महिलाएं बेच रही हैं अपना दूध, बढ़ा विवाद
पिछले दो सालों से दर्जनों महिलाएं अपने स्तन का बचा दूध अंब्रोसिया लैब नाम की कंपनी से बेच रही थीं. कंपनी दूध का प्रोसेसिंग कर अमरीका में बेचती थी.
कंबोडिया की कई माताएं अपना दूध अमरीकी महिलाओं के लिए बेच रही हैं. इसे लेकर काफ़ी विवाद हुआ और बाद में प्रतिबंध लगा दिया गया. इसे लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं कि क्या इन महिलाओं का शोषण हुआ या फिर ऐसा करना उनके हक़ में था.
आख़िर कंबोडिया में हुआ क्या?
पिछले दो सालों से दर्जनों महिलाएं अपने स्तन का बचा दूध अंब्रोसिया लैब नाम की कंपनी से बेच रही थीं. कंपनी दूध का प्रोसेसिंग कर अमरीका में बेचती थी. अमरीका में वे महिलाएं इस दूध को ख़रीदती थीं जो अपने बच्चों के लिए दूध उत्पन्न करने में सक्षम नहीं थीं.
मंगलवार को कंबोडिया ने ब्रेस्ट मिल्क के निर्यात पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया. इसके साथ ही इस व्यापार पर विराम लग गया है.
यह साफ़ नहीं है कि इस पर अभी क्यों कार्रवाई की गई. हालांकि हाल ही में अन्य कई विवादित गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाया गया है. इसमें मानव अंगों की तस्करी और किराए की कोख भी शामिल है.
'दूध बैंक' पूरी कर रहा है मां के दूध की कमी
इससे पहले स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा था कि मानव अंगों के उत्पादों के व्यापार की जांच की जा रही है. कई देश दूध का बैंक चलाते हैं. इन बैंकों में महिलाएं स्वेच्छा से ज़रूरतमंद बच्चों के लिए दूध दान करती हैं.
ब्रेस्ट मिल्क वेबसाइट के ज़रिए और निजी नेटवर्क से भी ब्रेस्ट मिल्क ख़रीदा जा सकता है. कई देशों में पाबंदी के बावजूद यह इंडस्ट्री खूब फल-फूल रही है.
यह मामला विवादित क्यों हुआ?
चिल्ड्रेन्स चैरिटी यूनिसेफ का कहना है कि यह एक तरह का शोषण है. यूनिसेफ का कहना है कि ग़रीब महिलाएं फ़ायदे के लिए ऐसा कर रही हैं.
यूनिसेफ ने कहा कि ब्रेस्ट मिल्क का व्यापारीकरण नहीं किया जाना चाहिए. अंब्रोसिया की एक दुकान कंबोडिया की राजधानी के पास है. यह इलाक़ा काफ़ी ग़रीब है. यहीं पर यह दुकान महिलाओं से संपर्क साधता था.
ख़बरों के मुताबिक़ अंब्रोसिया 28 एमएल दूध के लिए 0.50 डॉलर भुगतान करती है. हालांकि अमरीका में यह दूध आठ गुना ज़्यादा कीमत पर बेचा जाता है.
आलोचकों का कहना है कि इस चलन से उन माताओं को प्रोत्साहन मिल रहा था जो अपने बच्चे होने के बावजूद दूध बेच रही थीं.
मेडिकल एन्थ्रोपॉलोजिस्ट अंचली पाल्मकिस्ट का कहना है, ''महिलाओं को औंस के रूप में भुगतान किया जाता है, ऐसे में महिलाओं पर दबाव रहता है कि वे दूध उत्पन्न करें. जब आप प्राइस टैग दिखाते हैं तो लोगों को लुभा रहे होते हैं.'' उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में महिलाओं को ठीक से सूचित भी नहीं किया जाता है.
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