कांधार प्लेन हाइजैक में अटल सरकार ने नहीं किया रिहा, कांग्रेस ने छोड़ा, फिर शाहिद लतीफ ने कैसे मचाया आतंक?
पठानकोट हमले के मास्टरमाइंड और जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े आतंकी शाहिद लतीफ की पाकिस्तान में गोली मारकर हत्या कर दी गई है। सियालकोट में अज्ञात हमलावरों ने उसकी गोली मारकर हत्या कर दी।
शाहिद लतीफ सियालकोट की नूत मस्जिद में मौलवी के रूप में काम कर रहा था। सियालकोट पुलिस ने कहा कि लतीफ की हत्या एक मस्जिद के अंदर की गई। फिलहाल वे अभी भी हमलावरों की पहचान करने की कोशिश कर रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक हमले में जैश का एक और आतंकी मारा गया। घटना को अंजाम देने के बाद बंदूकधारी मोटरसाइकिल पर सवार होकर घटनास्थल से भाग गए और पुलिस ने हत्या की जांच शुरू कर दी है।
एनआईए ने यूएपीए के तहत शाहिद के खिलाफ केस दर्ज किया था। वो भारत सरकार की हिट लिस्ट में शामिल था। भारत सरकार ने लतीफ को 2010 में रिहा कर दिया था।
शाहिद तलीफ पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के गुजरांवाला का रहने वाला था। बाद में जैश-ए-मोहम्मद से जुड़कर वो सियालकोट सेक्टर का कमांडर बन गया। उसका काम भारत में आतंकवादियों को लॉन्च करना और आतंकवादी हमलों की योजनाएं बनाना था।
शाहिद लतीफ को 12 नवंबर, 1994 को गिरफ्तार किया गया था। उस पर आतंकी गतिविधि को अंजाम देने का आरोप था। उसे यूएपीए के तहत अरेस्ट किया गया था।
शाहिद लतीफ की गिरफ्तारी के ठीक 5 साल बाद 24 दिसंबर 1999 को आतंकवादियों ने इंडियन एयरलाइंस के विमान आईसी 814 का अपहरण कर लिया।
आतंकवादियों ने तब 155 बंधक यात्रियों को रिहा करने के बदले अपने 36 आतंकी साथियों की रिहाई की मांग की थी। इसमें शाहिद लतीफ का भी नाम शामिल था।
तब भारत सरकार ने शाहिद लतीफ को रिहा करने से इनकार कर दिया था। हालांकि वे मसूद अजहर, अहमद जरगर और शेख अहमद उमर सईद को रिहा कराने में सफल रहे।
भारत की जेलों में 16 साल की सजा काटने के बाद साल 2010 में शाहिद लतीफ को रिहा कर दिया गया। उस वक्त देश में मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान संग रिश्ते सुधारने के लिए मनमोहन सरकार ने शाहिद लतीफ को रिहा कर दिया था। इतना ही नहीं तब शाहिद के अलावा कई अन्य आतंकियों भी आजाद कर दिया गया था।
28 मई 2010 को जम्मू, श्रीनगर, आगरा, वाराणसी, नैनी और तिहाड जेल से लश्कर-ए-तोएबा, हिजबुल मुजाहिदीन और जैश-ए-मोहम्मद जैसे खतरनाक आतंकवादी संगठनों के कुल 25 आतंकियों को रिहा करके वाघा बार्डर के रास्ते पाकिस्तान भेज दिया गया।
तत्कालीन कांग्रेस सरकार की इस गलती की सजा भारत को कुछ ही साल के बाद भुगतनी पड़ी। 2016 में पंजाब के पठानकोट स्थित एयरबेस पर एक घातक आतंकी हमला हुआ था। इस दौरान आतंकियों और भारतीय सैनिकों के बीच मुठभेड़ 3 दिनों तक चली थी।
इस हमले में सेना के सात जवान शहीद हुए थे। इस हमले का मास्टर माइंड शाहिद लतीफ ही था। लतीफ ने ही आतंकी हमले को अंजाम देने वाले 4 आतंकियों को गाइड किया था।
यह पहली बार नहीं है जब भारत में किसी आतंकवादी घटना को अंजाम देने वाले आतंकी की हत्या कर दी गई है। इससे पहले भी पाकिस्तान, अफगानिस्तान आदि देशों में कई आतंकियों की अज्ञात अपराधियों ने गोली मारकर हत्या कर दी है।
20 फरवरी 2023 को हिजबुल मुजाहिदीन से जुड़े आतंकी बशीर अहमद पीर उर्फ इम्तियाज आलम की पाकिस्तान में अज्ञात हमलावरों ने रावलपिंडी में गोली मारकर हत्या कर दी थी।
22 फरवरी, 2023 को अफगानिस्तान के काबुल में आतंकी एजाज अहमद अहंगर की अज्ञात लोगों द्वारा हत्या कर दी गई। वह भारत में इस्लामिक स्टेट (आईएस) को फिर से शुरू करने में जुटा हुआ था। साल 1996 में कश्मीर की जेल से छूटने के बाद वह पाकिस्तान भाग गया था।
26 फरवरी 2023 को पाकिस्तान में अल बद्र के पूर्व कमांडर सैयद खालिद रजा को अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी। अल बद्र एक कट्टर संगठन है, जो कश्मीर में आतंकियों को ट्रेंड कराता था।
4 मार्च, 2023 को नूर शालोबर को पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा इलाके में अज्ञात बंदूकधारियों ने मार डाला। शालोबर पाकिस्तानी सेना और खुफिया एजेंसी आईएसआई के साथ मिलकर कश्मीर में आतंकवाद फैलाने का काम करता था और नए आतंकियों की फौज को ट्रेंड करता था।
पिछले महीने पीओके की राजधानी मुजफ्फराबाद से 130 किलोमीटर दूर रावलकोट की एक मस्जिद में जुमे की नमाज के दौरान आतंकी मोहम्मद रियाज की हत्या कर दी गई। एक अज्ञात हत्यारे ने उसे गोलियों से भून डाला। इसी साल कश्मीर में पांच जवानों की हत्या कर दी गई थी। इसका जिम्मेदार रियाज ही था। वह छुपकर भारतीय जवानों पर हमला करने में माहिर था।












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