ये पांचों क्यों हैं दुनिया के सबसे सुरक्षित शहर, इनके बारे में जानिए
लंदन, 7 अक्टूबर: कोविड-19 ने बीते करीब डेढ़ साल में लोगों को जीने को लेकर नजरिया बदल दिया है। पूरी दुनिया में लोगों की सोच पर इसका बहुत ही गंभीर असर पड़ा है। गांवों में तो फिर भी परिस्थितियां जल्द सामान्य होने की तरफ हैं। लेकिन,शहरों और महानगरों में चाहे भले ही आम दिनचर्या कुछ समय बाद पूरी तरह पटरी पर लौट आए, लेकिन शहरियों का जिंदगी को लेकर दृष्टिकोण काफी बदल चुका है। शहरों की बात इसलिए, क्योंकि 1900 की शुरुआत में जब स्पैनिश फ्लू ने दुनिया को तबाह किया था, तब महज 14 फीसदी लोग ही शहरों में रहते थे। यूएन पॉपुलेशन डिविजन के अनुमानों के मुताबिक आज इनकी संख्या बढ़कर 57% तक पहुंच चुकी है।

'2021 सेफ सिटी इंडेक्स'
पिछले साल जब से चीन के वुहान से कोविड-19 निकलकर पूरी दुनिया को गलत वजह से एकजुट किया है तो लोगों में खुद की हिफाजत को लेकर चिंताएं काफी बढ़ गई हैं। यह चिंता स्वास्थ्य को लेकर तो बढ़ी ही है, बाकी तरह की सुरक्षा चिंताएं भी बढ़ गई हैं। कुछ हफ्ते पहले इकोनॉमिस्ट इंटेलिजेंस यूनिट ने 76 सेफ्टी इंडिकेटर के आधार पर '2021 सेफ सिटी इंडेक्स' के तहत विश्व के 60 शहरों की रैंकिंग तय की थी। इन इंडिकेटरों में उस शहर के इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल जीवन, निजी सुरक्षा, पर्यावरण से जुड़े विषय और सबसे बढ़कर स्वास्थ को शामिल किया गया। स्वास्थ्य के विषय को लेकर इस बात पर फोकस किया गया है कि महामारी से निपटने को लेकर वहां कैसी तैयारी है और कोरोना से दोनों वर्ष मृत्यु दर क्या रही है। इन 60 शहरों में हम टॉप 5 के बारे में बात कर रहे हैं।

कोपनहेगन- डेनमार्क
बीबीसी ने इन पांच शहरों के निवासियों से सुरक्षा मानकों पर खरे उतरने को लेकर बात की है। जैसे महामारी से कैसे उनका शहर ज्यादा सुरक्षित है, वह कितना समावेशी और लचीला बन चुका है और यहां की यात्रा करने वालों के लिए यह किस तरह से सुरक्षित है। दुनिया के सबसे सुरक्षित शहरों की लिस्ट में डेनमार्क की राजधानी कोपनहेगन टॉप पर है। इस शहर के बारे में पता चला है कि पर्यावरण की सुरक्षा इस शहर की सबसे बड़ी ताकत है। एयर क्वालिटी, वेस्ट मैनेजमेंट, अर्बन फॉरेस्ट कवर सब में इसने बाजी मारी है। इन वजहों से महामारी की पाबंदियों से निपटने में यहां के लोगों को बहुत सहायता मिली। सुंदर पार्क, हरियाली और जलधाराएं कोरोना में लोगों के बीच खूब लोकप्रिय रहीं। लोगों को खुली हवा में सांस लेना बहुत पसंद आया। सबसे बड़ी बात 'कोरोना-गाइड' की व्यवस्था ने यहां के लोगों की बहुत ही ज्यादा मदद की। डेनमार्क सबसे कम भ्रष्टाचार वाले मुल्कों में शामिल है। इसका असर ये हुआ कि यहां सरकार और आम लोगों के बीच एक भरोसे का महौल रहा, जिससे इस संकट से उबरने में सहायता मिली।

टोरंटो-कनाडा
हर तरह से सुरक्षित शहरों में कनाडा के सबसे बड़े शहर टोरंटो दूसरे पायदान पर रहा है। इसमें यहां का बेहतरीन इंफ्रास्ट्रक्चर और पर्यावरण सुरक्षा ने बहुत ही बड़ी भूमिका निभाई है। यहां लोगों के बीच वैक्सीन को लेकर जागरूकता को भी काफी नंबर मिले हैं। जो लोग वैक्सीनेशन सेंटर नहीं पहुंच पाते उनके लिए घरों पर ही इंतजाम किया गया, जिससे इस ड्राइव ने जल्दी से रफ्तार पकड़ ली। यहां के स्थानीय लोग इस शहर के बहुसंस्कृतिवाद के इतिहास से भी बहुत ज्यादा प्रभावित हैं। लोगों का मूल स्थान क्या है, यहां के समाज में इससे बहुत ज्यादा फर्क नहीं पड़ता।

सिंगापुर
सिंगापुर को डिजिटल सिक्योरिटी, हेल्थ सिक्योरिटी और इंफ्रास्ट्रक्चर सिक्योरिटी में दूसरा स्थान प्राप्त है। महामारी के दौरान उसकी इस बुनियाद का उसे बहुत ज्यादा फायदा मिला। यहां टीकाकरण की दर भी दुनिया में सबसे अधिक में से रही है। डिजिटल सिक्योरिटी की वजह से वर्क फ्रॉम होम संस्कृति की ओर शिफ्ट करने में इसे जरा भी दिक्कत नहीं हुई। परिणाम ये हुआ कि लोगों के बीच आपसी संपर्क की मजबूरी बहुत ही कम रही। भीड़ वाली जगहों पर भी ऐसे सोशल डिस्टेंसिंग एंबेसडर लगा दिए गए थे, जो कोविड प्रोटोकॉल पर ध्यान देते थे और उसका उल्लंघन मोटे जुर्माने को दावत देना था।

सिडनी-ऑस्ट्रलिया
ऑस्ट्रेलिया दुनिया के उन पहले देशों में शामिल है, जिसने कोरोना को कंट्रोल करने के लिए सबसे पहले अपने बॉर्डर सील कर दिए और सख्त लॉकडाउन लगा दिया। इसका बहुत ही सकारात्मक असर पड़ा। प्रति व्यक्ति कोविड से होने वाली मौतों के मामले भी ऑस्ट्रेलिया उन देशों में शामिल है, जहां ये बहुत ही कम है। यही वजह है कि यहां के निवासी सड़कों पर निकलते भी हैं तो वह महामारी को लेकर बहुत ज्यादा सुरक्षित महसूस करते हैं। लोगों ने कहा है कि अब वह पूरा सिडनी घूमते हैं, लेकिन कभी भी खतरा महसूस नहीं हुआ है। वहीं डिजिटल सिक्योरिटी और साइबर सिक्योरिटी में भी यह अव्वल साबित हुआ है।

टोक्यो- जापान
जापान की राजधानी टोक्यो को ओवरऑल इंडेक्स में पांचवां रैंक मिला है और हेल्थ सिक्योरिटी इंडेक्स में टॉप पर है। स्वास्थ्य सुरक्षा का मतलब यूनिवर्सल हेल्थ केयर, महामारी की तैयारी, लाइफ एक्सपेक्टेंसी, मेंटल हेल्थ और कोविड-19 से होने वाली मौत शामिल है। ओलंपिक के आयोजन के बावजूद पांचवां रैंक लाना बड़ी बात है और खेलों के दौरान मामले भी बढ़ने लगे थे। लेकिन, जैसे ही 60 फीसदी आबादी को टीके लगे कि मामले उसी रफ्तार से कम भी हो गए। यही वजह है कि सितंबर के अंत में आकर जापान ने आपातकाल हटा लिया और धीरे-धीरे पाबंदियां भी खत्म कर रहा है। इंफ्रास्ट्रक्चर सिक्योरिटी की वजह से भी इसे पहले पांच में जगह मिली है।

भारत के ये दोनों शहर भी लिस्ट में शामिल
इन 60 शहरों की लिस्ट में भारत के जो दो शहर शामिल हैं उनमें 48वें स्थान पर राजधानी नई दिल्ली और 50वें स्थान पर आर्थिक राजधानी मुंबई हैं। इकोनॉमिस्ट इंटेलिजेंस यूनिट (ईआईयू) जिसने यह रिसर्च किया है, वह इकोनॉमिस्ट ग्रुप का अनुसंधान और विश्लेषण प्रभाग है। इकोनॉमिस्ट इंटेलिजेंस यूनिट का मुख्यालय लंदन है और 1946 में इसे स्थापित किया गया था। इसने चीन और हांगकांग में भी अपने ब्रांच बना रखे हैं।












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