क्या वाकई चीन की मीडिया के लिए शी जिनपिंग हैं चीन के 'द लास्ट लीडर'
बीजिंग। चीन में मीडिया पर लगी सेंसरशिप की बात तो हर किसी को मालूम है लेकिन जो ताजा घटना चीन में हुई है, उसका सेंसरशिप से कोई लेना-देना नहीं है।
चीन में उस समय बड़ी अजीबो-गरीबों स्थिति पैदा हो गई जब यहां की मीडिया राष्ट्रपति शी जिनपिंग के लिए 'द लास्ट लीडर' कह डाला।
चीन में हुई इस घटना की जानकारी पूरी दुनिया में फैलने लगी। हर कोई जानने के लिए बेकरार था कि आखिर मीडिया ने ऐसा क्यों किया।
बाद में मालूम चला कि यह सिर्फ एक टाइपिंग की गलती थी। यह गलती किसी और से नहीं बल्कि चीन की आधिकारिक न्यूज एजेंसी शिन्हुआ से हुई थी।
एजेंसी के लिए भी यह बहुत ही परेशान करने वाली और अहसज स्थिति थी। बाद में इस गलती को सुधारा गया लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

शिन्हुआ ने पैदा किया कंफ्यूजन
शिन्हुआ के एक आर्टिकल में टाइपिंग की गलती से राष्ट्रपति शी जिनपिंग को ‘द लास्ट लीडर ऑफ चाइना' बता दिया गया। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक शिन्हुआ ने बाद में इस आर्टिकल को एडिट किया और फिर बाकी मीडिया ऑर्गनाइजेशंस को भी गलती ठीक करने के लिए कहा।

लास्ट लीडर नहीं 'टॉप लीडर'
शिन्हुआ ने सभी मीडिया को आदेश दिया कि इस गलती को तुरंत ठीक करें। इसमें 'द लास्ट लीडर' की जगह 'टॉप लीडर' कर लें। यह आर्टिकल रविवार को पब्लिश हुआ था।

मीडिया और वेबसाइट्स पर सख्ती
राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने वेबसाइट और दूसरे मीडिया मीडियम पर काफी नियंत्रण लगाया हुआ है। राष्ट्रपति जिनपिंग ने वर्ष 2013 में चीन का शासन संभाला था।

जर्नलिस्ट्स का सस्पेंशन
चीन में दिसंबर में चार जर्नलिस्ट्स को सस्पेंड कर दिया गया था। इस सस्पेंशन की वजह थी राष्ट्रपति जिनपिंग के अफ्रीकी दौरे के दौरान उनके इस्तीफे वाली खबर पब्लिश कर देना।

मीडिया पर बढ़ी सेंसरशिप
वर्ष 2015 में चीन में सेंसरशिप और पत्रकारों की गिरफ्तारी की घटनाओं में इजाफा हुआ है। एक रिपोर्ट के मुताबिक करीब 29 जर्नलिस्ट्स को अलग-अलग अपराधों के लिए जेल भेजा गया है।












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