चीन की मीठी-मीठी बातों में छिपी है गहरी साजिश, अब चला ये नया पैंतरा

नई दिल्ली। एक तरफ जहां चीन पाकिस्तान में सीपेक के निर्माण में काफी तेजी से लगा है तो दूसरी तरफ वह चाहता है कि भारत जापान के साथ मिलकर एशिया-अफ्रीका ग्रोथ कॉरिडोर यानी AAGC प्रोजेक्ट को तेज गति से आगे नहीं बढ़ाए। चीन चाहता है कि भारत इस प्रोजेक्ट को धीमी गति से करे। इस प्रोजेक्ट के जरिए ब्रिक्स देशों को एक साथ जोड़ने की कोशिश हो रही है। दरअसल चीन ब्रिक्स देशों को जोड़ते हुए भारत व दक्षिण अफ्रीका को एक साथ मिलाना चाहता है, ताकि वह जापान को इस प्रोजेक्ट से बाहर का रास्ता दिखा सके। लिहाजा चीन भारत को इस मसले पर फुसलाना चाहता है, ताकि वह इस प्रोजेक्ट की रफ्तार को धीमा कर दे।

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चीन का प्रभाव होगा कम

चीन का प्रभाव होगा कम

अगर यह प्रोजेक्ट ब्रिक्स देशों से मिल गया तो भारत का दक्षिण अफ्रीका पर प्रभाव कम हो जाएगा। इस प्रोजेक्ट के जरिए भारत, रूस और दक्षिण अफ्रीका को जोड़ा जाएगा। जिसपर चीन की कई असहमतियां हैं। चीन की रूस से पहले ही गैस पाइपलाइ को लेकर तकरार बनी हुई है। दोनों ही देशों के बीच पाइपलाइन प्रोजेक्ट व ऊर्ज मिश्रण सहित कई मुद्दों पर आम राय नहीं बन पाई है।

नए मार्ग के निर्माण की कोशिश

नए मार्ग के निर्माण की कोशिश

यहां गौर करने वाली बात यह है कि AAGC की योजना को भारत और जापान ने बनाया था, जिसे एफ्रिकन डेवेलेपमेंट बैंक और कई अन्य अफ्रीकी देशों ने अपना समर्थन दिया था, खुद दक्षिण अफ्रीका इस योजना में शामिल है। अंतर्राष्ट्रीय मामलों के जानकारों की मानें तो उनका कहना है कि भारत अब चीन पर निर्भर नहीं रहना चाहता है। लिहाजा इस प्रोजेक्ट के जरिए दक्षिण, दक्षिण-पूर्व और पूर्वी एशिया, अफ्रीका व ओशिऑनिया को मिलाया जाएगा, ताकि पुराने समुद्री रास्तों को खोजकर नए समुद्री कोरिडोर का निर्माण किया जा सके, जिसका इस्तेमाल आजाद और खुले इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में किया जा सके। चीन के लिए यह प्रोजेक्ट इस लिहाज सी भी बड़ी चुनौती है क्योंकि अगर यह प्रोजेक्ट पूरा हुआ तो अफ्रीकी महाद्वीप पर उसका प्रभाव कम हो जाएगा। लिहाजा चीन इस प्रोजेक्ट को धीमा करने में अपनी पुरजोर कोशिश कर रहा है। यही वजह है कि चीन इस मुद्दे को ब्रिक्स के मुद्दे से जोड़ रहा है ताकि भारत इस प्रोजेक्ट की रफ्तार को धीमा करे।

चीन चल रहा है अपनी कूटनीतिक चाल

चीन चल रहा है अपनी कूटनीतिक चाल

चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स में लिखे एक लेख में कहा गया है कि ब्रिक्स देशो को इस पर विचार करना चाहिए कि जो अवसर व चुनौतियां अफ्रीका में पेश की गई हैं उसे कैसे बेहतर तरीके से इस्तेमाल किया जाए और इसका फायदा उठाया जाए। अपने एजेंडे के तहत चीन ब्रिक्स देशों के बैंक न्यू डेवेलेपमेंट बैंक का भी इस्तेमाल अफ्रीकी देशों को लोन देने में कर रहा है। यहां यह नहीं भूलना चाहिए कि जिन देशों को कर्ज देने की नीति के तहत चीन आगे बढ़ रहा है वह देश मिस्र और गुएना और वह ब्रिक्स का हिस्सा नहीं हैं। बावजूद इसके चीन उन्हें विश्लेषक के तौर पर न्योता दे रहा है।

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