Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

अडानी की कंपनी ने ऑस्ट्रेलिया में पादरी के बेटे बेन पेन्निंग्स पर क्यों किया मुक़दमा?

अडानी
SAM PANTHAKY/AFP/GETTY IMAGES
अडानी

ऊर्जा क्षेत्र की दिग्गज भारतीय कंपनी अडानी के साथ ऑस्ट्रेलिया में एक विवादित कोयला खदान को लेकर एक रिटायर्ड ईसाई पादरी का बेटा क़ानूनी लड़ाई लड़ रहा है.

अडानी की कंपनी ने बेन पेन्निंग्स नामक इस शख्स पर अपने कारोबार और इससे जुड़े ठेकेदारों को लगातार धमकाने का मामला दर्ज किया है.

कंपनी और बेन के बीच यह टकराव नॉर्थ गैलिली बेसिन की कारमाइकल खदान को लेकर है. यह ऑस्ट्रेलिया के क्वीन्सलैंड राज्य में ब्रिसबेन से उत्तर-पश्चिम में क़रीब 1200 किलोमीटर पर स्थित है.

कंपनी कोयले को भारत भेजना चाहती है लेकिन इसे लेकर यहां कई वर्षों से विरोध चल रहा है और हालत ये है कि बीते कुछ वर्षों के दौरान यह ऑस्ट्रेलिया का सबसे बड़ा विवादास्पद प्रोजेक्ट बन गया है.

इस प्रोजेक्ट का विरोध करने वालों में डर है कि इससे होनेवाला प्रदूषण, औद्योगीकरण और जहाज़ों के अत्यधिक आवागमन से ऑस्ट्रेलिया की ग्रेट बैरियर रीफ़ को नुकसान पहुंचेगा, जो यूनेस्को की विश्व धरोहरों की सूची में शामिल है.

भारी विरोध के बावजूद ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने बीते वर्ष इस प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी थी.

यह कोयला खदान जलवायु परिवर्तन और ऊर्जा नीति को लेकर ऑस्ट्रेलिया में मतभेद का प्रतीक बन गई है. इसका दुनिया की सबसे बड़ी खदानों में से एक बनना तय है.

https://twitter.com/BenPennings/status/1310505120933658625

कौन हैं पेन्निंग्स?

पेन्निंग्स विरोध कर रहे समूह गैलिली ब्लॉकेज के एक प्रवक्ता थे, जिसने अडानी, इसके सप्लायर्स और निजी ठेकेदारों के कामों को रोकने के लिए आंदोलन चला रखा है.

यह समूह बहुराष्ट्रीय खनन कंपनियों के ऐसे प्रोजेक्ट और अन्य फ़र्मों का भी विरोध करती है.

पेन्निंग्स खुल कर क़ानून की सविनय अवज्ञा के ज़रिए विरोध के दायरे को और आगे बढ़ाने की वकालत करते हैं.

उन्होंने बीबीसी से कहा, "आज महिलाएं वोट दे रही हैं या आदिवासियों को पूरी तरह से मानव के रूप में देखा जा रहा है, तो ये लोगों के क़ानून तोड़ने से ही बने हैं. यह प्रजातंत्र और विकास का एक अहम हिस्सा है."

30 सालों से, वे सामाजिक और पर्यावरणीय कारकों के प्रबल समर्थक रहे हैं. वो ग्रीनपीस रेनबो वारियर टू पर भी कुछ समय के लिए थे. वो पर्यावरण पर केंद्रित एक पार्टी ऑस्ट्रेलिया ग्रीन्स की तरफ से ब्रिसबेन के मेयर के पद का चुनाव भी लड़ चुके हैं.

सोशल साइंस से ग्रेजुएट पेन्निंग्स अब एक ऐसी लड़ाई में व्यस्त हैं, जो असाधारण है.

बेन पेन्निंग्स
FB/BenPennings
बेन पेन्निंग्स

"अडानी मेरे परिवार को दंड देने पर तुले हैं"

अडानी उनसे कथित धमकी और साजिश के भरपाई के लिए उनसे हर्जाना मांग रहे हैं.

एक जज ने एक अस्थायी आदेश दिया है जिससे कारमाइकल खान के ख़िलाफ़ अभियान चलाने की पेन्निंग्स की क्षमता सीमित हो जाती है.

उन्होंने आदेश का पालन किया है और अभी तक यह तय नहीं किया है कि वो इसके ख़िलाफ़ अपील करेंगे या नहीं.

उन्हें डर है कि ये मामला उन्हें आर्थिक रूप से बर्बाद कर सकता है और वे दिवालिया हो सकते हैं.

पेन्निंग्स कहते हैं, "ऐसा लगता है कि मुझ पर केस करके अडानी मेरे परिवार को दंड देने पर तुले हैं."

हालांकि, अपने एक बयान में अडानी समूह ने कहा है कि क़ानूनी कार्रवाई पेन्निंग्स को कष्ट देने के लिए नहीं की गई है, बल्कि अपना कारोबार करने के अधिकार की रक्षा के लिए की गई है.

ब्रिसबेन से बीबीसी से बातचीत में खदान विरोध अभियान चलाने वाले पेन्निंग्स कहते हैं कि पर्यावरण को लेकर उनकी सक्रियता का आधार उनके पिता के ईसाई सिद्धांत हैं.

पेन्निंग्स कहते है, "वे अपने सामाजिक कर्तव्यों को निभाते थे. मुझमें भी कुछ वैसा ही है लेकिन एक अलग तरीके से. मैं समझता हूं कि धार्मिक समुदाय की जगह पर्यावरण आंदोलन है और लोग हैं जो न्याय की परवाह करते हैं और जो उस व्यक्ति का समर्थन करने के लिए तैयार हैं जिसे 15 बिलियन डॉलर की स्वामित्व वाली एक कंपनी ने टारगेट कर रखा है."

अडानी
AFP
अडानी

ऑस्ट्रेलिया में कोयला अभी भी 'किंग'

अक्षय ऊर्जा में संभावनाओं और सोलर, विंड पावर में तेज़ी से हो रही प्रगति के बावजूद ऑस्ट्रेलिया में कोयला अभी भी 'किंग' है. यहां की खदानों से निकाला गया 80 फ़ीसदी कोयला निर्यात किया जाता है खास कर जापान, चीन, कोरिया और भारत में. लेकिन कोरोना महामारी के दौरान इसकी कीमतों में कमी आई है.

ऑस्ट्रेलिया में एक दशक पहले तक 80 फ़ीसदी बिजली का उत्पादन कोयले की मदद से होता था जो गैस और अक्षय ऊर्जा के आने के बाद से कम हुआ है. फिर भी आज दो तिहाई बिजली कोयले से ही बनती है.

ग्लोबल वार्मिंग को कम करने के लिए कोयले की उपयोगिता को चरणबद्ध तरीके से कम करना महत्वपूर्ण माना जाता है.

ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन का कहना है कि ऑस्ट्रेलिया का उत्सर्जन दुनिया के कुल उत्सर्जन का केवल 1.3 प्रतिशत है, हालांकि संरक्षणवादी इस आंकड़े को विवादित मानते हैं.

उत्तर क्वीन्सलैंड के ऊपर अपने विमान से रोबी काटर मतदाता क्षेत्र का सर्वे करते हैं जो कई देशों से बड़ा है. राज्य से सांसद भी काटर की ऑस्ट्रेलियाई पार्टी से ही हैं.

इतने बड़े इलाके में अपने क्षेत्र का हवाई सर्वे करना कहीं आसान है और काटर का मानना है कि इस क्षेत्र के संसाधनों का दोहन किया जाना चाहिए.

उन्होंने बीबीसी से कहा, "नॉर्थ क्वीन्सलैंड में कोयला खदान नौकरियों का पर्याय है. आप लोगों के समृद्धि के अधिकार के साथ खिलवाड़ नहीं कर सकते हैं. कोरोना वायरस की वजह से यह (कोयला) अर्थव्यवस्था के पुनर्नि पुनर्निर्माण की कोशिश में यह बेहद अहम है."

अडानी
AFP
अडानी

विरोध के बीच अडानी समूह का क्या है कहना?

अडानी ऑस्ट्रेलिया ने कहा कि उन्होंने 1500 स्थानीय लोगों को क्वीन्सलैंड में नौकरियां दी हैं और कई कंपनियों को क़रीब 1.5 अरब अमरीकी डॉलर का कॉन्ट्रैक्ट भी दिया है.

अडानी के प्रोजेक्ट के ख़िलाफ़ चल रहे अभियान के बारे में पूछने पर वे कहते हैं, "मैं अक्सर लोगों से पूछता हूं कि क्वीन्सलैंड ने कब कोयले से नफ़रत करना शुरू कर दिया? पर्यावरण कार्यकर्ताओं के लिए यह बिजली की छड़ी जैसा बन गया है."

"खदान के विरोध में विपक्ष ने कई निरर्थक बातें की है. हम दो हज़ार किलोमीटर दूर रह रहे लोगों से यह सुनकर परेशान हो जाते हैं कि हमें क्या करना चाहिए. और वो भी तब जब इनमें से अधिकतर के पास इस इलाक़े के बारे में कम जानकारी होती है."

अडानी ने कहा है कि उनकी खदान सरकारी राजस्व में अरबों डॉलर की कमाई करेगी जिसकी मदद से क्वीन्सलैंड में नए स्कूल, अस्पताल और सड़कें बनाई जा सकती हैं.

बीते वर्ष ऑस्ट्रेलिया में चुनाव अभियान के दौरान ऑस्ट्रेलियाई पर्यावरण के गॉडफादर बॉब ब्राउन के नेतृत्व में एक काफ़िला क्वीन्सलैंड के पूर्वी तट तक गया ताकि "ख़तरनाक और विनाशकारी" अडानी की इस खान से होने वाले खतरे और विनाश से लोगों को आगाह किया जाए. उनका कारवां अपने रास्ते में खान समर्थक और विरोधियों से मिला.

ऑस्ट्रेलियाई ग्रीन्स के पूर्व नेता बीबीसी न्यूज़ को बताते हैं, "सर्वे बताता है कि अधिकतर ऑस्ट्रेलियाई अडानी की खदान को नहीं चाहते हैं लेकिन वहां की राजनीति में यह नहीं दिखता है."

उनका मानना है कि ऑस्ट्रेलिया को देश की ओर से आंदोलन करने के लिए बेन पेन्निंग्स जैसे असंतुष्टों की आवश्यकता है.

ब्राउन अडानी की अदालती कार्रवाई की आलोचना करते हैं.

वे जानते हैं कि वे बड़े पैमाने पर इस प्रदूषणकारी कोयला खदान के ख़िलाफ़ पर्यावरण के तर्क से अदालत में नहीं जीत सकते, इसलिए उन्हें वैसे लोगों को इससे बाहर निकालना होगा जो ऐसे तर्क दे रहे हैं.

वो कहते हैं,"मैं भयभीत हूं क्योंकि यह एक आज़ाद देश में लोगों की बुनियादी लोकतांत्रिक आवश्यकता के अधिकार में कटौती करता है जो सार्वजनिक हित में जानकारी इकट्ठा करने और उसे लोगों तक पहुंचाने के लिए काम करने में सक्षम हैं."

अडानी समूह इस बात पर ज़ोर देता है कि पेन्निंग्स के ख़िलाफ़ अदालती कार्रवाई ऑस्ट्रेलियाइयों की बोलने की स्वतंत्रता को सीमित करना नहीं है.

अडानी समूह ने इस पर बयान दिया, "अदालत और अपने क़ानूनी सलाहकारों के मुताबिक अडानी समूह पेन्निंग्स के साथ बातचीत से पहले मीडिया के माध्यम से कोई टिप्पणी करने में सक्षम नहीं है."

फिलहाल अडानी और उसके सबसे कटु आलोचकों में से एक के बीच क़ानूनी गतिरोध जारी है.

पेन्निंग्स कहते हैं, "वे एक धनी और मज़बूत प्रतिद्वंद्वी हैं, उनका संकल्प दृढ़ भी है... तो हमारा भी है."

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूबपर फ़ॉलो भी कर सकतेहैं.)

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+