Indian Navy: 'मन की बात' में PM मोदी ने जिस INS माहे की बात की, वो क्यों है दुश्मन की पनडुब्बियों का काल?
INS Mahe Indian Navy: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'मन की बात' कार्यक्रम के 128वें एपिसोड में INS 'माहे' को भारतीय नौसेना में शामिल किए जाने का जिक्र किया, जिसने देश की समुद्री सुरक्षा क्षमताओं में बड़ा इजाफा किया है। भारतीय नौसेना ने सोमवार को एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट INS-माहे को अपने बेड़े में शामिल किया है, जिसे दुश्मन की पनडुब्बियों का काल कहा जाता है।
यह 78 मीटर लंबा जंगी बेड़ा 80% से अधिक स्वदेशी सामग्री से बना है, जो 'आत्मनिर्भर भारत' का प्रतीक है। INS माहे कोचीन शिपयार्ड में निर्मित हुआ है और अब पश्चिमी समुद्र तट पर 'साइलेंट हंटर' के रूप में काम करेगा।

पीएम मोदी ने 'मन की बात' में किया जिक्र
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (30 नवंबर) को 'मन की बात' कार्यक्रम के 128वें एपिसोड में INS 'माहे' के भारतीय नौसेना में शामिल होने का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि नवंबर का महीना भारत के लिए कई ऐतिहासिक उपलब्धियों से भरा रहा। 26 नवंबर को संविधान दिवस के साथ ही, INS माहे का नौसेना में शामिल होना देश की समुद्री सुरक्षा क्षमताओं में वृद्धि का प्रतीक है। पीएम मोदी का यह जिक्र देश की बढ़ती सैन्य आत्मनिर्भरता और समुद्री सीमाओं की सुरक्षा के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिससे देश को प्रेरणा मिलती है।
PM Modi Mann Ki Baat: भारतीय नौसेना की बढ़ी ताकत
भारतीय नौसेना ने सोमवार को एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट INS-माहे को अपने बेड़े में शामिल कर लिया। आर्मी चीफ उपेंद्र द्विवेदी की उपस्थिति में हुई इस कमीशनिंग के बाद भारतीय नौसेना की ताकत में बड़ा इजाफा हो गया है। INS माहे को दुश्मन की पनडुब्बियों का काल कहा जाता है, जिससे यह उथले समुद्री इलाकों में पनडुब्बियों को खोजकर, निगरानी करके और नष्ट करके भारत की तटीय सुरक्षा को मजबूत करेगा। यह नौसेना को समुद्री प्रभुत्व सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
80% से अधिक स्वदेशी सामग्री का प्रयोग
INS माहे का कमीशन होना कम पानी में लड़ने वाले देसी जहाजों की एक नई पीढ़ी का प्रतीक है। यह युद्धपोत 80% से अधिक स्वदेशी सामग्री के साथ डिजाइन, निर्मित और एकीकृत किया गया है, जो 'आत्मनिर्भर भारत' की दिशा में भारत की बढ़ती महारत को दर्शाता है। इसे पश्चिमी समुद्र तट पर एक 'साइलेंट हंटर' के तौर पर तैनात किया जाएगा, जो भारत की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा के लिए समर्पित होगा। यह परियोजना देश की रक्षा क्षमताओं में आत्मनिर्भरता के एक नए युग की शुरुआत करती है।
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INS माहे की खास खूबियां
INS माहे, एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट कैटेगरी का पहला युद्धपोत है, जिसे कोचीन शिपयार्ड में बनाया गया है। 78 मीटर लंबा यह जंगी बेड़ा आधुनिक सोनार सिस्टम से लैस है, जो दुश्मन की पनडुब्बियों का पीछा करके उन्हें बर्बाद करने में सक्षम है। इसे विशेष रूप से उथले समुद्री इलाकों में दुश्मन की पनडुब्बियों को खोजने, निगरानी करने और उन पर हमला करने के लिए डिजाइन किया गया है। यह एक साथ कई मिशनों को अंजाम दे सकता है, जिससे भारतीय नौसेना की बहुमुखी क्षमता बढ़ती है।
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नवाचार और सेवा की भावना का प्रतीक: जनरल द्विवेदी
INS माहे के कमीशनिंग पर, जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने इसे नवाचार और सेवा की भावना का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि यह भारतीय नौसेना की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि करेगा, जिससे समुद्र के निकट प्रभुत्व सुनिश्चित होगा और तटीय सुरक्षा ग्रिड मजबूत होगा। द्विवेदी ने जोर दिया कि यह 'नेवी के बिल्डर्स नेवी' में दृढ़ परिवर्तन की पुष्टि करता है, जहां 75% से अधिक पूंजी अधिग्रहण स्वदेशी रूप से होता है। यह भारतीय शिपयार्डों की तकनीकी प्रभुत्व और देश की रक्षा आत्मनिर्भरता का प्रमाण है।
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