विवेक रामास्वामी राष्ट्रपति बनेंगे या उप-राष्ट्रपति? रिपब्लिकन पार्टी के बाकी उम्मीदवार कैसे पड़ गये हैं फीके
Who is Vivek Ramaswamy: विवेक रामास्वामी अमेरिका अगले डोनाल्ड ट्रम्प बनना चाहते हैं, एक 'बाहरी' व्यक्ति जो संयुक्त राज्य अमेरिका के राजनीतिक प्रतिष्ठान के शीर्ष पर पहुंचना चाहता है और अमेरिका के वामपंथी जमात का आरोप है, कि अगर विवेक रामास्वामी जीतते हैं, राष्ट्रपति बनते हैं, तो ओवल ऑफिस से एक कट्टर-दक्षिणपंथी एजेंडे को आगे बढ़ाया जाएगा।
विवेक रामास्वामी ने इस महीने ब्रिटिश अभिनेता और पॉडकास्ट होस्ट रसेल ब्रांड के साथ एक इंटरव्यू में पूर्व राष्ट्रपति के बारे में कहा, कि "मैं 2015 में ट्रम्प के मुकाबले, आज के डोनाल्ड ट्रम्प के समान हूं।"

ब्रांड ने मजाक में जवाब दिया, कि "ट्रम्प से भी ट्रम्पर, ट्रम्पनेस पर ट्रम्प को पछाड़ना।"
दो हफ्ते बाद, रामास्वामी 2024 के राष्ट्रपति चुनाव सीज़न की पहली रिपब्लिकन बहस में ट्रम्प जैसा प्रदर्शन देंगे - विरोधियों को चेतावनी देंगे, हमलों का आनंद लेंगे और अपरंपरागत नीति प्रस्तावों को आगे बढ़ाएंगे।
और इस इंटरव्यू के दो हफ्ते बाद जब रिपब्लिकन पार्टी की बहस में विवेक रामास्वामी पहुंचे, तो वो डोनाल्ड ट्रंप की तरह ही आक्रामक नजर आए और बुधवार को डिबेट के बाद अमेरिकी मीडिया में पारंपरिक बहस के बाद के जो विश्लेषण सामने आए, उसमें विवेक रामास्वामी को व्यापक रूप से बहस की रात का विजेता माना गया।
रिपब्लिकन पार्टी के राजनीतिक पंडित, जॉन फीहेरी ने बहस के बाद एक टेलीविजन इंटरव्यू में अल जज़ीरा से बात करते हुए कहा, कि "विवेक रामास्वामी, जो वास्तव में बहुत सारी चर्चाओं और बहुत सारे विट्रियल पर हावी रहे, यह वास्तव में उनके लिए एक अच्छी रात थी।"
डोनाल्ड ट्रंप के रास्ते पर विवेक रामास्वामी
हालांकि, ढेर सारी प्रशंसाओं के बाद भी अमेरिका और दुनिया के वामपंथी आलोचक, उनके हिन्दू होने और डोनाल्ड ट्रंप के एजेंडे को ही आगे बढ़ाने के लिए उनकी क्रूर आलोचनाओं पर उतर आए हैं।
अमेरिकी वामपंथी उनके नाम का मजाक उड़ाने लगे हैं, उनके खिलाफ नस्लीय टिप्पणियां कर रहे हैं और उनके विचारों को खतरनाक बनाने लगे हैं।
विवेक रामास्वामी ने जलवायु परिवर्तन जैसी बातों को मानने से इनकार कर दिया है और मैक्सिको के ड्रग डीलरों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करने की बात कही है।
पूर्व रिपब्लिकन सांसद जो वॉल्श, जो अब पार्टी के मुखर आलोचक हैं, उन्होंने शुक्रवार को एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, कि रिपब्लिकन बेस एक "धमकाने वाले" या "सत्तावादी" उम्मीदवार की तलाश कर रहा है।
उन्होंने कहा, कि "वैसा उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रम्प हैं। यदि डोनाल्ड ट्रम्प नहीं जगह बना पाते हैं, तो उस रात उस मंच पर केवल दो अन्य लोग थे, जो उस जॉब में फिट बैठते हैं, वे हैं [फ्लोरिडा के गवर्नर रॉन] डेसेंटिस और रामास्वामी। बाकी कोई और नहीं।"
कौन हैं विवेक रामास्वामी?
अमेरिका में भारतीय प्रवासियों के बेटे, 38 साल के विवेक रामास्वामी ने 2021 में 'वोक इंक' नाम का एक कितब लिथा था, और किताब लिखने से पहले फार्मास्यूटिकल्स और बायोटेक कंपनी की स्थापना कर लाखों डॉलर कमाए, जिसने उन्हें दक्षिणपंथी राजनीति के मानचित्र पर ला खड़ा किया।
अपनी किताब में उन्होंने, टिकाऊ और न्यायसंगत व्यावसायिक नीतियों, जिन्हें पर्यावरण, सामाजिक और कॉर्पोरेट प्रशासन या ईएसजी के रूप में जाना जाता है, पर जोर देने के खिलाफ गुस्सा जताया था।
ओहियो के सिनसिनाटी में जन्मे और पले-बढ़े रामास्वामी, फॉक्स न्यूज सहित दक्षिणपंथी मीडिया पर अकसर दिखाई देने लगे, जहां वे उदारवादियों के पहचान की राजनीति पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह देते थे।
उनकी बयानबाजी ने विश्वविद्यालय की सकारात्मक कार्रवाई नीतियों के खिलाफ रूढ़िवादियों के गुस्से को भी प्रभावित किया, जिसमें एडमिशन के लिए रेस लगता है, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने जून में प्रतिबंधित कर दिया था।
रामास्वामी ने विविधता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बनाई गई नीतियों के विरोध में नस्ल-अंध "योग्यतातंत्र" के विचार को बढ़ावा दिया है। जिसे वो "रिवर्स नस्लवाद ही नस्लवाद है" कहते हैं।
मीडिया में उनकी उपस्थिति के बावजूद, जब रामास्वामी ने इस साल व्हाइट हाउस के लिए अपना अभियान शुरू किया, तो बहुत कम लोगों ने उनका नाम पहचाना होगा।
लेकिन, कुछ महीनों के अंतराल में, वह राष्ट्रीय स्तर पर एक काफी हद तक अज्ञात व्यक्ति से रिपब्लिकन राष्ट्रपति पद की प्रतियोगिता में जनमत सर्वेक्षणों में दूसरे स्थान के लिए डेसेंटिस को कड़ी टक्कर देने लगे।
जॉर्ज वाशिंगटन विश्वविद्यालय में प्रोफेसर और पॉलिटिकल मैनेजमेंट कार्यक्रम के डायरेक्टर टॉड बेल्ट ने कहा, कि "कई अमेरिकियों के लिए, एक बाहरी व्यक्ति द्वारा वाशिंगटन में जो गलत हो रहा है, उसे ठीक करने में सक्षम होने का विचार बहुत आकर्षक है, खासकर रिपब्लिकन के लिए - अगर वह बाहरी व्यक्ति एक सफल व्यवसायी है।"
उन्होंने कहा, कि "और मुझे लगता है कि उनकी युवावस्था और ऊर्जा लोगों को आकर्षित कर रही है।"
उसकी नीतियां क्या हैं?
संघीय चुनाव रिकॉर्ड के मुताबिक, रामास्वामी ने अपने अभियान में 15 मिलियन डॉलर खर्च किए हैं।
एक आत्मविश्वासी वक्ता, जो लगभग हमेशा मुस्कुराता हुआ दिखाई देता है, दो बच्चों के पिता, समाज की कथित बुराइयों के जवाब के रूप में विश्वास, परिवार और देशभक्ति पर जोर देते हैं। हालांकि वह हिंदू हैं, फिर भी वह अक्सर "यहूदी-ईसाई मूल्यों" पर जोर देते हैं।
रिपब्लिकन उम्मीदवार विवेक रामास्वामी ने हार्वर्ड विश्वविद्यालय में जीव विज्ञान का अध्ययन किया है और येल लॉ स्कूल से डिग्री प्राप्त की है। रामास्वामी ने खुद को एक एकजुट उम्मीदवार के रूप में भी प्रस्तुत किया है जो रिपब्लिकन पार्टी को शिकायतें व्यक्त करने से लेकर समाधान तक ले जाने की कोशिश कर रहा है।
उनके आलोचकों का कहना है, कि उनके प्रजेंटेशन की दृढ़ता के बावजूद, रामास्वामी के कई विचार अव्यावहारिक हैं और यदि वो विचित्र नहीं हैं, तो भी राष्ट्रपति पद की शक्तियों से कहीं आगे जाते हैं।
उदाहरण के लिए, उन्होंने मतदान की उम्र 18 से बढ़ाकर 25 करने का आह्वान किया है, जब तक कि युवा नागरिक शास्त्र की परीक्षा उत्तीर्ण नहीं कर लेते या सेना में या आपातकालीन उत्तरदाताओं के रूप में सेवा करके "राष्ट्रीय सेवा आवश्यकता" को पूरा नहीं कर लेते। लेकिन इसके लिए संवैधानिक संशोधन की आवश्यकता होगी और इसकी संभावना नहीं है।
विवेक की विदेश नीति की आलोचना
रिपब्लिकन पार्टी की प्राइमरी डिबेट के सबसे विवादास्पद क्षण के केंद्र में रामास्वामी थे, जब उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति चुने जाने पर वह यूक्रेन को और अधिक धनराशि नहीं जारी करेंगे।
पिछले साल रूस द्वारा देश पर आक्रमण करने के बाद से, अमेरिका ने यूक्रेन को अरबों डॉलर की सैन्य और मानवीय सहायता प्रदान की है। लेकिन रामास्वामी ने कहा, कि ये नीति "विनाशकारी" है, उनका तर्क है कि अमेरिका को अपनी दक्षिणी सीमा की रक्षा पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
उन्होंने रिपब्लिकन पार्टी के बाकी उम्मीदवार, क्रिस्टी और पूर्व उपराष्ट्रपति माइक पेंस पर निशाना साधा, क्योंकि उन दोनों ने यूक्रेन का दौरा किया और वहां के राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की से मुलाकात की थी।
उन्होंने कहा, कि "मुझे यह अपमानजनक लगता है, कि हमारे पास पेशेवर राजनेता हैं जो माउई या शिकागो के दक्षिणी हिस्से के लोगों के लिए ऐसा किए बिना, अपने पोप कीव की तीर्थयात्रा करते हैं।"
जिसको लेकर संयुक्त राष्ट्र में पूर्व अमेरिकी राजदूत निक्की हेली ने पलटवार करते हुए, रामास्वामी पर अमेरिकी सहयोगी के बजाय, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, जिन्हें उन्होंने "हत्यारा" कहा, उनका पक्ष लेने का आरोप लगाया।
हालांकि, यूक्रेन युद्ध को लेकर रिपब्लिकन पार्टी ने संसद में जो बाइडेन की नीतियों का और सहायता राशि जारी करने का समर्थन किया है और बहस के दौरान भी विवेक रामास्वामी अल्पमत में थे, बावजूद इसके उन्होंने अपनी बातों से बहस में मौजूद एक तबके को अपनी तरफ कर लिया।
और इसी का नतीजा था, कि डिबेट खत्म होने के बाद समाचार एजेंसी द एसोसिएटेड प्रेस ने जानकारी दी है, कि सिर्फ एक घंटे में उन्हें छोटे-छोटे दान में 450,000 डॉलर यानि करीब साढ़े 3 करोड़ भारतीय रुपये जुटा लिए।
हालांकि, इस बात की संभावना काफी कम है, को वो डोनाल्ड ट्रंप को रिपब्लिकन पार्टी के अंदर की रेस में पछाड़ पाएंगे, लेकिन अगर डोनाल्ड ट्रंप कानून अड़चनों की वजह से चुनावी रेस से बाहर होते हैं, तो फिर विवेक रामास्वामी को राष्ट्रपति पद का टिकट मिल सकता है। जबकि, विश्लेषकों का कहना है, कि अगर डोनाल्ड ट्रंप टिकट पाने में कामयाब हो जाते हैं, तो उप-राष्ट्रपति पद के लिए विवेक रामास्वामी को कोई नहीं रोक सकता है, क्योंकि रॉन डिसेंटिस को डोनाल्ड ट्रंप बिल्कुस पसंद नहीं करते हैं और विवेक रामास्वामी, जो खुद को कट्टर ट्रंप समर्थक बताते हैं, वो पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति की आंखों का तारा हो सकते हैं।
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