यूक्रेन संकट के बहाने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में किसे डराने की कोशिश कर रहा है चीन ?
बीजिंग, 20 मार्च: हिंद-प्रशांत महासागर क्षेत्र में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के बीच बढ़ते तालमेल से चीन को मिर्ची लगी हुई है। चीन का कहना है कि इस इलाके में अमेरिका जो रणनीति अपना रहा है, वह उसी तरह का है, जिस तरह का मंसूबा नाटो ने पूर्वी यूरोप में अपने विस्तार का पाल रखा है; और जिसका परिणाम यूक्रेन संकट के रूप में सामने आया है। चीन लगातार यूक्रेन का डर दिखाकर हिंद-प्रशांत क्षेत्र के देशों को डराने की कोशिशों में जुटा हुआ है। आइए देखते हैं कि अब चीन ने फिर से क्या नरेटिव सेट करने की कोशिश की है, जिसे भारत पहले ही खारिज कर चुका है।

यूक्रेन का संकट एक गंभीर चेतावनी है-चीन
चीन के एक वरिष्ठ राजनयिक ने कहा है कि अमेरिका की हिंद-प्रशांत रणनीति उतनी ही 'खतरनाक' है, जितनी की नाटो के यूरोप में पूरब की ओर विस्तार की उसकी मंशा है, जिसके चलते रूस ने यूक्रेन के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की है। शनिवार को शिंघुआ यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर इंटरनेशनल सिक्योरिटी एंड स्ट्रैटजी की ओर से आयोजित इंटरनेशनल फोरम ऑन सिक्योरिटी एंड स्ट्रैटजी को संबोधित करते हुए चीन के उप विदेश मंत्री ली यूचेंग ने कहा, 'सोवियत संघ के विघटन के बाद नाटो को वार्सा संधि के साथ इतिहास में डाल दिया जाना चाहिए था।' उन्होंने कहा कि 'लेकिन, इसे तोड़ने की जगह नाटो मजबूत होता गया और बढ़ता गया। इस रास्ते पर चलने के नतीजे का अंदाजा लगाया जा सकता है। यूक्रेन का संकट एक गंभीर चेतावनी है।'

हिंद-प्रशांत रणनीति भी नाटो जितनी खतरनाक-चीनी उप विदेश मंत्री
चीनी मंत्री ने साफ तौर पर कहा कि यूक्रेन को नाटो में शामिल करने की योजना के चलते ही रूस की असुरक्षा की भावना बढ़ी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का फैसला किया। यूक्रेन पर रूसी हमले के बाद से चीन इसपर रूस के खिलाफ कुछ भी कहने से बचता रहा है। ली पहले भारत में चीन के राजदूत रह चुके हैं और माना जा रहा है कि इस साल शी जिनपिंग उन्हें ही वांग यी की जगह विदेश मंत्री बना सकते हैं। उन्होंने यूक्रेन की हालात के लिए भी नाटो पर तंज कसा और कहा कि कई बार ज्यादा सुरक्षित होने की उम्मीद पाल लेने में बहुत बड़ी असुरक्षा में घिरने का भी खतरा रहता है। इसके बाद उन्होंने चीन की भड़ास निकालते हुए जो कुछ कहा उसका मतलब ये है कि, 'हिंद-प्रशांत रणनीति भी उतनी ही खतरनाक है जितनी की नाटो की यूरोप के पूरब में विस्तार की रणनीति। '

किसे डराने की कोशिश कर रहा है चीन ?
चीन के मंत्री के मुताबिक, 'अगर इसे अनियंत्रित छोड़ दिया गया, तो यह अकल्पनीय नतीजे दिखाएगा, और आखिरकार एशिया-प्रशांत को रसातल में धकेल देगा।' वो बोले कि 'एशिया में हमें भविष्य को अपने हाथों में मजबूती के साथ रखना चाहिए, स्वतंत्र, संतुलित और विवेकपूर्ण विदेश नीतियों पर चलना चाहिए और एशिया-प्रशांत क्षेत्रीय एकीकरण की प्रक्रिया में एकता के जरिए शक्ति जुटानी चाहिए।' दरअसल, अमेरिका, भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया के बीच क्वाड गठबंधन के तैयार होने के बाद जैसे ही हिंद-प्रशांत क्षेत्र में साझा रणनीति की उम्मीद ने रफ्तार पकड़ी है, चीन ने इसे नाटो का एशियाई स्वरूप बताना शुरू कर दिया है। इससे पहले चीनी विदेश मंत्री वांग यी भी इसे चीन को 'दबाने' के लिए एशियन नाटो तैयार करने की दलील दे चुके हैं। उन्होंने कहा था, 'हिंद-प्रशांत रणनीति का असल लक्ष्य नाटो का एक हिंद-प्रशांत वर्जन स्थापित करना है।'

भारत इस थ्योरी को कर चुका है खारिज
इससे पहले विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी क्वाड को एशियाई नाटो बताने की कवायद को खारिज करते हुए कहा था कि कुछ 'इच्छुक पार्टियों' की बातों में नहीं पड़ना चाहिए। उन्होंने कहा था कि 'क्वाड उन चार देशों का एक समूह है, जिनके हित समान हैं, मूल्य समान हैं, आपस में एक कंफर्ट की स्थिति है, जो कि हिंद-प्रशांत के चार कोनों में स्थित हैं, जिसने पाया है कि दुनिया में कोई भी देश, यहां तक अमेरिका भी सभी वैश्विक चुनौतियों से अकेले निपटने में सक्षम नहीं है।' उन्होंने कहा था कि इसे एशियन-नाटो बताने वाले की बातों के चक्कर में नहीं पड़ना चाहिए।












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