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QUAD बैठक कैंसिल होने के बाद भी ऑस्ट्रेलिया क्यों गये पीएम मोदी, भारत में उठते सवालों का जवाब जानिए

पीएम मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच के संबंध काफी मजबूत हुए हैं। ऑस्ट्रेलिया और भारत, दोनों के लिए सबसे बड़ी चुनौती चीन है, लिहाजा दोनों और करीब आ रहे हैं।

PM Modi in Australia

PM Modi in Australia: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने तीन देशों के एशिया-प्रशांत दौरे के अंतिम पड़ाव स्थल ऑस्ट्रेलिया पहुंच गए हैं, जहां उनका भव्य स्वागत किया गया है।

जापान के साथ प्रधानमंत्री मोदी का विदेशी दौरा शुरू हुआ था, जो पापुआ न्यू गिनी होते हुए ऑस्ट्रेलिया के अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुका है। जिसको लेकर कई लोगों का कहना है, कि आखिर पीएम मोदी क्वाड की बैठक कैंसिल होने के बाद भी ऑस्ट्रेलिया क्यों गये हैं?

2014 में प्रधानमंत्री का पद संभालने के बाद मोदी की ऑस्ट्रेलिया की यह दूसरी आधिकारिक यात्रा है। लिहाजा, ये जानना जरूरी है, कि आखिर पीएम मोदी का ऑस्ट्रेलिया दौरा इतना महत्वपूर्ण क्यों है? आइये समझते हैं

पीएम मोदी क्यों गये ऑस्ट्रेलिया?

ऑस्ट्रेलिया में प्रधानमंत्री मोदी अपने ऑस्ट्रेलियाई समकक्ष एंथनी अल्बनीस के साथ द्विपक्षीय बैठक करने वाले हैं, जो दोनों देशों के बीच के संबंध को बढ़ाने के लिए काफी जरूरी है।

ऑस्ट्रेलिया सरकार ने कहा है, कि इस द्विपक्षीय बैठक के दौरान, दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश पर चर्चा की जाएगी। इसके अलावा, "एक व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते के माध्यम से दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ावा देने के प्रयासों को मजबूत करने, और लोगों से लोगों के बीच संपर्क, नवीकरणीय ऊर्जा, और रक्षा और सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने के लिए बातचीत होगी।

बयान में कहा गया है, कि भारतीय नेता कैनबरा के "भारत के साथ बढ़ते व्यापार और निवेश संबंधों को आगे बढ़ाने और मार्च में मुंबई में आयोजित ऑस्ट्रेलिया-भारत सीईओ फोरम से अवसरों को आगे बढ़ाने के लिए ऑस्ट्रेलियाई व्यापारिक नेताओं के साथ बातचीत करेंगे।"

इसके अलावा, बहुत संभावना है कि पीएम मोदी और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री अल्बनीज के बीच होने वाली बैठक में खालिस्तानियों के उपद्रव का मुद्दा उठाया जाएगा।

पिछले कुछ महीनों में कथित तौर पर खालिस्तानी समर्थकों ने ऑस्ट्रेलिया में भारतीय वाणिज्य दूतावास के साथ साथ हिन्दू मंदिरों को निशाना बनाया है। वहीं, इस सवाल पर, कि क्या पीएम मोदी और ऑस्ट्रेलियाई पीएम के बीच खालिस्तान मुद्दे पर बात होगी? भारत के विदेश सचिव विनय क्वात्रा ने कहा, "मैं केवल इतना कहूंगा, कि हमारे समाज में सद्भाव प्राप्त करने और सुरक्षा के मुद्दों सहित द्विपक्षीय जुड़ाव के सभी मुद्दों पर चर्चा की जाएगी"।

ये एक इशारा है, कि दोनों नेताओं के बीच खालिस्तानियों के उपद्रव को लेकर बात होगी और भारत की तरफ से ऑस्ट्रेलिया से कहा जाएगा, कि खालिस्तानियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।

सिडनी में तीन दिन बिताने वाले प्रधानमंत्री मोदी का गवर्नर जनरल के आधिकारिक आवास एडमिरल्टी हाउस में रस्मी स्वागत भी किया जाएगा।

भारतीय समुदाय से मुलाकात करेंगे पीएम

प्रधानमंत्री मोदी आज सिडनी के कुडोस बैंक एरिना में इंडियन ऑस्ट्रेलियन डायस्पोरा फाउंडेशन (आईएडीएफ) द्वारा आयोजित सामुदायिक कार्यक्रम में प्रवासी भारतीयों को संबोधित करेंगे।

समाचार एजेंसी एएफपी के मुताबिक, इस कार्यक्रम में कम से कम 18,000 लोगों के शामिल होने की संभावना है। ब्रिटिश अखबार द गार्जियन ने बताया है, कि विभिन्न ऑस्ट्रेलियाई राज्यों के समर्थकों को निजी तौर पर चार्टर्ड उड़ानों के माध्यम से समारोह में लाया जा रहा है।

आईएडीएफ के निदेशक जय शाह ने यूके के अखबार को बताया, कि "वह (पीएम मोदी) अपने अनुकरणीय और दूरदर्शी नेतृत्व के लिए इस विशाल भीड़ को आकर्षित करते हैं, जो भारत को एक अभूतपूर्व गति से बदल रहे हैं और विकसित कर रहे हैं।"

उन्होंने कहा, कि "पीएम मोदी इस समय भारत के सबसे लोकप्रिय नेता हैं और न केवल भारत में, बल्कि विदेशों में रहने वाले कई भारतीयों में भी उनकी बड़ी अपील और अनुसरण है।"

इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार, ऑस्ट्रेलिया में भारतीय समुदाय, दूसरा सबसे बड़ा प्रवासी समुदाय है और ऑस्ट्रेलिया की कुल जनसंख्या में करीब 3 प्रतिशत भारतीय हैं।

भारत-ऑस्ट्रेलिया में व्यापार है अहम

प्रधानमंत्री मोदी ने साल 2014 में पहली बार ऑस्ट्रेलिया का दौरा किया था और उनसे पहले राजावी गांधी बतौर प्रधानमंत्री ऑस्ट्रेलिया गये थे। उस यात्रा के दौरान, तत्लानीन भारतीय प्रधान मंत्री राजीव गांधी ने कहा था, कि "ऑस्ट्रेलिया हमारी दृष्टि की परिधि में नहीं, बल्कि हमारे विचारों के केंद्र में होगा।"

तब से, भारत और ऑस्ट्रेलिया ने अपने रिश्ते को मजबूत किया है। पिछले साल अप्रैल में, दोनों देशों ने एक ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट, आर्थिक सहयोग और व्यापार सौदे (ईसीटीए) पर हस्ताक्षर किए, जो कि दिप्रिंट के अनुसार, पिछले 10 सालों में भारत के लिए इस तरह का पहला व्यापार सौदा था।

लिहाजा, भारत के लिए ऑस्ट्रेलिया की महत्ता काफी ज्यादा बढ़ गई है।

साल 2022 में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच दो तरफा व्यापार का मूल्य 46.5 अरब ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (31 बिलियन अमेरिकी डॉलर) था। एएफपी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, कि दिसंबर में प्रभावी हुए मुक्त व्यापार सौदे के बाद दोनों देशों के बीच के व्यापार में भारी उछाल आएगा।

इसके अलावा, भारत के खनिज बिदेश लिमिटेड (KABIL) और ऑस्ट्रेलिया के क्रिटिकल मिनरल्स ऑफिस ने खनन क्षेत्र और महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिजों के प्रसंस्करण में सहयोग के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर भी हस्ताक्षर किए हैं।

ग्लोबल ऑर्डर के कंसल्टिंग एडिटर और इंडिया फाउंडेशन के प्रतिष्ठित फेलो, रामी निरंजन देसाई ने दिप्रिंट के लिए लिखा है, कि मोदी और अल्बनीज के बीच द्विपक्षीय वार्ता अगले पांच वर्षों में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच व्यापार बढ़ाने के एजेंडे को "फास्ट-ट्रैक" कर सकती है।

भारत सरकार की कोशिश है, कि महत्वपूर्ण खनिजों को लेकर चीन पर निर्भरता कम से कम किया जाए और ऑस्ट्रेलिया उसमें बहुत बड़ी भूमिका निभा सकता है, लिहाजा पीएम मोदी अपने दौरे के दौरान, खनिज संपद्दा को लेकर अहम बातचीत करने वाले हैं।

भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंध- सामरिक महत्व

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती आक्रामकता और आर्थिक रास्ते बनाने की कोशिशों के बीच पीएम मोदी ऑस्ट्रेलिया का दौरा कर रहे हैं।

इससे पहले पीएम मोदी ने पापुआ न्यू गिनी में फोरम फॉर इंडिया-पैसिफिक आइलैंड्स कोऑपरेशन के 14 नेताओं से कहा था, कि नई दिल्ली "स्वतंत्र, खुले और समावेशी इंडो पैसिफिक" के लिए प्रतिबद्ध है।

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    वहीं, इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, नई दिल्ली और कैनबरा ने शिक्षा के क्षेत्र में भी संबंधों में सुधार किया है, जो दोनों राष्ट्रों के बीच "द्विपक्षीय संबंधों का आधार" है। भारतीय छात्रस, ऑस्ट्रेलिया में अंतरराष्ट्रीय छात्रों का दूसरा सबसे बड़ा समूह हैं। जनवरी 2023 के अंत तक, ऑस्ट्रेलिया में लगभग 70,000 भारतीय छात्र पढ़ रहे थे। कैनबरा और नई दिल्ली ने हाल ही में दोनों देशों की योग्यताओं की पारस्परिक मान्यता पर फैसला लिया है।

    ऑस्ट्रेलिया इंडिया इंस्टीट्यूट के अकादमिक फेलो डॉ. प्रदीप तनेजा ने द गार्जियन को बताया, कि क्वाड रद्द होने के बावजूद मोदी का अपनी यात्रा जारी रखना दिखाता है, कि कैनबरा और नई दिल्ली के "हित आज इतिहास में पहले से कहीं अधिक मेल खाते हैं"। लिहाजा, पीएम मोदी की ऑस्ट्रेलिया दौरा भारत के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण है और आने वाले वक्त में इससे भारत को काफी फायदा होने वाला है।

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