इन लोगों को हर साल लगानी पड़ेगी वैक्सीन, बूस्टर डोज पर WHO का पहला अनुमान
नई दिल्ली, 25 जून: कोविड-19 की बूस्टर डोज पर विश्व स्वास्थ्य संगठन का पहला अनुमान सामने आया है। इसके मुताबिक जिन लोगों को कोविड-19 से सबसे ज्यादा खतरा है, जैसे कि बुजुर्गों को, उन्हें इसके वैरिएंट से बचाव के लिए हर साल बूस्टर डोज लगवाने की जरूरत पड़ सकती है। हालांकि, यह अभी डब्ल्यूएचओ का आंतरिक दस्तावेज है और इसे अभी जारी नहीं किया गया है। लेकिन, एक अंतरराष्ट्रीय मीडिया एजेंसी के हाथ यह दस्तावेज लग गई है, जिससे बूस्टर डोज को लेकर वहां क्या मंथन चल रहा है इसकी जानकारी सार्वजनिक हो गई है। इस दस्तावेज से यह बात भी सामने आ गई कि जो लोग पूरी तरह से स्वस्थ्य हैं, क्या उन्हें भी बूस्टर डोज की आवश्यकता पड़ेगी ?

विश्व स्वास्थ्य संगठन में बूस्टर डोज को लेकर मंथन
विश्व स्वास्थ्य संगठन में भविष्य में कोविड वैक्सीन की बूस्टर डोज को लेकर चर्चा जारी है। इसपर डब्ल्यूएचओ और वैक्सीन गठबंधन में लगातार बातचीत चल रही है, जो कि वैश्विक वैक्सीन प्रोग्राम कोवैक्स का संचालन कर रहा है। इस दस्तावेज को रॉयटर्स ने देखने का दावा किया है। हालांकि, इसपर अभी चर्चा पूरी नहीं हुई है, इसलिए इस अनुमान को संशोधित भी किया जा सकता है। बता दें कि अमेरिका में वैक्सीन बनाने वाली दोनों कंपनियां मॉडर्ना और फाइजर इस बात पर लगातार जोर दे रही हैं कि लोगों में उच्च स्तरीय इम्यूनिटी बनाए रखने के लिए बूस्टर डोज की जरूरत पड़ेगी, लेकिन इसके पुख्ता प्रमाण अभी सामने नहीं आए हैं।

हाई रिस्क वालों को हर साल बूस्टर डोज की जरूरत !
बहरहाल, डब्ल्यूएचओ के दस्तावेज से इतना जरूर पता चल रहा है कि इस वक्त वह ज्यादा जोखिम वाले व्यक्तियों, जैसे कि बुजुर्गों के लिए सालाना बूस्टर डोज देने पर विचार कर रहा है और सामान्य लोगों को हर दो साल में बूस्टर डोज देने की सलाह देने की सोच रहा है। हालांकि, वह इस अनुमान पर किस आधार पर पहुंचा है, यह साफ नहीं हुआ है। लेकिन, जिस तरह से नए वैरिएंट आते रहने की आशंका है, उस हिसाब से संभावित खतरों को टालने के लिए वैक्सीन को लगातार अपडेट करते रहने की जरूरत भी पड़ सकती है। हालांकि, विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अपनी आंतरिक दस्तावेज पर कोई भी टिप्पणी करने से फिलहाल मना कर दिया है। वैसे वैक्सीन गठबंधन के एक प्रवक्ता ने कहा है कि कोवैक्स भविष्य के लिए कई तरह की संभावित परिस्थितियों के आधार पर योजनाएं बना रहा है।

बूस्टर डोज की जरूरत, गरीब देशों के लिए आफत!
8 जून के डब्ल्यूएचओ के इस दस्तावेज पर काम अभी भी जारी है और इसका यह भी अनुमान है कि अगले साल विश्व में कोविड-19 वैक्सीन की 1,200 करोड़ डोज का उत्पादन हो सकता है। यह अनुमान मौजूदा साल के 1,100 करोड़ डोज के उत्पादन के अनुमान से थोड़ा ज्यादा है। अभी तक दुनिया भर में करीब 250 करोड़ डोज लगाए जा चुके हैं, लेकिन इसमें ज्यादातर अमीर देशों की आबादी ही शामिल है। लेकिन, वैक्सीन एलायंस के अनुमानों के मुताबिक कई गरीब देशों में तो 1 फीसदी से भी कम लोगों को टीके लगे हैं। ऐसी स्थिति में विश्व स्वास्थ्य संगठन का सबसे निराशावादी पूर्वानुमान ये है कि अगर सालाना बूस्टर डोज को शामिल करना पड़ गया तो गरीब देशों की इंतजार की कतार और लंबी हो जाएगी। यही नहीं वैक्सीन उत्पादन के कई मुद्दों की वजह से खराब स्थिति में अगले साल उसने सिर्फ 600 करोड़ डोज के उत्पादन का भी अनुमान जताया है; और इसमें बूस्टर डोज की जरूरतों को शामिल करने पर स्थिति और बिगड़ सकती है।

बूस्टर डोज की जरूरत नहीं पड़ेगी अगर....
लेकिन, सबसे आशावादी पूर्वानुमान ये है कि दुनिया में जितनी भी वैक्सीन पाइपलाइन में हैं और उन्हें मंजूरी मिल जाए, वो अपने उत्पादन क्षमता के मुताबिक उत्पादन करें तो वैक्सीन उत्पादन 1,600 करोड़ डोज तक पहुंच सकता है। इससे दुनियाभर की मांग पूरी करने में मदद मिल सकती है। सबसे आशावादी अनुमान ये है कि अगर मौजूदा वैक्सीन सभी तरह के वैरिएंट पर प्रभावी रहे और लंबी सुरक्षा देने लायक रहीं तो बूस्टर की भी जरूरत नहीं पड़ेगी।












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