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Iran President Election: ईरान में कौन बनेगा अगला राष्ट्रपति, जानिए किन लोगों को मिली चुनाव लड़ने की इजाजत?

Iran President Election 2024: इब्राहिम रईसी की हेलीकॉप्टर हादसे में दु:खद मौत के बाद ईरान में नये राष्ट्रपति के लिए 28 जून को चुनाव होने जा रहे हैं और जिन उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने की इजाजत दी गई है, उनके नाम फाइनल कर दिए गये हैं। आपको बता दें, कि ईरान का सर्वोच्च पद सुप्रीम लीडर का होता है, जो अभी अयातुल्ला अली खामेनेई हैं, और राष्ट्रपति दूसरा सबसे शक्तिशाली पद होता है।

राष्ट्रपति पद के लिए छह उम्मीदवारों के नाम को मंजूरी दी गई है, और ये सभी नाम, सुप्रीम लीडर और ईरानी राजनीतिक व्यवस्था के समर्थक और वफादार हैं। लिहाजा, आईये जानते हैं कि ईरान में अगला राष्ट्रपति कौन बन सकता है?

Iran President Election 2024

ईरान राष्ट्रपति चुनाव में कौन कौन मैदान में?

- मोहम्मद बाघेर गालिबफ - ईरान के संसदीय वक्ता, तेहरान के पूर्व मेयर और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के पूर्व एयरफोर्स कमांडर

- सईद जलीली - एक्सपीडिएंसी डिस्कर्नमेंट काउंसिल के सदस्य, पूर्व मुख्य परमाणु वार्ताकार

- अलीरेजा जकानी - तेहरान के मेयर

- मसूद पेजेशकियन - संसद सदस्य

- मुस्तफा पूरमोहम्मदी - पूर्व आंतरिक और न्याय मंत्री

- अमीर-होसैन गाजीजादेह हाशमी - ईरान के शहीदों और बुजुर्ग मामलों के फाउंडेशन के प्रमुख

Iran President Election 2024

उम्मीदवारों को कैसे चुना जाता है?

राष्ट्रपति चुनाव का ऐलान होने के बाद जिन लोगों को चुनाव में खड़ा होना होता है, वो सबसे पहले रजिस्ट्रेशन करवाना पड़ता है और फिर उन सभी उम्मीदवारों के नामों की जांच गार्जियन काउंसिल करता है। गार्जियन काउंसिल ही अंतिम फैसला लेता है, कि कौन चुनाव लड़ सकता है कौन नहीं। गार्जियन काउंसिल में 12 सदस्य होते हैं, जिसे ईरान में काफी शक्तिशाली माना जाता है।

कितने उम्मीदवारों के नाम किए गये खारिज?

28 जून को होने वाले चुनाव में गार्जियन काउंसिल ने ज्यादातर उम्मीदवारों के रजिस्ट्रेशन को खारिज कर दिया है। कुल मिलाकर 74 लोगों ने नामांकन दाखिल किया था, जिनमें सिर्फ 6 लोगों के नाम तय किए गये हैं। जिन लोगों के नाम खारिज किए गये हैं, उनमें से कई प्रसिद्ध चेहरे हैं।

सबसे प्रसिद्ध चेहरों में पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद हैं, जिन्होंने 2005 से 2013 के बीच राष्ट्रपति पद संभाला था। उनके अलावा, पूर्व संसद अध्यक्ष और उदारवादी नेता अली लारीजानी भी शामिल हैं, जिन्हें सबसे आगे माना जाता था।

गार्जियन काउंसिल कभी भी ये नहीं बताता है, कि वो किसी के नाम किस आधार पर खारिज करता है। जो पता है, उसके मुताबिक, उम्मीदवारों के लिए पहली शर्त ये होती है, कि वो सुप्रीम लीडर का वफादार हो। पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद और सुप्रीम लीडर के बीच कई बातों को लेकर मतभेद थे और पिछले राष्ट्रपति चुनाव में भी उनका नामांकन खारिज कर दिया गया था।

Iran President Election 2024

चुनाव में किसका मना जा रहा है पलड़ा भारी?

मोहम्मद बाघेर गालिबफ और सईद जलीली को सबसे ज्यादा फेवरेट माना जा रहा है। ये दोनों नेता रूढ़िवादी और कट्टर इस्लामिक हैं। लेकिन, इन दोनों के बीच मोहम्मद बाघेर गालिबफ को थोड़ा उदारवादी माना जाता है, जबकि जलीली काफी ज्यादा कट्टर इस्लामिक नेता माने जाते हैं।

सईद जलीली के बारे में कहा जाता है, कि उन्हें सुप्रीम लीडर का समर्थन हासिल है। इसके अलावा उन्हें देश की शक्तिशाली अर्धसैनिक बल IRGC के साथ भी उनके मजबूत संबंध हैं। इसके अलावा, वह मारे गये राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी के भी करीबी हैं और 2021 के चुनाव में दिवंगत राष्ट्रपति का समर्थन करते हुए उन्होंने अपना नाम वापस ले लिया था।

वहीं, मोहम्मद बाघेर गालिबफ एक टेक्नोक्रेट हैं और उनके भी IRGS से करीबी संबंध हैं और सुप्रीम लीडर की भी गुड लिस्ट में उनका नाम है, लेकिन माना जा रहा है, कि वो देश की अति-रूढ़िवादी मीडिया आउटलेट्स के निगेटिव कैम्पेन के शिकार होंगे और मीडिया का समर्थन सईद जलीली को मिलेगा।

तीसरे उम्मीदवार पेजेशकियन सुधारवादी ईरानी राजनीति का प्रतिनिधित्व करने वाले एकमात्र उम्मीदवार हैं, लेकिन इस्लामिस्ट समाज में उन्हें स्वीकार्यता मिलने की संभावना काफी कम है। हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है, कि अगर मोहम्मद बाघेर गालिबफ और सईद जलीली के बीच वोटों का विभाजन होता है, तो फिर उनकी लॉटरी लग सकती है। हालांकि, सुधारवादी मतदाताओं के वोट उन्हें मिल सकते हैं।

हालांकि, ईरान में सुधारवादी आंदोलन को पहले ही राजनीतिक तौर पर काफी कमजोर कर दिया गया है और सुधारवादी नेताओं को चुनावी सिस्टम से बाहर कर दिया गया है, लिहाजा इस बात के कोई उम्मीद नहीं हैं, कि जो अगला राष्ट्रपति बनेगा, वो एक भी सुधारवादी फैसले लेगा!

क्या ईरान में राजनीतिक बदलाव संभव है?

ईरान में पिछले दो सालों से लगातार सरकार विरोधी आंदोलन किए जा रहे हैं और उस आंदोलन की आंच अभी भी धीमी नहीं पड़ी है। हालांकि, देश की सरकार ने बड़ी ही बेरहमी से सुधार आंदोलनों को कुचला है और दर्जनों लोगों को फांसी दी गई है, फिर भी आंदोलन की आग कहीं ना कहीं सुलगती रहती है।

सितंबर 2022 में कुर्द लड़की महसा अमीनी की मौत के बाद जो भारी विरोध प्रदर्शन हुए थे और जिस तरह से उस आंदोलन के दौरान लोगों को फांसी से लटकाया गया था, उसने देश की एक बड़ी आबादी की राजनीतिक व्यवस्था से उम्मीदें तोड़ दी हैं, लिहाजा इस बात की उम्मीद काफी कम है, कि चुनाव में ज्यादा मतदान हो सकता है। लिहाजा, पूरी आशंका इस बात को लेकर है, कि देश का अगला नेता कट्टर सोच का होगा, जो इस्लामिक शासन को लोगों के और दमन का अधिकार देगा।

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