुद्र में भी दुश्मन पर हमला कर सकते हैं। दुनिया में बहुत कम देशों के पास एक से अधिक एयरक्राफ्ट कैरियर हैं।

एम्फीबियस असॉल्ट यूनिट्स: जमीन और पानी दोनों पर हमला

नौसेना के पास 5 एम्फीबियस असॉल्ट यूनिट्स हैं। ये विशेष जहाज और सैनिक हैं जो समुद्र के रास्ते दुश्मन के तट पर उतरकर सीधे जमीन पर हमला करने की क्षमता रखते हैं। आपदा के समय राहत सामग्री पहुँचाने में भी इनका बड़ा योगदान होता है।

टॉप-5 से बाहर रहने का कारण

भारत का 7वें स्थान पर रहना उसकी कमज़ोरी नहीं, बल्कि अन्य देशों की तुलना में जहाजों की संख्या और तकनीकी रिप्लेसमेंट की गति को दर्शाता है। अमेरिका, चीन और रूस जैसे देशों के पास पनडुब्बियों और परमाणु संचालित जहाजों की संख्या भारत से काफी अधिक है। भारत अभी अपनी पुरानी पनडुब्बियों को बदलने और तीसरी विमानवाहक पोत की योजना पर काम कर रहा है।

चीन और रूस की नौसैनिक बढ़त

चीन की नौसेना तेजी से विस्तार और आधुनिकीकरण के कारण दूसरे स्थान पर पहुंच चुकी है। WDMMW का मानना है कि आने वाले समय में चीन अमेरिका को भी पीछे छोड़ सकता है। वहीं रूस की नौसेना भले ही तीसरे स्थान पर हो, लेकिन उसकी असली ताकत परमाणु हथियारों से लैस पनडुब्बियों और लंबी दूरी की मिसाइल प्रणालियों में है। ये दोनों देश वैश्विक समुद्री शक्ति संतुलन को प्रभावित कर रहे हैं।

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पाकिस्तान की नौसेना और तुलना

पाकिस्तान की नौसेना इस सूची में 26वें स्थान पर है। उसके पास फिलहाल कोई एयरक्राफ्ट कैरियर नहीं है, लेकिन 8 पनडुब्बियां और 28 फ्लीट कोर जहाज जरूर हैं। भारत की तुलना में पाकिस्तान की नौसैनिक क्षमता सीमित मानी जाती है। हालांकि, क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों में उसकी भूमिका पूरी तरह नजरअंदाज नहीं की जा सकती। कुल मिलाकर यह रैंकिंग दक्षिण एशिया में समुद्री शक्ति संतुलन को स्पष्ट रूप से दर्शाती है।

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