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Explained: मोदी की मिलीजुली सरकार से अर्थव्यवस्था में आया उछाल टूट जाएगा? बाजार से आ रहे संकेत समझिए

India's election shock: भारतीय जनता पार्टी ने अपने सहयोगियों की मदद से भारत में नई सरकार के गठन का ऐलान कर दिया है और माना जा रहा है, कि 8 या 9 जून को नरेन्द्र मोदी लगातार तीसरी बार बतौर प्रधानमंत्री शपथ लेने जा रहे हैं। हालांकि, नरेन्द्र मोदी की ये सरकार कई सहयोगियों की बैसाखी पर बनी होगी, लिहाजा पिछले दो शासनकाल की तरह उन्हें अपनी मर्जी से फैसले लेने में परेशानी हो सकती है।

नरेन्द्र मोदी के लिए ये एक चौंकाने वाला चुनावी परिणाम हैं और इस बात की संभावना बन सकती है, कि उनके लिए प्रमुख आर्थिक सुधारों को लागू करना अब थोड़ा मुश्किल हो सकता है।

economic boom of india

इसमें कोई शक नहीं है, कि नरेन्द्र मोदी के पिछले दो शासनकाल में भारत ने तेजी से तरक्की की है और यूनाइटेड किंगडम को पीछे छोड़ते हुए भारत अब दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया और पिछले वित्तीय वर्ष में भारत का विकास दर 8.2% का रहा है। लेकिन, अगर भारत को अपने सबसे बड़े प्रतिद्वंदी चीन को विकास के मामले में पीछे छोड़ना है, तो अभी भी भारत सरकार को कई सख्त फैसले लेने होंगे और विकास की उस गति को बरकरार रखना होगा, जिसे मोदी सरकार के पिछले दो शासनकाल में भारत ने पकड़ा है।

क्या मोदी के लिए फैसले लेना होगा मुश्किल?

निश्चित तौर पर.. नरेन्द्र मोदी की छवि एक ऐसे शासक की रही है, जिसने कभी भी गठबंधन सरकार नहीं चलाई है, लिहाजा अपने फैसलों के लिए उन्हें किसी और की तरफ देखने की जरूरत नहीं पड़ी है। सीएनएन की एक रिपोर्ट में सैन फ्रांसिस्को स्थित निवेश फंड मैथ्यूज एशिया के पोर्टफोलियो मैनेजर पीयूष मित्तल ने कहा है, कि "हमारा मानना ​​है कि ज्यादा विखंडित सरकार के लिए आगे चलकर सामान्य रूप से नीति निर्माण ज्यादा मुश्किल हो जाएगा।"

एक्सपर्ट्स का मानना है, कि 240 सीटें जीतने वाली बीजेपी के लिए अब भूमि सुधार कानून पास करना काफी मुश्किल हो जाएगा और संसद से पहले उन्हें इस बिल पर अपने सहयोगियों का साथ मिलना भी मुश्किल होगा।

जिसका नतीजा ये होगा, कि विदेशी कंपनियों के लिए भारत में जमीन हासिल करना काफी मुश्किल हो जाएगा। इस वक्त विदेशी कंपनियों को किसी फैक्ट्री निर्माण के लिए चीन में जमीन लेना काफी आसान है, लेकिन भारत में काफी मुश्किल है। मोदी सरकार अपने इस कार्यकाल में भूमि सुधार कानून लाना चाहती थी, ताकि भारत में विदेशी कंपनियां मैन्युफैक्चरिंक कंपनियां खोल सके। लेकिन, अब ये काफी मुश्किल होगा।

एक्सपर्ट्स का कहना है, कि अमेरिका और चीन के बीच चल रहे जियो-पॉलिटिकल तनाव का फायदा भारत को तभी मिलेगा, जब भारत सरकार सप्लाई चेन को लेकर मजबूत कदम उठाए। इंटरनेशनल कंपनियां, चीन और अमेरिका के बीच चल रहे तनाव की वजह से किसी ऐसे स्थान पर जाना चाहती हैं, जहां उन्हें जियो-पॉलिटिकल गर्मी का सामना नहीं करना पड़े और भारत इसके लिए पसंदीदा स्थान है।

दुनिया की कुछ बहुत बड़ी और प्रतिष्ठित कंपनियां, जिनमें से एक एप्पल (Apple) को मैटेरियल की सप्लाई करने वाली फॉक्सकॉन शामिल है, वो भारत में अपने ऑपरेशनल बेस का विस्तार कर रही है। लेकिन, भारत ने जहां इवेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में बेहतरीन कामयाबी हासिल की है, वहीं कपड़ा निर्माण, खिलौना निर्माण और फर्नीचर निर्माण में भारत, चीन से कई मील पीछे है।

लेकिन, एक्सपर्ट्स का मानना है, कि भले ही नरेन्द्र मोदी संसद में विशाल बहुमत हासिल करने में नाकाम रहे हैं, लेकिन उनकी सरकार अभी भी दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बनाने की अपनी अपेक्षाओं पर खरी उतरेगी।

कैपिटल इकोनॉमिक्स के इकोनॉमिस्ट शिलन शाह ने मंगलवार को एक नोट में कहा, कि "मोदी प्रशासन के पास अभी भी ऐसे सुधार लागू करने के लिए पर्याप्त जनादेश है, जो संभावित वृद्धि को 6% से 7% पर बनाए रखेंगे।" उन्होंने कहा, कि "इससे अर्थव्यवस्था अगले दशक में मौजूदे आकार में दोगुनी से ज्यादा हो जाएगी।"

देश के बुनियाद को मजबूत कर चुकी है सरकार

मोदी सरकार के पहले दो कार्यकालों को लेकर एक्सपर्ट्स का मानना है, कि पहले दो कार्यकाल में मोदी सरकार ने देश की बुनियाद को काफी मजबूत कर दिया है और तीसरे कार्यकाल में भारत के विकास के इंजन को रफ्तार पकड़नी है।

अमेरिका और चीन के बीच चल रहे जियो-पॉलिटिकल तनाव के बीच भारत पश्चिमी देशों से बेहतरीन रिश्ते का आनंद ले रहा है। वहीं घरेलू मोर्चे पर मोदी की सरकार ने सड़कों, रेलवे और हवाई अड्डों के निर्माण में अरबों खर्च करके निर्माणकार्य में भारी उछाल किया है। बुनियादी ढांचों के अलावा भारत ने यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) सहित कई सार्वजनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म भी बनाए हैं, जिन्होंने भारतीय लोगों के जीवन को पूरी तरह से बदल दिया है और लोगों में आर्थिक विकास देखा गया है।

ग्लोबल इन्वेस्टमेंट फर्म Global X में उभरते बाजारों की रणनीति के प्रमुख मैल्कम डोरसन ने कहा है, कि "भारत के पास अभी भी बाजार के अनुकूल सरकार है, लोकतांत्रिक चुनाव हुए हैं, भारत के पास मजबूत जनसांख्यिकी है, चीन से मजबूत टक्कर लेने की हिम्मत है और भारत तके पास अद्वितीय डिजिटल स्टैक से फायदा लेने की अद्वितीय क्षमता है।"

उन्होंने कहा, कि "भारत में निवेश करने की कहानी कोई एक या दो हफ्तों की कहानी नहीं है, बल्कि आप 20 सालों से ज्यादा वक्त के बारे में सोचते हैं और भारत में निवेश करना इन सब मुद्दों से कहीं ज्यादा की बात है और फिलहाल वैश्विक बाजार में भारत काफी मजबूती से कदम आगे बढ़ा रहा है, जिसके आगे भी रहने की संभावना है।"

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