World Military Spending:अमेरिका ने $877 अरब, तो चीन ने खर्च किए $292 अरब.. वैश्विक सैन्य खर्च ने तोड़े रिकॉर्ड
स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट में कहा गया है, कि हथियारों की होड़ ने दुनिया को फिर से खतरे में डाल दिया है और छोटे से लेकर बड़े देश तक... अपना सैन्य खर्च बढ़ा रहे हैं।

World Military Spending 2023: दुनिया में होने वाले सैन्य खर्च ने अभी तक के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। प्रमुख मिलिट्री थिंक टैंक की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2022 में विश्व सैन्य खर्च 2.24 ट्रिलियन डॉलर यानि, करीब 183 लाख करोड़ के उच्च स्तर पर पहुंच गया है। रिपोर्ट में कहा गया है, कि यूक्रेन पर रूस के आक्रमण ने पूरे यूरोप में सैन्य खर्च में भारी उछाल ला दिया है।
स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (एसआईपीआरआई), जिसे सिप्री कहा जाता है, उसने वैश्विक सैन्य खर्च पर अपनी वार्षिक रिपोर्ट में सोमवार को कहा है, कि वैश्विक खर्च लगातार आठवें साल भी रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ा है।
यूरोप का सैन्य खर्च बढ़ा
सिप्री की रिपोर्ट में कहा गया है, कि यूरोप में सैन्य खर्च में 13 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जो पिछले 30 सालों में सबसे ज्यादा है। यानि साफ है, कि यूक्रेन पर रूस के आक्रमण ने यूरोप को डरा दिया है और यूरोप अपनी रक्षा के लिए सैन्य खर्च में दूसरे विश्वयुद्ध के बाद पहली बार, इजाफा करने को मजबूर हुआ है।
SIPRI ने कहा, कि इसका अधिकांश हिस्सा रूस और यूक्रेन से जुड़ा हुआ है, लेकिन अन्य देशों ने भी कथित रूसी खतरों के जवाब में सैन्य खर्च बढ़ा दिया है।
SIPRI के सैन्य व्यय और शस्त्र उत्पादन कार्यक्रम के वरिष्ठ शोधकर्ता नान तियान ने कहा, कि "हाल के वर्षों में वैश्विक सैन्य खर्च में लगातार वृद्धि इस बात का संकेत है, कि हम एक तेजी से असुरक्षित हो रही दुनिया में रह रहे हैं।" उन्होंने कहा, कि "दुनिया के देश बिगड़ते सुरक्षा माहौल के जवाब में अपनी सैन्य ताकत बढ़ा रहे हैं, जिसे वे निकट भविष्य में सुधार की उम्मीद से नहीं देख रहे हैं।"
मास्को ने साल 2014 में यूक्रेन के क्रीमिया प्रायद्वीप पर आक्रमण किया और उसपर कब्जा कर लिया, लेकिन 2014 में यूक्रेन पर पूरी तरह से आक्रमण करने से पहले रूस, यूक्रेन के अलगाववाद बहुल क्षेत्र में रहने वाले रूस समर्थक विद्रोहियों को लगातार समर्थन करता रहा।
SIPRI के मुताबिक, रूस के यूक्रेन पर आक्रमण ने दुनिया के सभी देशों को डरा दिया है और सुरक्षा को लेकर अलार्म बजा दिया है। खासकर, रूस के पड़ोसी देशों ने भारी संख्या में अपना सैन्य खर्च बढ़ाना शुरू कर दिया है। रिपोर्ट से पता चलता है, कि रूस के पड़ोसी देश फिनलैंड, जो इसी महीने नाटो का सदस्य भी बन गया है, उसने अपने सैन्य खर्च में साल 2022 में 36 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है। वहीं, लिथुआनिया का सैन्य खर्च 27 प्रतिशत बढ़ गया है।
इसी साल अप्रैल महीने में, फ़िनलैंड, जिसकी रूस के साथ सीमा लगभग 1,340 किमी तक फैली हुई है, वो नाटो का 31वां सदस्य बना है। वहीं, जिसकी विदेश नीति न्यूट्रल रही है, वो भी नाटो का सदस्य बनने के लिए हाथ पैर मार रहा है और सैन्य गठबंधन का हिस्सा बनना चाहता है।
अमेरिका सबसे ज्यादा खर्च करने वाला देश
SIPRI के सैन्य खर्च और शस्त्र उत्पादन कार्यक्रम के शोधकर्ता लोरेंजो स्काराज़ातो ने कहा, कि "फरवरी 2022 में यूक्रेन पर पूर्ण पैमाने पर हुए आक्रमण ने निश्चित रूप से 2022 में सैन्य खर्च के फैसलों को प्रभावित किया है। रूसी आक्रामकता के बारे में चिंताएं बहुत लंबे समय से बनी हुई हैं।" उन्होंने कहा, कि "कई पूर्व पूर्वी ब्लॉक के राज्यों ने 2014 के बाद से अपने सैन्य खर्च को दोगुना से भी ज्यादा बढ़ा दिया है, जब रूस ने क्रीमिया पर कब्जा कर लिया था।"
थिंक टैंक ने कहा, कि यूक्रेन में सैन्य खर्च 2022 में छह गुना से अधिक बढ़कर 44 अरब डॉलर हो गया है, जो कि SIPRI के आंकड़ों में दर्ज किसी भी देश के सैन्य खर्च में सबसे ज्यादा एक साल में हुई वृद्धि है। यूक्रेन के जीडीपी में सैन्य खर्च अब 34 प्रतिशत हो गया है, जबकि ठीक एक साल पहले तक यूक्रेन का सैन्य खर्च उसकी जीडीपी का सिर्फ 3.2 प्रतिशत था।
इस सैन्य खर्च बढ़ोतरी का, और दुनिया में हथियार खरीदने और बनाने में लगी होड़ का सबसे बड़ा फायदा अमेरिका को हुआ है, जिसकी हथियार कंपनियां दनादन हथियार बना रहे हैं और सप्लाई कर रहे हैं।
SIPRI के अनुसार, रूसी सैन्य खर्च 2022 में अनुमानित 9.2 प्रतिशत बढ़कर लगभग 86.4 अरब डॉलर हो गया है। यह रूस के 2022 के जीडीपी के 4.1 प्रतिशत के बराबर है, जो 2021 में 3.7 प्रतिशत से थोड़ा ज्यादा था।
संयुक्त राज्य अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा सैन्य खर्च करने वाला देश बना हुआ है, जिसका सैन्य खर्च 2021 के मुकाबले 2022 में 0.7 प्रतिशत बढ़ा है। साल 2022 में अमेरिका का सैन्य खर्च 877 अरब डॉलर हो गया है, जो कि वैश्विक सैन्य खर्च का 39 प्रतिशत है। SIPRI के नान तियान ने कहा, कि यह वृद्धि काफी हद तक "यूक्रेन को प्रदान की गई वित्तीय सैन्य सहायता के अभूतपूर्व स्तर" से प्रेरित है।
थिंक टैंक के अनुसार, यूक्रेन को अमेरिकी वित्तीय सैन्य सहायता 2022 में कुल 19.9 बिलियन डॉलर है।
चीन भी सैन्य खर्च में टॉप पर
वहीं, साल 2022 में चीन ने अनुमानित तौर पर 292 अरब डॉलर का सैन्य खर्च किया और अमेरिका के बाद दुनिया में दूसरे नंबर पर बना हुआ है। चीन का सैन्य खर्च साल 2021 के मुकाबले, 2022 में 4.2 प्रतिशत ज्यादा बढ़ गया है और ये लगातार 28वां साल है, जब चीन का सैन्य खर्च बढ़ा है।
इस बीच, जापान ने 2022 में सेना पर 46 अरब डॉलर खर्च किया है, जो 2021 की तुलना में 5.9 प्रतिशत ज्यादा है। SIPRI ने कहा, कि यह 1960 के बाद से जापानी सैन्य खर्च में आया उच्चतम स्तर है।
वहीं, साल 2022 में भारत का सैन्य खर्च 81.4 अरब डॉलर यानि 6 लाख करोड़ हो गया है, जो दुनिया में चौथा सबसे ज्यादा सैन्य खर्च करने वाला देश बन गया। यह 2021 के मुकाबले 6.0 फीसदी ज्यादा था। वहीं, चीन से मुकाबला करें, तो भारत के मुकाबले चीन का खर्च चार गुना ज्यादा है और चीन ने 24 लाख करोड़ अपनी सेना पर खर्च किए हैं।
ताइवान के स्वशासित द्वीप को लेकर पूर्वी एशिया में तनाव बढ़ गया है, जिसे बीजिंग अपने क्षेत्र का हिस्सा मानता है। चीन लगभग पूरे दक्षिण चीन सागर पर भी दावा करता है, जो एक प्रमुख समुद्री व्यापारिक मार्ग है, जिसके कुछ हिस्सों पर फिलीपींस, वियतनाम और मलेशिया सहित देशों का भी हिस्सा है। इसके अलावा, जापान और चीन सेनकाकू और दियाओयू द्वीप समूह के विवाद में भी उलझे हुए हैं, जो ताइवान के उत्तर-पूर्व में स्थित है।
वहीं, उत्तरी क्षेत्रों को लेकर टोक्यो का मॉस्को के साथ भी लंबे समय से विवाद चल रहा है, जो होक्काइडो के उत्तर-पूर्व में स्थित है और द्वितीय विश्व युद्ध के अंत में सोवियत संघ द्वारा जब्त कर लिया गया था। रूस उन्हें कुरील द्वीप कहता है। लिहाजा, इन क्षेत्रों में भी सैन्य तनाव बढ़ा है, लिहाजा सैन्य खर्च और बढ़ गया है।
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