जापान के लोग अब बच्चे पैदा करना क्यों नहीं चाहते हैं?
जापान के युवा अपनी जरूरतों के लिए बिना शादी साथ रहने में काफी तेजी से आगे बढ़े हैं और वो अब बच्चों को अपने लिए 'बोझ' मानते हैं।
Japan News: आर्थिक विकास के क्षेत्र में रॉकेट की रफ्तार से बढ़ने वाला जापान आज जनसंख्या संकट से बुरी तरह से जूझ रहा है और सबसे बड़ी दिक्कत ये है, कि जापानी युवाओं का बच्चे पैदा करने से ही मोह भंग हो चुका है, ऐसे में सरकार के लिए जनसंख्या वृद्धि दर को बढ़ाना काफी मुश्किल हो चुका है। साल 2000 में जापान में जनसंख्या वृद्धि दर शून्य पर पहुंच चुकी थी और साल 2010 के बाद जापान की आबादी में कमी आने लगी। वहीं, पिछले 10 सालों से हर साल जापान जनसंख्या में आने वाली कमी को लेकर खुद अपना ही रिकॉर्ड तोड़ रहा है और सरकार की जनसंख्या बढ़ाने की हर कोशिश फेल साबित हो रही है। साल 2020-21 में जापान की जनसंख्या 6 लाख 44 हजार और कम हो गई है।

जापान की आबादी में भारी गिरावट
जापान की जनसंख्या इस सदी के मध्य में बुरी तरह से सिकुड़ जाने का अनुमान है और साल 2065 तक जापान की कुल 8 करोड़ 80 लाख की आबादी तक पहुंच जाएगी, यानि 30 प्रतिशत तक की कमी आ जाएगी। जापान की जनसंख्या फिलहाल 12 करोड़ 50 लाख के आसपास है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जापान की जनसंख्या में तेजी से कमी आने की मुख्य वजह जापानी युवाओं लगातार कम होती प्रजनन क्षमता है। 1970 के दशक के मध्य से जापान की प्रजनन दर में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है और 2000 के दशक की शुरुआत में महिलाओं का प्रजनन दर (Total Fertility Rate) घटकर सिर्फ 1.3 के स्तर तक पहुंच गया था, जो चिंताजनक है। वहीं, साल 2005 में जापान का टीएफआर घटकर 1.26 के निचले स्तर पर पहुंच गया था। हालांकि, सरकारी कोशिशों के बाद साल 2010 में इसमें मामूली सुधार हुआ और ये 1.4 के स्तर तक पहुंचा।

बच्चे क्यों पैदा नहीं कर रहे जापानी?
जापान में पिछले कई सालों से लिव-इन रिलेशनशिप में काफी युवाओं ने रहना शुरू कर दिया है और ऐसे युवा अपनी जिंदगी तो जीने लगे हैं, लेकिन उन्होंने मां-बाप बनने से छुटकारा पा लिया है। जापान में शादी के बाहर बहुत कम बच्चे पैदा हो रहे हैं। यानि, युवा अपनी शारीरिक जरूरतों को पूरा करने के लिए भले ही साथ रहते हैं, लेकिन वो बच्चों को 'झंझट' मानने लगे हैं। 1950 के दशक के बाद से जापान में शादी के बाहर बच्चे का जन्म सभी जन्मों का लगभग 2% है। जापान की प्रजनन दर में गिरावट मुख्य रूप से कम युवा महिलाओं की शादी के कारण है। जापान में चरम प्रजनन उम्र (25 से 34) में अविवाहित रहने वाली लड़कियों का अनुपात 1970 तक स्थिर बना रहा, लेकिन 1975 तक ये अनुपात बढ़कर 21 प्रतिशत से उपर चला गया और आप ये जानकर हैरान हो जाएंगे कि साल 2020 में 25 से 29 साल की उम्र तक की 66 प्रतिशत लड़कियों ने शादी ही नहीं की है। वहीं, 30 से 34 साल की उम्र की 39 प्रतिशत लड़कियों ने शादी नहीं की है। जापान के लिए ये आंकड़ा चौंकाने वाला नहीं, बल्कि डराने वाला है।

शादी करने से क्यों हो रहा मोहभंग?
युवा जापानी महिलाएं अपने आर्थिक अवसरों में तेजी से सुधार के कारण शादी करने और बच्चे पैदा करने से भागने लगी हैं। जापान में साल 1980 के बाद से चार सालों वाले प्रोफेशनल कोर्स में लड़कियों के दाखिले में भारी वृद्धि दर्ज की गई और साल 2020 में जापान की 51 प्रतिशत लड़कियां चार वर्षीय कॉलेज प्रोफेशनल कोर्स में दाखिला लेने लगी हैं। वहीं, जापान में युवा महिलाओं की रोजगार दर में भी भारी वृद्धि हुई है। 25 साल से 29 साल तक की आयु वर्ग की महिलाओं की श्रम भागीदारी दर 1970 में 45% से लगभग दोगुनी होकर 2020 में 87% हो गई है। जिसका असर सीधे तौर पर जापानी समाज पर पड़ा है और जापान से विवाह की परंपरा का पतन होने लगा है। प्रोफेशनल लड़कियां अब शादी के 'बंधन' में बंधने के लिए तैयार ही नहीं हो रहे हैं। जापान की लड़कियों के लिए शादी करना, बच्चे पैदा करना, उनकी परवरिश करना, घर संभालना अब बहुत बड़ा बोझ बन गया है। इसके साथ ही जापानी समाज में घरेलू कार्य में पुरूषों का योगदान अभी भी काफी कम है और इसने लड़कियों के मन को शादी करने से और तोड़ा है, लिहाजा जापानी समाज का तानाबाना ही गड़बड़ाने लगा है।

लड़कियों के सामने क्या हैं समस्याएं?
जापान में एक तरफ जहां लड़कियों के लिए आर्थिक अवसर काफी ज्यादा बढ़ चुके हैं, वहीं जापानी समाज उस तरह से अपनी मानसिकता में परिवर्तन लाने में असफल रहा है। लिहाजा, प्रोफेशनल विवाहित महिलाओं के लिए अपने कामकाज और अपने घरेलू जीवन में तालमेल बिठाना काफी मुश्किल हो चुका है। जिन महिलाओं ने बच्चों को जन्म दिया है, उनके लिए अपने बच्चों को पालना एक 'मुसीबत' बन चुका है, लिहाजा जब प्रोफेशनल लड़कियां ऐसी महिलाओं को परेशान देखती हैं, तो फिर वो शादी करने की बात से ही मुकर जाती हैं।

जापान सरकार की कोशिशें
जापानी सरकार ने प्रजनन क्षमता में आई भारी गिरावट की समस्या से निजात पाने के लिए जापानी सरकार ने 1990 के दशक के मध्य में कम प्रजनन क्षमता ('शौशिका-ताइसाकु') को संबोधित करने वाले कार्यक्रमों की एक श्रृंखला शुरू की। इस योजना के तहत जापानी सरकार ने चाइल केयर संस्थानों की सेवाओं में विस्तार करना शुरू किया और वर्क-लाइफ बैलेंस बनाने के लिए भी कई योजनाएं शुरू कीं। लेकिन, इसका असर नहीं दिख रहा है। ऐसे में पिछले कुछ सालों से जापानी सरकारों ने जन्म से लेकर युवावस्था तक दीर्घकालीन नीति सहायता बनाने की वकालत की है। ताकि, बच्चों के जन्म होने के बाद से लेकर युवावस्था तक उसकी पूरी देखभाल सरकार करे।

तमाम सरकारी प्रयास हो रहे हैं फेल
प्रजनन दर में वृद्धि लाने के इन निरंतर और व्यापक प्रयासों के बावजूद जापान की नीतियां प्रजनन क्षमता में वृद्धि हासिल करने से कम हो गई हैं, जो जनसंख्या में गिरावट और उम्र बढ़ने के सामाजिक और आर्थिक प्रभावों को कम कर देगी। हालांकि, फिलहाल जापान सराकर की नीतियों ने प्रजनन दर में आने वाली गिरावट को रोक दिया है। दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसी अन्य पूर्वी एशियाई अर्थव्यवस्थाओं के विपरीत, जिनकी टीएफआर 2021 में घटकर क्रमशः 0.81 और 1.07 हो गई, जापान की दर 1.30 पर बनी हुई है। लेकिन, जापान जिन स्थितियों का अनुभव कर रहा है, उससे पता चलता है, कि जब किसी देश में एक बड़ी आबादी में और लगातार जन्म दर में कमी आने लगे, तो फिर उसे रोकना कितना मुश्किल हो जाता है। जापान में बुजुर्गों की आबादी में वृद्धि के कारण अगले कुछ दशकों में मौतों की संख्या में भारी इजाफा होने की उम्मीद है।

जापान के सामने क्या हैं उपाय?
इसका मतलब है कि देश के पास प्रजनन क्षमता को बनाए रखने और उम्मीद के मुताबिक प्रयासों को मजबूत करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। लिहाजा, एक्सपर्ट्स का कहना है, कि जापान सरकार को फौरन जनसंख्या में गिरावट से जुड़ी भारी सामाजिक और आर्थिक लागत को कम करने के लिए महिलाओं और जोड़ों को उनके काम और पारिवारिक भूमिकाओं को संतुलित करने में मदद करनी चाहिए। वहीं, जापान के श्रम बाजार को परिवार के अनुकूल बनने की जरूरत है, जबकि घर पर पुरूषों को महिलाओं के साथ घर की जिम्मेदारी निभानी ही होगी। वहीं, कार्यस्थल को महिलाओं के मुताबिक ढालना होगा और महिलाओं की समस्या को ध्यान में रखना होगा और ऐसे ही कदम उठाकर जापान की समाज में महिलाओं के साथ आने वाली परेशानियों को कम करते हुए जनसंख्या वृद्धि की तरफ बढ़ा जा सकता है।












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