10 वजहें क्यों यूरोप, अमेरिका को पीएम मोदी की आतंकवाद से जुड़ी अपील को नहीं करना चाहिए नजरअंदाज
वर्ष 2001 में जब अमेरिका ने 9/11 के बाद समझा था दशकों से आतंकवाद का सामना कर रहे भारत का दर्द। आज दुनिया मानने पर मजबूर कि भारत भी है आतंकवाद का पीड़ित।
बर्लिन। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस समय यूरोपिय देशों की यात्र पर हैं। सोमवार को पीएम मोदी जर्मनी पहुंचे और यहां पर उन्होंने चासंलर एंजेला मार्केल से मुलाकात की। पीएम मोदी ने एक बार फिर अपनी इस मुलाकात के दौरान यूरोपियन देशों से अपील की है कि वे आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में एक साथ आए। आज जब दुनिया खुद आतंकवाद से पीड़ित है तो वह भारत का दर्द समझने को मजबूर है और पिछले तीन वर्षों से पीएम मोदी ने हर अंतराष्ट्रीय मंच से आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई की आवाज बुलंद की है।

राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत को माना आतंकवाद का पीड़ित
पिछले दिनों अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सऊदी अरब की राजधानी रियाद में थे और यहां पर उन्होंने एक समिट के दौरान माना कि अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन, चीन और यूरोप के साथ ही भारत भी आतंकवाद का पीड़ित है। पिछले कई वर्षों में यह शायद पहला मौका था जब किसी अमेरिकी राष्ट्रपति ने इतने बड़े मंच पर भारत को आतंकवाद का पीड़ित माना है।

भारत में आतंकवाद से हुईं मौतें
वर्ष 2014 में ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स 2015 (जीटीआई) का तीसरा एडीशन रिलीज हुआ था। इसमें भारत को 162 देशों की लिस्ट में छठवें ऐसे देश के तौर पर रखा गया जिसने सबसे ज्यादा आतंकवाद झेला। आतंकवाद की वजह से होने वाली मौतों में 1.2 प्रतिशत की दर से इजाफा हुआ और वर्ष 2010 से 2014 तक 416 लोगों की मौत हो चुकी थी।

आखिर क्यों अमेरिका ने माना भारत को पीड़ित
अमेरिका के लिए भारत को आतंकवाद का पीड़ित मानना इतना आसान नहीं है। सितंबर 2001 में 9/11 जैसा आतंकी हमला झेलने के बाद अमेरिका लगातार उस खतरे को झेलने पर मजबूर है जिसका सामना भारत पिछले छह दशकों से भी ज्यादा समय से कर रहा है। आज अमेरिका के लिए घरेलू आतंकवाद सबसे बड़ा सिरदर्द बन चुका है।

9/11 के बाद अमेरिका की स्थिति
9/11 के बाद से सैंकड़ों अमेरिकी नागरिकों और लोगों को जेहादी गतिविधियों के आरोप में गिरफ्तार किया जा चुका है। ये लोग अमेरिका के साथ ही साथ दूसरे देशों में बसे हुए हैं। हर वर्ष इस आंकड़ें में इजाफा हो रहा है। पिछले तीन वर्षों में जब से आईएसआईएस ने अपने पैर पसारने शुरू किए हैं, इस आंकड़ें में तेजी से इजाफा हुआ है।

अमेरिका में कितने गिरफ्तार
वर्ष 2001 में जहां सिर्फ दो लोगों को आतंकवाद के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था तो वर्ष 2015 तक यह आंकड़ां 70 तक पहुंच गया। 9/11 बाद से अमेरिका में 370 लोगों को आतंकी गतिविधियों के सिलसिले में गिरफ्तार किया जा चुका है। वर्ष 2017 के शुरुआती पांच माह के अंदर 10 लोगों को आतंकी गतिविधियों में शामिल होने की वजह से गिरफ्तार किया गया है।

9/11 के बाद से अमेरिका में हमले
9/11 हमलों ने 3,000 से ज्यादा लोगों की जान ले ली थी। इन आतंकी हमलों के बाद से अमेरिका वर्ष 2016 तक 95 बार जेहादी हमलों का शिकार बन चुका है। हैरानी की बात है आज अमेरिका में आतंकी मौजूद हैं और वे किसी भी पल अमेरिका को दहला सकते हैं।

यूरोप का हाल
वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की एक रिपोर्ट के मुताबिक साल 2000 से लेकर 2015 तक आतंकी हमलों की वजह से होने वाली मौतों में तो कुछ कमी आई लेकिन हमलों में तेजी से इजाफा हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक साल 1970 से 1990 तक आतंकी हमलों में हर वर्ष आतंकी हमलों में 150 लोग मारे जाते थे, यह आंकड़ा 15 वर्षों में 50 से भी कम हो गया है।

वेस्टर्न यूरोप का हाल
वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की रिपोर्ट में कहा गया कि वेस्टर्न यूरोप का हाल सबसे बुरा है। यहां पर नई सदी शुरू होने के साथ ही आतंकवाद में भी इजाफा हुआ। वर्ष 2004 में यहां पर मैड्रिड ट्रेन बॉम्बिंग में 191 लोगों की मौत हुई। इसके बाद वर्ष 2005 में लंदन में हुई बॉम्बिंग में 52 लोगों की मौत हुई। 2011 में नॉर्वे में आतंकी हमला हुआ इसमें 77 लोगों की मौत हुई और यह एक लोन वोल्फ अटैक था। वहीं नंवबर 2105 में पेरिस में आतंकी हमला हुआ और इसमें 130 लोगों की मौत हुई।

पाकिस्तान पर सख्ती
आज पाकिस्तान में भी आतंकवाद की वजह से लोग अपनी जान से गंवा रहे हैं लेकिन इसके बाद भी पाकिस्तान अपने रवैये में सुधार करने को तैयार नहीं है। अमेरिका कई बार इस बात को कह चुका है कि पाकिस्तान अपनी सरजमीं पर मौजूद आतंकी हमलों के खिलाफ कोई सख्त कदम नहीं उठा रहा है। राष्ट्रपति ट्रंप ने रियाद में भारत को आतंकवाद का पीड़ित माना तो पाकिस्तान को चेतावनी भी दी।

आईएसआईएस ने बढ़ाया डर
आज आईएसआईएस अमेरिका और यूरोप जैसे देशों को अपना निशाना बनाने को तैयार है। पिछले दिनों ब्रिटिश इंटेलीजेंस एक रिपोर्ट में कहा गया कि पूरे ब्रिटेन में करीब 23,000 लोग ऐसे हैं जो संदिग्ध हैं और किसी भी पल ब्रिटेन को दहला सकते हैं। अमेरिका का भी हाल कुछ ऐसा ही है और यहां पर कई युवा जो अलग-अलग देशों के हैं, जेहादी गतिविधियों में शामिल हैं।












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