आजादी के बाद पाकिस्तान में ही छूट गईं थी सिख महिला, 75 सालों बाद परिवार से मिलीं, हर कोई हुआ इमोशनल
1947 में जब भारत और पाकिस्तान विभाजन हुआ था, उस वक्त कई ऐसे परिवार थे जो अपनों से बिछड़ गए। भारत के आजादी के 75 साल बाद बहन अपने खोए हुए भाइयों से मिली। मुमताज बीबी के पिता इकबाल ने बताया कि वह मुसलमान नहीं, सिख परिवार
करतारपुर, 18 मई : करतारपुर साहिब (kartarpur sahib) ने असंख्य परिवार को एक दूसरे से मिलवाया है। ऐसी ही एक घटना है जहां पाकिस्तान की एक मुस्लिम महिला भारत में रहने वाले सिख भाई से 75 साल बाद मिलीं। विभाजन के समय, मुमताज बीबी छोटी सी बच्ची थीं। हिंसा के वक्त हिंसक भीड़ ने उनकी मां को मार डाला था और वह शव के पास फफक-फफक कर रो रही थी। उस वक्त एक दंपती ने वहां पहुंचकर उसे अपना नाम दिया।

बड़ी लाड़ प्यार से पाला मुमताज को
मोहम्मद इकबाल और उनकी पत्नी अल्लाह राखी ने रोते हुए बच्ची को अपनाया और उसे बड़ी लाड़ प्यार से पाला। दोनों ने बच्ची का नाम रखा मुमताज बीबी। इकबाल अपनी पत्नी और बेटी (गोद ली हुई) को लेकर विभाजन के बाद शेखपुरा जिले के वरिका तियान गांव में बस गए।
इकबाल ने कहा, तुम मेरी बेटी नहीं हो..
इकबाल और उसकी पत्नी ने मुमताज को कभी यह नहीं बताया कि वह उनकी बेटी नहीं है। दो साल पहले, इकबाल की तबीयत अचानक बिगड़ गई और उसने मुमताज से कहा कि वह उसकी असली बेटी नहीं थी और उसका असली परिवार सिख था। इकबाल की मौत के बाद मुमताज और उनके बेटे शाहबाज ने सोशल मीडिया के जरिए उनके परिवार की तलाश शुरू कर दी। वे मुमताज़ के असली पिता का नाम और भारतीय पंजाब के पटियाला जिले के गांव (सिदराना) को जानते थे जहां वे अपने पैतृक घर को छोड़ने के लिए मजबूर होने के बाद बस गए थे। सोशल मीडिया के जरिए दोनों परिवार फिर से जुड़ गए।
बहन अपने भाईयों से 75 साल बाद मिली
मुमताज के भाई सरदार गुरुमीत सिंह, सरदार नरेंद्र सिंह और सरदार अमरिंदर सिंह परिवार के सदस्यों के साथ करतारपुर स्थित गुरुद्वारा दरबार साहिब पहुंचे। मुमताज अपने परिवार के अन्य सदस्यों के साथ वहां पहुंचीं और 75 साल बाद अपने खोए हुए भाइयों से मिलीं।












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