Macron In India: आखिर फ्रांस में क्या बचाना चाहते हैं मैक्रों? हड़बड़ी में पहुंचे Mumbai, 5 प्वॉइंट में समझें
Macron In India: फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों तीन दिनों के भारत दौरे पर मुंबई पहुंचे हैं। इस यात्रा के दौरान भारत और फ्रांस के बीच 114 राफेल फाइटर जेट समेत कई बड़ी फायनेंशियल डील होने की उम्मीद है। 2017 में राष्ट्रपति बनने के बाद यह मैक्रों की भारत की चौथी यात्रा है। इससे साफ है कि दोनों देशों के रिश्ते लगातार मजबूत हो रहे हैं और यह साझेदारी अब रणनीतिक स्तर पर काफी आगे बढ़ चुकी है।
ट्रंप की धमकियों के बीच मैक्रों का दौरा
मैक्रों का यह दौरा ऐसे समय पर हो रहा है जब वे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरफ और सेंक्शन वाली चेतावनियों का सामना कर रहे हैं। ट्रंप ने यूरोपीय क्षेत्र ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की धमकी दी थी, जिसका मैक्रों ने खुलकर विरोध किया। इसी बात पर से भड़के ट्रंप ने फ्रांस समेत पूरे यूरोप को टैरिफ की धमकी दे दी थी। इधर, भारत भी ट्रंप के टैरिफ से परेशान था लेकिन बीते दिनों भारत ने ट्रेड डील कर सबकुछ ठीक कर लिया। अब वो पांच प्वॉइंट समझते हैं जो मैक्रों को भारत खींच लाए।

1. 'फाइटर जेट कूटनीति'
वॉर स्ट्रेटजी के एक्सपर्ट माथिईयू ड्रोइन ने अमेरिकी थिंक टैंक CSIS में अपने लेख में इस पूरी डील को सिर्फ हथियारों की खरीद नहीं, बल्कि 'फाइटर जेट कूटनीति' बताया है। उनके मुताबिक, आज की दुनिया में फाइटर जेट की डील सिर्फ सैन्य ताकत का मामला नहीं है, बल्कि यह राजनीतिक भरोसे और लंबे समय की रणनीतिक साझेदारी का प्रतीक बन चुकी है। यानी यह डील सिर्फ जेट खरीदने की नहीं, बल्कि रिश्ते मजबूत करने की भी है। ड्रोइन के मुताबिक, भारत 114 राफेल फाइटर जेट इसलिए नहीं खरीद रहा क्योंकि वे सिर्फ ताकतवर हैं, बल्कि इसलिए क्योंकि भारत अपनी रणनीतिक आज़ादी को मजबूत करना चाहता है।
भारत लंबे समय से रूस पर रक्षा उपकरणों के लिए निर्भर रहा है। अब वह अपनी यह निर्भरता कम करना चाहता है। फ्रांस को भारत एक राजनीतिक रूप से भरोसेमंद आपूर्तिकर्ता मानता है, जो कल-पुर्जों और हथियारों की बिना रुकावट सप्लाई की गारंटी देता है।
इस डील के तहत राफेल का 50% हिस्सा भारत में ही बनाया जाएगा। इससे देश की घरेलू रक्षा क्षमता बढ़ेगी और भारत किसी एक देश पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहेगा। यह कदम चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों से निपटने की तैयारी को भी मजबूत करता है।
2. फ्रांस को इस डील से क्या फायदा?
फ्रांस के इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल एंड स्ट्रैटेजिक अफेयर्स से जुड़े विशेषज्ञ गास्पर्ड श्निट्ज़लर ने अपने लेख में बताया कि राफेल जैसे हथियारों का एक्सपोर्ट फ्रांस के दो बड़े लक्ष्यों को पूरा करता है-संप्रभुता (Sovereignty) और प्रभाव (Influence)। उनके मुताबिक, जब फ्रांस अपने हथियार दूसरे देशों को बेचता है, तो उसका रक्षा औद्योगिक और तकनीकी ढांचा मजबूत होता है। फ्रांस के लिए घरेलू ऑर्डर ही पर्याप्त नहीं होते, इसलिए निर्यात जरूरी है। इससे उसकी टफ टेक्नोलॉजी, प्रोडक्शन लाइन और स्ट्रेटजिक फ्रीडम बनी रहती है। बाकी आर्थिक फायदा तो होता ही है।
3. सिर्फ बिज़नेस नहीं, पॉलिटिक्स भी
श्निट्ज़लर का मानना है कि हथियारों को बेचकर केवल व्यापारिक समझौता समझना गलत होगा। यह एक राजनीतिक और कूटनीतिक रणनीति भी है। जब दो देश डिफेंस सेक्टर में सहयोग करते हैं, तो उनके बीच लंबे समय का भरोसा और निर्भरता बनती है। इससे फ्रांस का वैश्विक प्रभाव बढ़ता है और दोनों देशों के बीच रिश्ते और गहरे होते हैं।
4. यूरोप की जरूरत
'पोलिटिको' मैग्जीन में जियो पॉलिटिक्स के एक्सपर्ट जैकोपो बरिगाज़ी ने लिखा कि यूरोपीय देश घातक हथियार तो बना सकते हैं, लेकिन वे खुफिया जानकारी, लॉजिस्टिक्स, कम्यूनिकशन, फ्यूल रीफिल, स्पेस रिसोर्स और कमांड-कंट्रोल सिस्टम के लिए अभी भी अमेरिका पर काफी निर्भर हैं।उनके मुताबिक, यूरोप के अधिकारियों की प्राथमिकता अब अमेरिकी पर डिपेंडेंसी को कम करना और आत्मनिर्भर बनना है। इसमें यूरोपीय देशों को अपनी GDP का 10% तक खर्च करना पड़ सकता है। ऐसे में यूरोप के पास एक बड़ा खरीददार होना अभी की बड़ी जरूरत है, और भारत एक अच्छा विकल्प है।
5. सिर्फ ज्यादा हथियार बनाना ही समाधान नहीं
एक्सपर्ट्स का मानना है कि मजबूत डिफेंस इंड्रस्ट्री बनाना जरूरी है, लेकिन असली गेम सिर्फ हथियार बनाने से नहीं जीता जा सकता। इसके लिए बेहतर इंटेलिजेंस नेटवर्क, स्पेस टेक्नोलॉजी, कम्युनिकेशन सिस्टम और दूसरी डिफेंस जरूरतों को एकसाथ लाना होगा। इस पूरे संदर्भ में भारत और फ्रांस के बीच 114 राफेल फाइटर जेट की डील दोनों देशों के साझा रणनीतिक लक्ष्यों को मजबूत करती है। इधर भारत जो पहले रूस के भरोसे था अब उसने अपनी दोस्ती और संबंधों का दायरा बढ़ा लिया है। जिससे वह यूरोप और रूस के साथ अमेरिका के साथ भी बैलेंस बनाए हुए है।
इसलिए मैक्रों की इस भारत यात्रा से दोनों देशों को फायदा होगा, फ्रांस आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ेगा। जिसके लिए भारत उसके हथियार खरीदकर उसकी जीडीपी को सुरक्षित रखने में मदद करेगा। वहीं भारत अपनी रक्षा जरूरतों को पूरा कर एडवांस में हथियार लेकर अपनी ताकत को और बढ़ाएगा। लिहाजा इस डील में दोनों देशों का बराबर फायदा है।
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