Pakistan Navy: पाक को तुर्किये से मिला दूसरा हाई-टेक MILGEM वॉरशिप, समुद्र में भारत के लिए कितनी बड़ी चुनौती?
Pakistan Navy: तुर्किये और पाकिस्तान (Turkiye Pakistan Defence) के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग के तहत एक अहम कदम उठाया गया है। तुर्किये ने पाकिस्तान नौसेना को दूसरा MILGEM श्रेणी का युद्धपोत सौंप दिया है। यह युद्धपोत ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी (ToT) समझौते के तहत तैयार किया गया है, जिससे दोनों देशों के बीच रणनीतिक और सैन्य संबंधों को और मजबूती मिली है।
पाकिस्तान नौसेना को सौंपे गए इस युद्धपोत का नाम PNS खैबर (Khaibar) रखा गया है। इसका कमीशनिंग समारोह तुर्किये के इस्तांबुल नेवल शिपयार्ड में आयोजित किया गया।

इस मौके पर तुर्किये के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोआन और पाकिस्तान के नौसेना प्रमुख एडमिरल नवेद अशरफ भी मौजूद रहे। पाकिस्तान सेना की मीडिया विंग (ISPR) ने एक बयान जारी कर इस कार्यक्रम की जानकारी दी। विस्तार से जानिए पड़ोसी देश का यह वॉरशिप कितना और क्यों खास है इससे भारत पर क्या असर पड़ेगा...
क्या है MILGEM Warship परियोजना?
MILGEM तुर्किये की एक महत्वाकांक्षी युद्धपोत परियोजना है, जिसका उद्देश्य आधुनिक, बहुउद्देश्यीय और अत्याधुनिक तकनीक से लैस युद्धपोत विकसित करना है। इन जहाजों को खासतौर पर पनडुब्बी रोधी अभियान (Anti-Submarine Warfare), समुद्री निगरानी, एस्कॉर्ट ड्यूटी, वायु रक्षा, और समुद्री सुरक्षा जैसे मिशनों के लिए डिजाइन किया गया है। MILGEM युद्धपोत मध्यम आकार के, तेज रफ्तार और अत्यधिक फुर्तीले माने जाते हैं, जो आधुनिक नौसैनिक जरूरतों के अनुरूप हैं।
चार युद्धपोतों का समझौता
तुर्किये और पाकिस्तान के बीच हुए समझौते के तहत कुल चार MILGEM कॉर्वेट पाकिस्तान नौसेना के बेड़े में शामिल किए जाने हैं। पहला युद्धपोत PNS बाबर पाकिस्तान को वर्ष 2023 में सौंपा गया था। दूसरा युद्धपोत PNS खैबर अब तुर्किये में तैयार होकर पाकिस्तान को सौंपा गया है।
बाकी के दो युद्धपोत पाकिस्तान में ही बनाए जा रहे हैं, जो ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी के तहत बनाए जा रहे हैं। इससे पाकिस्तान की घरेलू जहाज निर्माण क्षमता को भी बढ़ावा मिल रहा है। बता दें कि, 1971 में ऑपरेशन ट्राइडेंट के दौरान भारतीय मिसाइल बोट्स ने एक PNS Khaibar डुबो दिया था। तब से लेकर अब तक इस नाम से कोई PNS नहीं था।
अत्याधुनिक तकनीक से लैस
पाकिस्तान सेना की मीडिया विंग के अनुसार, PN MILGEM जहाज पाकिस्तान नौसेना के सबसे आधुनिक सतही युद्धपोत हैं। ये अत्याधुनिक कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम, आधुनिक हथियारों और उन्नत सेंसर से लैस हैं। इन जहाजों से पाकिस्तान नौसेना की समुद्री निगरानी, रक्षा क्षमता और ऑपरेशनल ताकत में उल्लेखनीय इजाफा होगा।
भारत के लिए कितना बड़ा खतरा?
तुर्किये से मिले नए MILGEM श्रेणी के युद्धपोतों के बाद पाकिस्तान की नौसैनिक क्षमता जरूर बढ़ी है, लेकिन भारत की समुद्री सुरक्षा के लिहाज से इसे किसी बड़े या निर्णायक खतरे के रूप में नहीं देखा जा रहा। पाकिस्तान पहले से ही हिंद महासागर में अपनी शक्ति बढ़ाने के लिए चीन और तुर्किए से ऐसे रक्षा सौदा करते आया है। विशेषज्ञों के मुताबिक, MILGEM युद्धपोत मध्यम श्रेणी (Medium-Class Corvettes) में आते हैं। ये आधुनिक जरूर हैं, लेकिन इनकी क्षमताएं ऐसी नहीं हैं कि वे भारतीय नौसेना के लिए गंभीर चुनौती बन सकें।
भारतीय रडार के आगे टिकना मुश्किल
भारत के पास पहले से ही अत्याधुनिक समुद्री निगरानी रडार सिस्टम, सैटेलाइट सर्विलांस और P-8I जैसे समुद्री टोही विमान मौजूद हैं। ऐसे में MILGEM जैसे कार्वेट को ट्रैक करना भारतीय नौसेना के लिए अपेक्षाकृत आसान होगा। भारतीय नौसेना के पास पहले से ही कई अधिक मारक क्षमता वाले हथियार मौजूद हैं जिसमें-
- एडवांस्ड डिस्ट्रॉयर (Destroyers)
- स्टेल्थ फ्रिगेट्स
- न्यूक्लियर और पारंपरिक पनडुब्बियां
जो किसी भी मध्यम श्रेणी के युद्धपोत को कम समय में निष्क्रिय करने की क्षमता रखते हैं। ब्रह्मोस जैसी सुपरसोनिक मिसाइलों और आधुनिक टॉरपीडो सिस्टम के सामने MILGEM कार्वेट की सीमाएं साफ नजर आती हैं। रक्षा जानकार मानते हैं कि तुर्किये से मिले ये युद्धपोत पाकिस्तान की समुद्री मौजूदगी को जरूर मजबूत करते हैं, लेकिन हिंद महासागर क्षेत्र में शक्ति संतुलन को भारत के खिलाफ मोड़ने की स्थिति में नहीं हैं।












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