रूसी तेल खरीदने पर प्रतिबंध लगाने से क्यों डरता है अमेरिका-ब्रिटेन? पुतिन की चाल में बुरी तरह फंसे बाइडेन
रूस ने एक दिन पहले चेतावनी दी है, कि अगर रूसी तेल पर प्रतिबंध लगाया गया, तो अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 300 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच जाएगा और अगर ऐसा होता है, तो पूरी दुनिया में हाहाकर मच जाएगा।
वॉशिंगटन/मॉस्को, मार्च 08: यूक्रेन युद्ध शुरू होने के साथ ही अमेरिका और ब्रिटेन समेत तमाम पश्चिमी देशों ने रूस को प्रतिबंधों के फंदे में जकड़ना शुरू कर दिया। अमेरिकी प्रेशर में जर्मनी ने रूस क साथ महत्वपूर्ण गैस पाइपलाइन परियोजना कैंसिल कर दी, तो फ्रांस ने अपनी कंपनियों के भारी आर्थिक नुकसान की परवाह नहीं करते हुए रूस पर प्रतिबंध लगा दिए। फ्रांस के साथ साथ कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड जैसे देशों ने भी रूस के खिलाफ कड़े प्रतिबंध लगा दिए। लेकिन, अमेरिका अभी भी रूसी तेल पर प्रतिबंध नहीं लगा पा रहा है। ऐसे में क्या अमेरिका डबल गेम खेल रहा है? आखिर अमेरिका तेल पर प्रतिबंध लगाने से डरता क्यों है? आइये जानते हैं।

दुनिया में बढ़ी तेल की कीमत
रूस पर लगने वाले कड़े प्रतिबंधों के चलते दुनियाभर में तेल की कीमतों में भारी इजाफा हो चुका है और रूस ने एक दिन पहले चेतावनी दी है, कि अगर रूसी तेल पर प्रतिबंध लगाया गया, तो अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 300 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच जाएगा और अगर ऐसा होता है, तो पूरी दुनिया में हाहाकर मच जाएगा। कोविड महामारी की वजह से पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पहले से ही रेंग रही है और अगर तेल की कीमत में बेतहाशा बढ़ोतरी होती है, तो फिर गरीब लोगों का जीना दूभर हो जाएगा, क्योंकि हर एक सामान की कीमतों में उसी अनुपात में इजाफा होगा। अमेरिका भी इससे बचा नहीं है। बाइडेन के कार्यकाल में अमेरिका में महंगाई में रिकॉर्ड वृद्धि हुई है और बाइडेन प्रशासन महंगाई रोकने में अभी तक नाकाम रहा है। पूरी दुनिया में अमेरिका सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता देश है और तेल की बढ़ती कीमतों ने बाइडेन की पेशानी पर बल ला दिए हैं, क्योंकि अमेरिका में इस वक्त महंगाई दर पिछले 40 सालों में सबसे ज्यादा है।

रूस से कितना तेल खरीदता है अमेरिका?
अमेरिका रूसी तेल का आयात तो करता है, लेकिन तेल की आपूर्ति के लिए अमेरिका रूस पर ज्यादा निर्भर नहीं है। अमेरिकन फ्यूल एंड पेट्रोकेमिकल मैन्युफैक्चरर्स (AFPM) ट्रेड एसोसिएशन के अनुसार, साल 2021 में, अमेरिका ने रूस से औसतन 209,000 बैरल प्रति दिन (बीपीडी) कच्चे तेल और 500,000 बीपीडी अन्य पेट्रोलियम उत्पादों का आयात किया। यह अमेरिकी कच्चे तेल के आयात का तीन प्रतिशत और अमेरिकी रिफाइनरियों द्वारा संसोधित कुल कच्चे तेल का एक प्रतिशत है। इसके विपरीत, अमेरिका ने साल 2021 में अपने पड़ोसी देश कनाडा से अपने कच्चे तेल का 61 प्रतिशत, मेक्सिको से 10 प्रतिशत और सऊदी अरब से छह प्रतिशत आयात किया। AFPM के अनुसार, साल 2019 से अमेरिका ने रूस से कच्चे तेल के आयात में वृद्धि की थी, जब अमेरिका ने वेनेजुएला के तेल उद्योग पर प्रतिबंध लगाए थे। यूएस रिफाइनर ने भी पिछले साल अस्थायी रूप से रूसी आयात को बढ़ावा दिया था, जब तूफान इडा ने मेक्सिको की खाड़ी में तेल उत्पादन को बाधित कर दिया था।

तेल पर प्रतिबंध अमेरिका को कैसे प्रभावित करेगा?
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अगर अमेरिका रूस से तेल आयात करने पर प्रतिबंध लगाता है, तो वो दो तरीकों से प्रभावित हो सकता है। ब्रिटिश कोलंबिया विश्वविद्यालय के सौडर स्कूल ऑफ बिजनेस के प्रोफेसर एडम पंकरात ने अल जज़ीरा को बताया कि, ''अगर तेल आपूर्ति के संदर्भ में देखें, तो इससे अमेरिका ज्यादा प्रभावित नहीं होगा, क्योंकि, अमेरिका के पास एक रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार है'', लेकिन, पंकरात्ज़ के मुताबिक, अगर अमेरिका ऐसा करता है, तो फिर अमेरिका पर बड़ा आर्थिक प्रभाव पड़ेगा। एक्सपर्ट पंकरात्ज़ के मुताबिक "अगर अमेरिका ने रूसी तेल का आयात बंद कर दिया, तो इसका मतलब यह होगा, कि कई अन्य देश भी इस स्थिति में रूसी तेल का आयात नहीं करेंगे, और इससे पहले से ही बहुत तंग तेल बाजार और भी सख्त हो जाएगा, और इससे तेल की कीमत बढ़ जाएगी और इसका सीधा असर महंगाई पर पड़ेगा, जो अमेरिकी अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है"।

रूसी तेल पर अभी तक प्रतिबंध नहीं
रूस के खिलाफ अभी तक जितने भी प्रतिबंध लगे हैं, उनमें एक बात कॉमन ये है, कि किसी भी देश ने रूसी तेल के आयात पर प्रतिबंध नहीं लगाए हैं और ब्रिटेन ने भी तेल आयात पर प्रतिबंध लगाने से परहेज किया है, जबकि बाइडेन ने यूक्रेनी राष्ट्रपति से बातचीत के दौरान रूसी तेल के आयात पर प्रतिबंध लगाने से मना कर दिया है और रूस के पास अपनी अर्थव्यवस्था को ऑक्सीजन देने के लिए उसका सबसे बड़ा हथियार तेल और गैस ही है। बुधवार को कच्चे तेल की कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल से ज्यादा हो गईं है, जिससे बढ़ती मुद्रास्फीति पर अंकुश लगाने की कोशिश कर रही सरकारों के लिए ये एक चुनौती बन गई है। पंकरात्ज़ ने कहा कि, ''अभी तक तेल पर प्रतिबंध नहीं है, फिर भी ये हालात हैं''। पंकरात्ज़ ने कहा कि, ''हाल के दिनों में रूसी तेल और गैस का बाजार "वास्तव में आगे नहीं बढ़ रहे हैं"। उन्होंने कहा कि, "यह पूरी तरह से स्वीकृत नहीं है, लेकिन इसे बेचने में परेशानी हो रही है, क्योंकि लोग घबराए हुए हैं, (प्रतिबंधों का उल्लंघन करने के बारे में)''
बाइडेन प्रशासन पर किस तरह का प्रभाव?
अमेरिका में इस वक्त महंगाई दर बढ़कर 7.5 फीसदी हो चुकी है और साल 1982 के बाद से अमेरिका में ये अभी तक की उच्चतम महंगाई दर है। वहीं, मूडीज एनालिटिक्स द्वारा हाल ही में किए गए एक स्टडी के अनुसार, औसत अमेरिकी परिवार के लिए मासिक खर्च में 276 डॉलर की वृद्धि दर्ज की गई है, जो काफी ज्यादा है। वहीं, यूक्रेन में युद्ध से स्थिति और अमेरिका की स्थिति और भी खराब होने की संभावना है। बढ़ती कीमतों ने पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन की अप्रूवल रेटिंग को झटका देते हुए काफी गिरा दिया है, जो जनवरी में 33 प्रतिशत के रिकॉर्ड निचले स्तर तक डूबने के बाद सुस्ती में हैं। वहीं, इस साल नवंबर महीने में अमेरिका में सीनेट चुनाव होने वाले हैं और डोनाल्ड ट्रंप लगातार बाइडेन पर नाकामी होने का आरोप लगा रहे हैं। अफगानिस्तान ने पहले से ही बाइडेन की साख को काफी गिरा दिया है और अब यूक्रेन युद्ध रोकने में नाकाम रहने का ठीकरा भी बाइडेन के माथे ही फोड़ा जा रहा है, लिहाजा अमेरिका के पॉलिटिकल एक्सपर्ट्स का मानना है कि, सीनेट चुनाव में बाइडेन के लिए इन सवालों का जवाब देना ना सिर्फ काफी मुश्किल होगा, बल्कि उनकी पार्टी को काफी नुकसान भी हो सकता है।

अमेरिका में भारी राजनीतिक परिणाम?
पॉलिटिकल एक्सपर्ट पंकरात्ज़ बताते हैं कि, ''बढ़ती मुद्रास्फीति के "भारी" राजनीतिक परिणाम हो सकते हैं।' उन्होंने कहा कि, "लोग इस बात पर वोट करते हैं, कि हम रसोई की मेज पर किन मुद्दों पर और क्या बात कर रहे हैं''। उन्होंने कहा कि, "गैस की कीमत क्या है? हम छुट्टी पर जाने का कितना खर्च उठा सकते हैं? परिवार खुद से पूछ रहे हैं कि क्या वे इस साल ज्यादा अमीर हैं... और इस लिहाज से महंगाई एक गंभीर समस्या हो सकती है।" यानि, बाइडेन के लिए रूसी तेल पर प्रतिबंध लगाना कतई आसान नहीं होगा। इसके अलावा रूस ने तेल उत्पादन नहीं बढ़ाने के लिए सऊदी अरब को भी धमकी दे दी है, क्योंकि बाइडेन प्रशासन लगातार सऊदी अरब पर तेल उत्पादन में बढ़ोतरी करने का दबाव बना रहा है।

रूस ने तेल को लेकर दी धमकी
रूस जानता है, कि अमेरिका फंसा हुआ है और बाइडने के लिए रूसी तेल आयात पर प्रतिबंध लगाना आसान नहीं है, लिहाजा राष्ट्रपति पुतिन लगातार बाइडेन प्रशासन पर और भी ज्यादा दबाव बना रहे हैं। रुस ने चेतावनी दी है कि, वह रूस से जर्मनी के बीच गैस पाइल लाइन की सप्लाई को बंद कर देगा, अगर उसके तेल के निर्यात पर प्रतिबंध लगाया जाता है। रुस ने साफ किया है कि अगर तेल निर्यात पर प्रतिबंध लगता है तो वह नॉर्ड स्ट्रीम 2 पाइपलाइन को बंद कर देगा। गौर करने वाली बात है कि, रूस यूरोप को कुल 40 फीसदी गैस की सप्लाई करता है। रूस के उप प्रधानमंत्री एलेक्जेंडर नोवाक ने सोमवार को कहा कि, हमें पूरा अधिकार है, कि हम प्रतिबंधों का जवाब दें और इसी के तहत हम नॉर्ड स्ट्रीम 1 गैस पाइप लाइन को बंद कर सकते हैं। अगर रूस ऐसा करता है, तो यूरोपीय देशों में हाहाकार मचना तय है।

300 डॉलर प्रति बैरल तक जाएगी कीमत?
नोवाक ने इस बात को लेकर भी चेतावनी दी है, कि तेल की कीमतें दोगुनी हो सकती हैं और यह 300 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है, अगर अमेरिका और उसके सहयोगी रूस के तेल पर प्रतिबंध लगाते हैं जो कि रूस के राजस्व का अहम हिस्सा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर रूस के तेल निर्यात को रोक दिया जाता है तो प्रतिदिन 5 मिलियन बैरल की प्रतिदिन कमी होगी, जिसके चलते तेल की कीमतें 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकते हैं। गौर करने वाली बात है कि तेल की कीमतें अपने 14 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं। कच्चा तेल 125 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है। लिहाजा, अमेरिका के साथ साथ ब्रिटेन भी फंसा हुआ है और रूस इसी बात का फायदा उठाने में लगा हुआ है।












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